पटवा को मिला पद्मविभूषण, PM नरेंद्र मोदी को कर दिया था आउट

MADHYA PRADESH के पूर्व चीफ मिनिस्टर और भाजपा के वरिष्ठ नेता स्व. सुंदरलाल पटवा को मरणोपरांत गणतंत्र दिवस के अवसर पर पद्म विभूषण दिया जाएगा।


भोपाल। MADHYA PRADESH के पूर्व चीफ मिनिस्टर और भाजपा के वरिष्ठ नेता स्व. सुंदरलाल पटवा को मरणोपरांत गणतंत्र दिवस के अवसर पर पद्म विभूषण दिया जाएगा। पटवा के भतीजे प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री सुरेंद्र पटवा यह सम्मान ग्रहण करेंगे। इसकी पुष्टि रायसेन में आयोजित एक कार्यक्रम में सुरेंद्र पटवा ने की है।

पटवा ने कर दिया था मोदी का बॉयकाट
Madhya pradesh के ex cm सुंदरलाल पटवा के बारे में कहा जाता है कि वे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कतई पसंद नहीं करते थे। पटवा ने नरेंद्र मोदी का बॉयकाट कर रखा था। बात उस समय की है जब भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष कुशाभाऊ ठाकरे थे।


प्रदेश में संगठन मंत्री का जिम्मा कृष्णमुरारी मोघे के पास था। पार्टी हाईकमान ने ऐसे समय में राष्ट्रीय महामंत्री नरेंद्र मोदी को मध्यप्रदेश का प्रभारी बना दिया था। इस पर पटवा बेहद खफा हो गए थे। मोदी को प्रभारी बनाने के पीछे कारण यह बताया जाता है कि वे जहां भी प्रभारी रहते हैं, पार्टी का चुनाव में जीत मिल ही जाती है। हिमाचल प्रदेश और गुजरात के प्रभारी रहते हुए उन्होंने पार्टी को चुनाव में जीत दिलाई थी। इसी के बाद मध्यप्रदेश का प्रभारी बनाया जाना सुंदरलाल पटवा और कृष्णमुरारी मोघे को रास नहीं आया। यह रोचक प्रसंग पुस्तक राजनीतिकनामा में मिलता है। 


किताब के मुताबिक बाहर का कोई आदमी मध्यप्रदेश में आकर क्या कर सकता है। मोदी की ठाकरे से शिकायत की गई थी कि मध्यप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार तो बन रही है, फिर नरेंद्र मोदी के सिर जीत का सेहरा क्यों बांधना चाहिए।किताब में यह भी उल्लेख है कि नरेंद्र मोदी उस समय प्रदेश में अघोषित बॉयकाट झेल रहे थे और अपने आप को अछूत जैसा महससू करने लगे थे।


बताया जाता है कि उस समय नरेंद्र मोदी  हमेशा ही अपने व्यवहार के कारण मध्य प्रदेश के नेताओं को नहीं सुहाते थे। वे हमेशा भाजपा की बैठकों में अपना भाषण देकर निकल जाते थे, दूसरे नेताओं को नहीं सुनते थे। इसका कड़ा विरोध भी होता था। उस समय सुंदरलाल पटवा खेमा नरेंद्र मोदी पर हावी था।


कमलनाथ के गढ़ में पटवा ने खिलाया था कमल
छिंदवाड़ा देश की उन लोकसभा सीटों में से एक है, जहां एक-दो अपवादों को छोड़ कांग्रेस ही जीतती रही है। जब कमलनाथ का नाम हवाला में आया तो उनकी पत्नी को छिंदवाड़ा से टिकट दिया गया। इसके एक साल बाद ही जब कमलनाथ बरी हो गए तो उन्होंने तुरंत ही अपनी पत्नी से इस्तीफा दिलवाकर खुद चुनाव लड़ा। इसे चुनौती मानते हुए पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा ने उन्हें उन्हें पटकनी दी और पहली बार छिंदवाड़ा में भाजपा जीती थी।


हवाला कांड में नाम आने के बाद कांग्रेस नेता कमलनाथ 1996 का चुनाव नहीं लड़ सके थे। ऐसी स्थिति में पत्नी अलका कमलनाथ को लड़ाया और वे जीत भी गईं। एक साल बाद जब कमलनाथ हवाला मामले से बरी हो गए। इसके बाद उन्होंने पत्नी से इस्तीफा दिलवा दिया और खुद चुनाव मैदान में उतर गए। इसे चुनौती मानते हुए भाजपा ने पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा को मैदान में उतार दिया। यह अब तक का इकलौता मौका था जब छिंदवाड़ा में भाजपा का कमल खिल गया था। 1997 के फरवरी में पटवा 37,680 वोटों से जीत गए थे।


बंबई बाजार आपरेशन ने किया डॉन का सफाया
इंदौर का बंबई बाजार आपरेशन इंदौर के अलावा मध्यप्रदेश में आज भी याद किया जाता है। सितम्बर 1991 की बात है जब इंदौर में बाला बेग नामक कुख्यात व्यक्ति का वर्चस्व था। बंबई बाजार में तनाव था, कुछ लोगों ने पुलिस चौकी पलट दी थी। इस घटना के बाद प्रशासन भी हिल गया था।

तत्कालीन एसपी अनिल धस्माना जब फोर्स के साथ बाला बेग के जुए के अड्डे पर छापा मारने पहुंचे तो धस्माना को मारने के लिए बाला बेग ने ऊपरी मंजिल से सिलबट्टा फेंक दिया, एसपी के पीछे खड़े छेदीलाल दुबे नामक अंगरक्षक ने साहब को धक्का देकर बचा लिया। लेकिन, यह सिलबट्टा छेदीलाल के ऊपर गिर गया। वह मारा गया। इस हादसे से पटवा अन्दर तक हिल गए और उन्होंने बाला बेग पर सख्ती के निर्देश दिए।


इसके बाद एसपी धस्माना ने 'आपरेशन बंबई बाजार' चला दिया। भारी फोर्स ने बंबई बजार क घेर लिया और जुएं-सट्टे के अड्डे को नेस्तनाबूद कर दिया। धस्माना ने खुद दरवाजा तोड़कर बालाबेग को गिरफ्तार किया गया। उसका शहर में जुलूस भी निकाला था।


भोपाल की वीआईपी रोड पटवा दी देन
भोपाल में बनी वीआईपी रोड पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा की ही देन है। यह बात पूर्वमुख्यमंत्री बाबूलाल गौर भी कहते हैं। उन्होंने इस सड़क का नाम सुंदरलाल पटवा के नाम पर रखे जाने की भी मांग कई बार की है। पटवा सरकार के समय यह इलाका रेतघाट के नाम से प्रसिद्ध था। यहां से आवागमन का कोई रास्ता भी नहीं था। तब यहां वीआईपी रोड बनाने का निर्णय लिया गया था।

अपने मंत्रियों को फ्री हैंड देते थे पटवा
सुंदरलाल पटवा के मंत्रिमंडल में शिक्षा मंत्री रहे विक्रम वर्मा यादों के पन्नों से बताते हैं कि पटवा मंत्रियों को फ्री हैंड देने के हिमायती थे, तब तबादले और अन्य कोई नोटशीट मुख्यमंत्री हाऊस से सीधे नहीं आती थी। मंत्री बेहद पावरफुल थे और उन्हें अपना काम करने की पूरी आजादी थी। वर्मा बताते हैं कि वे अपनी बात रखने में कभी संकोच नहीं करते थे, लेकिन इससे पहले वे सबकी बात सुनते रहते थे।


तब पटवा ने दिग्विजय को बताया था ईमानदार
दिग्विजय सिंह पर 1998 के विधानसभा चुनाव के दौरान पटवा और वर्मा ने आरोप लगाए थे कि हवाला कांड के आरोपी बीआर जैन से मिले हुए हैं। उन्हें भिलाई में भूमि दी गई। पटवा ने आरोप लगाया था कि दिग्विजय को दिल्ली में आउट ऑफ टर्न आवास दिया गया। बाद में आरोप गलत साबित हो गए। पटवा  और पूर्व केंद्रीय मंत्री विक्रम वर्मा ने भोपाल कोर्ट में लिखित में दिया था कि दिग्विजय सिंह ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ हैं। उन्होंने कोई भ्रष्टाचार नहीं है।


पटवा शिवराज से बोले- दस साल और रहना है
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के राजनीतिक गुरु सुंदरलाल पटवा है। पार्टी के एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने बताया था कि सुबह विदेश जाने से पहले प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह ने फोन पर कहा कि अच्छा काम कर रहे हैं करते रहो। शिवराज सिंह के भाषण के बीच पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा ने अपनी कुर्सी पर बैठे-बैठे ही कहा कि दस साल और रहना है।




Manish Gite
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