scriptparents demand for online class | ऑनलाइन क्लास बंद कर अभिभावकों को कर रहे मजबूर, फिर सहमति मांगने का क्या अर्थ | Patrika News

ऑनलाइन क्लास बंद कर अभिभावकों को कर रहे मजबूर, फिर सहमति मांगने का क्या अर्थ

- आंदोलन बनती जा रही ऑनलाइन क्लासेज जारी रखने की मांग, कार्मल के बाद सागर पब्लिक स्कूल के अभिभावक लामबंद

- सागर पब्लिक स्कूल के 40 से अधिक अभिभावक पहुंचे कलेक्ट्रेट, सौंपे अलग-अलग पत्र

भोपाल

Published: November 26, 2021 11:43:58 pm

भोपाल. सर, कोरोना संक्रमण और महामारी अभी गई नहीं है। कई राज्यों में बड़ी संख्या में केस आ रहे हैं, इनमें स्कूली छात्र भी संक्रमित हो रहे हैं। जबकि बच्चों का अभी टीकाकरण भी नहीं हुआ है। हम अभिभावक बच्चों के स्वास्थ्य के खतरे को देखते हुए उन्हें अभी स्कूल नहीं भेजना चाहते, लेकिन हमें ऐसा करने के लिए मजबूर किया जा रहा है। इसलिए आप स्कूलों को ऑनलाइन क्लास लगाने के निर्देश देने की कृपा करें। यह गुहार सागर पब्लिक स्कूल के अभिभावकों ने शुक्रवार को कलेक्ट्रेट पहुंचकर कलेक्टर से लगाई। 40 से अधिक अभिभावकों ने अलग-अलग पत्र सौंपकर अपनी मांग रखी।
अभिभावकों में शामिल शैलेष बाबा ने बताया कि, सागर पब्लिक स्कूल में 23 नवम्बर से ऑनलाइन क्लास पूरी तरह बंद कर दी गई हैं, इसके लिए अभिभावकों से कोई सहमति नहीं ली गई है। अभिभावक कोरोना संक्रमण और बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर चिङ्क्षतत है, लेकिन उनके सामने कोई विकल्प भी नहीं छोड़ा गया है। ऐसे में हमने अनुरोध किया है कि जब तक पूर्ण टीकाकरण नहीं हो जाता कलेक्टर ऑनलाइन क्लास नियमित रूप से जारी करने के आदेश दें, एवं परीक्षा भी ऑनलाइन कराना सुनिश्चित करने की कृपा करें।
ऑनलाइन क्लास बंद कर अभिभावकों को कर रहे मजबूर, फिर सहमति मांगने का क्या अर्थ
ऑनलाइन क्लास बंद कर अभिभावकों को कर रहे मजबूर, फिर सहमति मांगने का क्या अर्थ
लोक शिक्षण संचालनालय ने दायर की केविएट

एक ओर पालक महासंघ, जागृत अभिभावक संघ, नागरिक अधिकार संगठन, सागर पब्लिक स्कूल, कार्मल कॉन्वेंट स्कूल से लेकर केन्द्रीय विद्यालय तक के अभिभावक ऑनलाइन कक्षाएं बंद करने के विरोध में है, वहीं शिक्षा विभाग सरकार के मनमाने आदेश का बचाव करने में लगा है। अभिभावकों और उनके संगठनों के न्यायालय जाने के कदम का अनुमान लगाते हुए लोक शिक्षण संचालनालय ने उच्च न्यायालय में केविएट दायर की है जिससे किसी संगठन की अपील पर उन्हें भी अपना पक्ष रखने का मौका मिले। हालांकि कानून के जानकारों का कहना है कि एक ओर अभिभावकों से सहमति मंगाकर हर तरह का जोखिम उन पर डालना वहीं स्कूलों को ऑनलाइन क्लास बंद करने का रास्ता देकर अभिभावकों को बच्चों को स्कूल भेजने के लिए मजबूर करना इतना विरोधाभासी और स्कूलों के पक्ष में झुका फैसला है कि इसका ज्यादा देर तक बचाव करना विभाग के लिए संभव नहीं होगा।

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