6 माह में 35 फीसदी घटी पेट्रोल-डीज़ल की बिक्री, फिर 7% बढ़ा सरकार का मुनाफा, जानिए वजह

बिक्री घटी, फिर भी मुनाफे में सरकार।

By: Faiz

Published: 29 Sep 2020, 01:59 PM IST

भोपाल/ तेजी से फैल रहे कोरोना संक्रमण पर लगाम लगाने के लिए सरकार द्वारा किये गए लॉकडाउन से संक्रमण की रफ्तार को तो बहुत हद तक रोका जा सका, लेकिन इसके चलते सरकार और आमजन को बड़ा आर्थिक घाटा जरूर हुआ। हालांकि, पेट्रोल और डीजल की बात करें, तो पूर्ण और आंशिक लॉकडाउन की अवधि में, यानी करीब 6 माह में पेट्रोल-डीजल की बिक्री में 35 फीसदी गिरावट दर्ज की गई थी। बावजूद इसके प्रदेश सरकार की आय पर इसका कोई असर नहीं पड़ा। इस साल 23 सितंबर तक सरकारी खजाने में 5000 करोड़ रुपए की राशि टैक्स के रूप में राजस्व में जमा हो चुकी है। पिछले साल इन्हीं महीनों में ये राशि 4670 करोड़ रुपए थी। यानी पिछले साल के मुकाबले सरकार 7 फीसदी अधिक कमाई कर चुकी है।

 

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इसलिए बढ़ी आमदनी

टैक्स लॉ बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एस कृष्णन के मुताबिक, सरकार की आमदनी बढ़ने का कारण ये है कि, सरकार ने एक साल में तीन बार पेट्रोल-डीजल पर करीब 30 फीसदी तक टैक्स बढ़ाया है। ऐसी संभावना है कि, वित्त वर्ष 2020-21 के खत्म होते-होते पेट्रोल-डीजल से सरकार की आय पहली बार 11 हजार 500 करोड़ रुपये के स्तर को भी पार कर जाएगी।


लगातार दो साल से घटती जा रही बिक्री, फिर भी बढ़ रहा मुनाफा

प्रदेश में पेट्रोल-डीज़ल की बिक्री में गिरावट लॉकडाउन की अवधि से ही नहीं बल्कि बीते दो सालों से जारी है। बवजूद इसके सरकार की आमदनी लगातार बढ़ी है। 2019-20 के फायनेंशियल इयर की बात करें, तो उसकी बिक्री में 14 करोड़ ली. कम हुई थी। जबकि, आय 1235 करोड़ रुपये बढ़कर पहली बार 10720 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंची थी। इस बार ये कमी 86 करोड़ लीटर तक पहुंचने का अनुमान है। बावजूद इसके पेट्रोल कंपनियों का मानना है कि, अधिमास के बाद त्योहारों के समय पेट्रोल-डीजल की बिक्री सामान्य हो जाएगी।

 

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इस तरह बढ़ी आय

साल 2019-20 के फाइनेंशियल ईयर में प्रदेश सरकार 10,720 करोड़ रुपये पेट्रोल-डीजल पर आमदनी हुई थी, जबकि उस साल इसकी बिक्री 7,86 करोड़ लीटर हुई थी। लेकिन, अगर गौर करें 2020-21 के वित्तीय वर्ष पर तो सितंबर माह की 30 तारीख तक सरकार 5 हज़ार करोड़ की कमाई कर चुकी है, जबकि अब तक पेट्रोल-डीज़ल की बिक्री 300.0 करोड़ लीटर ही हुई है। दूसरे लफ्जों में समझें तो, पिछले साल पेट्रोल-डीजल की बिक्री 2.15 करोड़ लीटर प्रतिदिन थी। तब जाकर पूरे साल 7,86 करोड़ ली. बिक्री हुई थी। इस साल औसतन रोजाना 1.5 करोड़ ली. के आसपास बिक्री हो रही है, जो अब तक 300 करोड़ ली. के आसपास पहुंच पाई है।


आश्चर्यजनक बढ़ाेत्तरी

आर्थिक विशेषज्ञ मुकुल शर्मा का मानना है कि, सरकार ने पिछले एक साल में पेट्रोल-डीजल पर 30 फीसदी टैक्स बढ़ाया है। यहीं वजह है कि, बिक्री में भारी कमी होने के बावजूद प्रदेश का राजस्व बढ़ोतरी हासिल कर रहा है। जानकारों की मानें तो ये बिल्कुल आश्चर्यजनक है। क्योंकि इस दौरान देश के अन्य राज्यों में आय काफी कम ही रही है। सरकार को दूसरे मदों से आय बढ़ाकर पेट्रोल-डीजल पर टैक्स घटाने पर विचार करना चाहिए।

 

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डीजल की बिक्री में तेजी से आ रही गिरावट

ट्रांसपोर्टर्स डीजल पर टैक्स घटाने की मांग कर रहे हैं। ट्रांसपोर्ट्स कमल माखिजानी के मुताबिक पेट्रोलियम पदार्थाें की कुल बिक्री में डीजल का हिस्सा 60% है। परिवहन विभाग के अनुसार प्रदेश में 1.18 करोड़ वाहन पंजीकृत हैं। हर साल 15% नए वाहन आते हैं। इस आधार पर पेट्रोल-डीजल की खपत भी बढ़नी चाहिए। लेकिन, भाव ज्यादा होने से खपत घट रही है। यहां डीजल महंगा है, इसलिए ज्यादा ट्रांसपोर्टर दूसरे राज्यों से डीजल ले रहे हैं।


एक साल में पेट्रोल पर 9 रुपये और डीजल पर 8 रुपए बढ़ चुका है टैक्स

-पेट्रोल

2020: 33% वैट+4.5 रु./ली. एडिशनल ड्यूटी + 1% सेस यानी 39% कुल टैक्स/ली. पर।
2019: 28% वैट+1.5 रु. एडिशनल कर + 1% सेस यानी 30% टैक्स/ली. पर


-डीजल

2020: 23% वैट+3 रु./ली. एडिशनल ड्यूटी + 1% सेस यानी 27% टैक्स/ली. पर।
2019: 18% वैट+ 1% सेस यानी 19% टैक्स/ली. पर।

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