शिवराज की काट के लिए कांग्रेस चल सकती है पीके कार्ड

मध्यप्रदेश की सियासत में कमलनाथ की एंट्री के साथ ही सबकी नजर उनके उस सियासी पैंतरे पर है, जो भाजपा के शिवराज कार्ड का तोड़ साबित हो सके।

By: Arun Tiwari

Published: 22 May 2018, 12:24 PM IST

भोपाल। 71 साल के कमलनाथ के सामने भी कांग्रेस की सत्ता में वापसी प्रतिष्ठा का विषय बन गया है, यही वजह है कि कांग्रेस और कमलनाथ प्रदेश में कुछ ऐसा करने जा रहे हैं, जो रणनीतिक तौर पर भाजपा को चौंका सकता है।

2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा और 2015 में बिहार में नीतीश कुमार की कामयाबी की पटकथा लिखने वाले प्रशांत किशोर यानी पीके मध्यप्रदेश में कांग्रेस के खिवैया बन सकते हैं। विधानसभा चुनाव से 6 महीने पहले कांग्रेस पीके को चुनावी प्रबंधन का जिम्मा सौंपने को लेकर मंथन कर रही है।

कमलनाथ और उनकी टीम प्रशांत किशोर को जिम्मेदारी सौंपने पर गंभीरता से विचार कर रही है,हालांकि इस संबंध में राहुल गांधी ही फैसला करेंगे ।

कौन हैं प्रशांत किशोर यानी पीके
प्रशांत किशोर के पास काम करने के लिए संसाधनों से लैस पूरी टीम है । प्रचार अभियान के लिए पीके की टीम नए-नए आइडिया और तकनीक पर काम करती है ।

किसी भी पार्टी के लिए काम की शुरुआत करने के साथ ही पीके राजनीतिक फैसलों में मशविरा तो देते ही हैं, साथ ही पार्टी की चुनावी रणनीति, प्रबंधन, चुनाव के लिए चेहरे चुनने, नारे गढऩे, मुद्दे उठाने से लेकर सोशल मीडिया तक सारा कामकाज उनकी निगरानी में होता है।

पीके विधानसभा या लोकसभा वार मुद्दों की लिस्ट भी तैयार करते हैं और पार्टी को एक्शन प्लान भी बताते हैं। वोटरों तक पहुंचने के लिए भी पीके संगठन को प्लान देते हैं। भाजपा के माइक्रो मैनेजमेंट के मुकाबले टीम बनाकर किसी तरह काम करना है, ये भी पीके की रणनीति में शामिल है।

चाय पर चर्चा था पीके का आइडिया

नरेंद्र मोदी को चायवाले के तौर पर पेश करने की रणनीति ने 2014 में भाजपा को अभूतपूर्व सफलता दिलाई। प्रशांत किशोर ही वो शख्स हैं, जिन्होंने चाय पर चर्चा और थ्रीडी सभाओं जैसे चुनावी तरीकों से मोदी के अभियान को जन जन तक पहुंचा दिया। जुबान पर चढऩे वाले नारे गढऩा, जैसे - अबकी बार, मोदी सरकार या फिर बिहार में बहार है, नीतीश कुमार है उनके ही दिमाग की उपज हैं ।

एमपी में क्या असर डालेंगे पीके
पीके यदि मध्यप्रदेश में कांग्रेस की रणनीतिक बागडोर संभालते हैं तो भाजपा का सचेत होना लाजिमी है । इसकी बड़ी वजह है कि पीके 15 साल से सत्ता पर काबिज भाजपा के खिलाफ एंटी इनकंबंसी को मुख्य हथियार बना सकते हैं। यदि पीके मध्यप्रदेश आते हैं तो कमलनाथ के सियासी मैनेजमेंट और उनके इलेक्शन मैनेजमेंट का जोरदार गठजोड़ देखने को मिल सकता है।

 

प्रशांत किशोर चुनाव प्रबंधन के क्षेत्र में बड़ा नाम माना जाता है, मध्यप्रदेश में वो कांग्रेस के लिए कितने उपयोगी साबित हो सकते हैं या उनक ी सेवाओं का इस्तेमाल किस तरह किया जा सकता है इस पर फैसला पीसीसी और एआईसीसी मिलकर करेंगे।
पंकज चतुर्वेदी, प्रदेश प्रवक्ता,कांग्रेस

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