पीसी शर्मा और बाला बच्चन को मिला अतिरिक्त प्रभार

दोनों मंत्री संभालेंगे ये विभाग...

By: Amit Mishra

Published: 03 Jan 2019, 04:31 PM IST

भोपाल। मध्य प्रदेश में कांग्रेस सरकार ने आज दो मत्रियों को अतिरिक्त प्रभार सौंपा है। सरकार ने पीसी शर्मा और बाला बच्चन को अतिरिक्त प्रभार आदेश निकालते हुए पीसी शर्मा को जनसंपर्क ,विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, विमानन, धार्मिक न्यास एंव धर्मस्व विभाग और बाला बच्चन को तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एंव रोजगार विभाग, लोक सेवा प्रबंधन विभाग का दायित्व सौंपा है।


गौरतलब है कि ये सभी विभाग मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अपने पास रखे थे। गुरुवार को मुख्यमंत्री ने अपने विभागों का कार्य विभाजन इन मंत्रियों के बीच कर दिया। इसके पहले बाला बच्चन को गृह एवं जेल विभाग और पीसी शर्मा को कानून विभाग दोनों मत्रियों के पास थे।

 

 

मंत्री: क्या रह चुके हैं या क्या थी चाहत: ये मिला विभाग

1 : विजयलक्ष्मी साधौ : पूर्व में भी स्वास्थ्य मंत्री रह चुकी हैं। उनके अनुभव को देखते हुए जिम्मा दिया गया। : संस्कृति व चिकित्सा शिक्षा

2 : सज्जन सिंह वर्मा : नगरीय प्रशासन विभाग चाहते थे, पर कमलनाथ के कहने पर मान गए। : लोक निर्माण

3 : हुकुम सिंह कराड़ा : कमलनाथ की सूची में पहले से जल संसाधन ही था। ये खुद भी उससे संतुष्ट थे। : जल संसाधन

4 : डॉ. गोविंद सिंह : गृह विभाग चाहते थे, पर दिग्विजय ने मना लिया। संसदीय कार्य अतिरिक्त मिला। : सहकारिता व संसदीय कार्य

5. बाला बच्चन : पहले परिवहन विभाग भी साथ था। विवाद गहराने से नुकसान हुआ। अब गृह और जेल विभाग है। : गृह व जेल विभाग

6 : आरिफ अकील : शुरू से यही विभाग थे, केवल सूक्ष्म उद्योग अलग मिले। : गैस राहत, अल्पसंख्यक, अपिव- सूक्ष्म उद्योग

7 : ब्रजेंद्र सिंह राठौर : दिग्विजय गुट के हैं। इन्हें पहले पीएचई दे रहे थे। विवाद के बाद विभाग बदला। : वाणिज्यक कर

8 : प्रदीप जायसवाल : कमलनाथ समर्थक हैं। पहले से कोई विरोध नहीं था। खनिज विभाग ही पहले सूची में था। : खनिज संसाधन

9 : लाखन सिंह यादव : सिंधिया गुट के हैं। विरोध के बावजूद इन्हें अच्छा विभाग नहीं मिल पाया। : पशुपालन व मत्स्यपालन

10 : तुलसी सिलावट : सिंधिया समर्थक हैं। गृह चाहते थे, लेकिन नहीं मिला। स्वास्थ्य से संतुष्ट हुए। : स्वास्थ्य विभाग

 

11 : गोविंद सिंह राजपूत : सिंधिया समर्थक हैं। राजस्व से संतुष्ट नहीं थे। परिवहन के मिलने पर माने। : राजस्व-परिवहन

12 : इमरती देवी : शुरुआत से महिला बाल विकास पर अड़ी थीं। सिंधिया समर्थक हैं। पसंद चली। : महिला एवं बाल विकास

13 : ओमकार मरकाम : शुरुआत से ही आदिम जाति विभाग था। संतुष्ट थे। इनके विभाग पर कोई खींचतान नहीं। : आदिम जाति व घुमक्कड़

14 : प्रभुराम चौधरी : पहले से स्कूल शिक्षा ही था। इस विभाग पर कोई खींचतान नहीं थी। : स्कूल शिक्षा विभाग

15 : प्रियव्रत सिंह : दिग्विजय के रिश्तेदार हैं। इनके विभाग को लेकर कोई खींचतान नहीं थी। : ऊर्जा विभाग

16 : सुखदेव पांसे : इन्हें पहले श्रम विभाग प्रस्तावित था। नाराज थे, अब पीएचई से संतुष्ट हुए। : पीएचई विभाग

17 : उमंग सिंघार : सिंघार को शुरू से ही वन विभाग मिला था। इस विभाग पर कोई खींचतान नहीं। : वन विभाग

18 : हर्ष यादव : सूक्ष्म उद्योग पहले प्रस्तावित था। अब कुटीर ग्रामोद्योग दिया गया। : कुटीर-ग्रामोद्योग

19 : जयवद्र्धन सिंह : पहले वित्त विभाग था। विवाद गहराया तो नगरीय प्रशासन से संतुष्ट किया। : नगरीय प्रशासन

20 : जीतू पटवारी : जनसम्पर्क चाह रहे थे, पर विवाद हुआ। उच्च शिक्षा से माने। : खेल-युवा कल्याण व उच्च शिक्षा

 

21 : कमलेश्वर पटेल : शुरुआत से ही पंचायत एवं ग्रामीण विकास था। विभाग पर खींचतान नहीं : पंचायत एवं ग्रामीण विकास

22 : लखन घनघोरिया : पहले से ही यही विभाग प्रस्तावित था। कमलनाथ समर्थक हैं। संतुष्ट हैं। : सामाजिक न्याय व अजा कल्याण

23 : महेंद्र सिसोदिया : कृषि व पीएचई चाह रहे थे। सिंधिया समर्थक हैं, श्रम दिया गया। : श्रम कल्याण

24 : पीसी शर्मा : इन्हें उच्च शिक्षा मिलना था। विवाद से छिना। विधि से संतुष्ट करने की कोशिश। : विधि विभाग

25 : प्रद्युम्न सिंह : पहले स्कूल शिक्षा और स्वास्थ्य था, खींचतान से नुकसान। अब खाद्य दिया गया। : खाद्य नागरिक आपूर्ति

26 : सचिन यादव : शुरुआत से कृषि विभाग था। अरुण यादव के भाई होने का फायदा मिला। संतुष्ट हैं। : कृषि विभाग

27 : सुरेंद्र सिंह बघेल : इनका पर्यटन विभाग बढ़ा है। सिर्फ एनवीडीए मिलने से नाराज थे। अब संतुष्ट। : एनवीडीए व पर्यटन

28 : तरुण भनोत : पहले नगरीय प्रशासन मिल रहा था। विवाद से नुकसान, पर वित्त से कद बढ़ाया गया। : वित्त विभाग

Amit Mishra
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