scriptPassion for army: Did not sit on campus, got out of interview 5 times | सेना के प्रति जज्बा: कैंपस में नहीं बैठे, 5 बार इंटरव्यू से बाहर हुए, छठवीं बार में बनें लेफ्टिनेंट | Patrika News

सेना के प्रति जज्बा: कैंपस में नहीं बैठे, 5 बार इंटरव्यू से बाहर हुए, छठवीं बार में बनें लेफ्टिनेंट

राजधानी के सोहम सिंह कुशवाहा को सीडीएस में मिली एआइआर-58, अब आइएमए देहरादून में लेंगे ट्रेनिंग

भोपाल

Updated: July 17, 2021 07:40:27 pm

भोपाल। यूपीएससी की कंबाइंड डिफेंस सर्विसेस(सीडीएस) में शहर के सोहम सिंह कुशवाहा को एआइआर-58 मिली है। वे आइएमए देहरादून से ट्रेनिंग लेकर इंडियन आर्मी में लेफ्टिनेंट बनेंगे। सोहम ने तीन साल पहले सेना में अफसर बनने का सपना देखा था। वे इसके प्रति इतने समर्पित थे कि कॉलेज कैंपस प्लेसमेंट में भी शामिल नहीं हुए। उस दिन भी वे सीडीएस की ही तैयारी कर रहे थे। पांच बार एसएसबी इंटरव्यू से बाहर हो गए, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और छठवीं बार में सफलता हासिल की।

Lieutenant
Lieutenant in indai army
सिर्फ इंडियन आर्मी में ऑफिसर बनना ही था लक्ष्य
सोहम ने बताया कि मैंने एक निजी कॉलेज से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की है। छठवें सेमेस्टर में ही मैंने तय कर लिया था कि मुझे आर्मी में लेफ्टिनेंट बनना है। 2019 में मैंने तैयारी शुरू कर दी। इस दौरान कॉलेज में कई बार कंपनियां प्लेसमेंट के लिए भी आईं, लेकिन मैं किसी में भी शामिल नहीं हुआ। क्योंकि मेरा लक्ष्य सिर्फ इंडियन आर्मी में ऑफिसर बनना ही था। मैं पिछली पांच बार से एग्जाम दे रहा था, हर बार एसएसबी इंटरव्यू में बाहर हो जाता था। मैंने इस बार अपनी उन गलतियों पर ध्यान केंद्रीत किया, जिसके चलते मुझे असफलता मिल रही थी।

हर सवाल का जवाब खुद तलाशता था
सोहम ने कहा कि इस एग्जाम में मैथ्स और इंग्लिश स्कोरिंग सब्जेक्ट होते हैं, इसलिए इस पर फोकस करें। जीके के लिए न्यूज पेपर और मैगजीन जरूर पढ़े। एसएसी इंटरव्यू में कैंडिडेट को ओवरऑल वॉच किया जाता है। यह देखा जाता है कि वह इंडियन आर्मी का जेंटलमैन कैडेट बन सकता है या नहीं। इससे पहले इंटरव्यू में मैं पूछे गए सवालों को रटे-रटाए उत्तर देता था, इसी कारण इंटरव्यूअर मुझे रिजक्ट कर देते थे। मैंने हर सवाल का जवाब तलाशना शुरू किया। जो भी सुनता-पढ़ता, उसके पीछे कारण खोजने लगा। रटने के बजाए डिप स्टडी पर फोकस किया। वे ऑफ थिकिंग चेंज करने से मुझे सफलता मिली।


दादा थे फ्रीडम फाइटर और सैनिक
सोहम के दादा बाबू सिंह कुशवाह स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। आजादी के बाद उन्होंने भारतीय सेना में सेवाएं दीं। सोहम के पिता यशवंत सिंह कुशवाह बास्केटबॉल प्लेयर रह चुके हैं। वे बच्चों का बास्केेटबॉल की कोचिंग देते हैं। अपेक्स में कार्यरत यशवंत सिंह कुशवाह की प्रेरणा से ही सोहम ने बचपन से ही बास्केटबॉल में हाथ आजमाए और वे खुद राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भागीदारी कर चुके हैं। सोहम की मां निशा सिंह गर्वनमेंट टीचर हैं।

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