सुविधाओं के अभाव में स्वास्थ्य केंद्र खुद 'बीमार'

सुविधाओं के अभाव में स्वास्थ्य केंद्र खुद 'बीमार'

manish kushwah | Publish: Sep, 08 2018 04:42:27 PM (IST) Bhopal, Madhya Pradesh, India

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से मरीज हो रहे निराश, जेपी अस्पताल जाने की मजबूरी

भोपाल/कोलार. सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के राज्य एवं केंद्र सरकार द्वारा विभिन्न योजनाओं के जरिये करोड़ों रुपए खर्च किए जाते हैं, पर इन स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मरीजों तक नहीं पहुंच रहा है। कोलार में स्वास्थ्य सुविधाएं महैया कराने के उद्देश्य से वर्ष 2013 में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बनाया गया था, पर यहां आने वाले मरीजों को इन सुविधाओं का लाभ नहीं मिल रहा है, नतीजतन अधिकतर मरीज शिवाजी नगर स्थित जेपी अस्पताल जाने को मजबूर हैं। स्वास्थ्य केंद्र में रोजाना 250 से 300 मरीज आते हैं, जिनके लिए दस डॉक्टर्स की तैनाती तो की गई है, पर इमरजेंसी सुविधा सिर्फ नाम की ही है। स्थानीय रहवासियों का आरोप है कि इमरजेंसी सेवा ड्रेसर के भरोसे ही रहती है।

सोनोग्राफी की नहीं मिली सुविधा
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को बने हुए पांच साल बीतने एवं तकरीबन तीन लाख की आबादी होने के बावजूद यहां सोनोग्राफी की सुविधा नहीं मिल सकी है। केंद्र में सोनोग्राफी मशीन तो आ गई है, पर इसे शुरू नहीं किया जा सका है। यहां रोजाना कई मरीज ऐसे पहुंचते हैं जिन्हें सोनोग्राफी जांच कराना जरूरी है। ऐसे में ये सभी निजी सेंटर्स पर 600 से 800 रुपए देकर जांच करवाते हैं।

उदासीनता ने बिगाड़ी स्थिति
रहवासियों का आरोप है कि तकरीबन चार करोड़ की लागत से बनाए गए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सुविधाओं के विस्तार की फिक्र न तो स्वास्थ्य विभाग को है और न ही स्थानीय जनप्रतिनिधियों को। जांच, दवाएं समेत सुविधाओं के अलावा स्टाफ की कमी भी बनी रहती है। नतीजतन मरीजों को निजी अस्पतालों समेत क्लिनिक का रुख करना पड़ता है।

नहीं बढ़ाई गई क्षमता
तीन लाख की आबादी के लिए तीस बिस्तर का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नाकाफी साबित हो रहा है। आबादी के लिहाज से यहां बेड की क्षमता एवं स्वास्थ्य सुविधाओं में विस्तार की जरूरत है। फिलहाल यहां दस डॉक्टर पदस्थ हैं, जिनमें से आठ सुबह और शाम ओपीडी में और दो डॉक्टर इमरजेंसी ड्यूटी में तैनात किए जाने का दावा किया जाता है, पर रहवासियों की मानें तो इमरजेंसी सेवाएं यहां न के बराबर हैं। आपात स्थिति में घायलों को जेपी या हमीदिया रैफर कर दिया जाता है।

अस्पताल में रोजाना 250 से अधिक मरीज आते हैं और सभी का बेहतर इलाज किया जाता है। सोनोग्राफी मशीन आ गई है, जल्द ही इसकी सुविधा भी मिलना शुरू हो जाएगी।
डॉ. अरविंद टंडन, प्रभारी, कोलार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र

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