सरकार तैयार कर रही है गौण खनिजों के नियम, गिट्टी, पत्थर, बजरी सहित अन्य गौण खनिज होंगे महंगे

सरकार तैयार कर रही है गौण खनिजों के नियम, गिट्टी, पत्थर, बजरी सहित अन्य गौण खनिज होंगे महंगे

Ashok Gautam | Publish: Aug, 14 2019 03:14:46 PM (IST) Bhopal, Bhopal, Madhya Pradesh, India

गिट्टी, पत्थर, बजरी सहित अन्य गौण खनिज होंगे महंगे
रेत की तर्ज पर 23 गौण खनिजों को नीलाम करने की तैयारी
सरकार तैयार कर रही है गौण खनिजों के नियम

भोपाल। गिट्टी, पत्थर, बजरी सहित अन्य गौण खनिज अब महंगी होगी। सरकार २३ गौण खदानों को साधारण आवेदन पर नहीं, बल्कि रेत की तर्ज पर नीलाम करने की तैयारी कर रही है।

निविदा में शामिल उच्च बोलीकर्ता को ही खदानें आवंटित की जाएंगी। इससे जिस क्षेत्र में ठेकेदार जितनी ज्यादा बोली लगाकर खदान लेगा, वह उतनी महंगी खनिज बेंचेगा। बोली के साथ ही इसकी रायल्टी भी बढ़ाई जा सकती है।

जिलों में गौण खनिजों की खोज और खदानों का चिन्हांकन जियोलाजिस्ट और माइनिंग अधिकारियों द्वारा की जाएगी। इसके लिए खनिज साधन विभाग नियम और शर्ते तैयार कर रहा है। नियम-शर्तो तैयार होने के बाद इस प्रस्ताव को कैबिनेट की बैठक में रखा जाएगा। खनिज साधन विभाग जिला स्तर पर गौण खनिजों की खोज कर उसका क्लस्टर तैयार कर रहा है।

प्रदेश स्तर के जियोलॉजिस्ट माइनिंग की खोज करने में जिला खनिज अधिकारियों को सहयोग करने के साथ ही खदानों में खनिजों की मात्रा भी निर्धारित करेंगे। निर्धारित मात्रा के अनुसार अलग-अलग जिलों में इसकी दरे तय की जाएगी। गौण खदाने भी 10 से 15 साल के लिए लीज पर दी जाएंगी। इसके बाद उन खदानों को फिर से नए सिरे से नीलाम किया जाएगा। इसके चलते खनिज साधन विभाग गौण खनिजों के लिए सीधे आवेदन लेना बंद कर दिया है।

अभी तक स्थानीय लोग गौण खनिजों की खुद खोज करते थे और उसकी लीज के लिए खनिज साधन विभाग में आवेदन करते थे। आवेदन के आधार पर ही लोगों को खदाने आवंटित की जाती थी। अगर किसी एक खदान के लिए दो से अधिक आवेदन आते थे तो वह खदद्मन उसे आवंटित की जाती थी, जिसका सबसे पहले आवेदन आता था।

बढ़ती जा रही है गौण खनिजों की मांग

गौर खनिजों की मांग पहले की तुलना में लगातार बढ़ती जा रही है। गौण खनिजों के नए-नए उत्पाद बनाकर ठेकेदार व्यावसायिक उपयोग कर रहे हैं, लेकिन सरकार को इससे जितनी आय होना चाहिए वह नहीं हो रही है। इसके अलावा आवेदनकर्ता खदानों में गौण खनिज की जितनी मात्रा बताते हैं, उससे कही ज्यादा खनिज खदानों में होती है।

वहीं कई बार सड़क, पुल-पुलिया सहित अन्य निर्माण कार्य करने वाले ठेकेदार भी गौण खनिजों का उत्खनन बिना किसी अनुमति के करते हैं। अब क्लस्टर बनने के बाद वे ऐसा नहीं कर पाएंगे। क्योंकि क्लस्टर में छोटी-छोटी खदानों को भी इसमें शामिल किया जाएगा और यह खदाने एक ही ठेकेदार को आवंटित होंगी। ऐसे होने से गौण खनिजों की चोरी अथवा बिना अनुमति के उत्खनन करने पर ठेकेदार आपत्ति करेंगे।

 

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