एक ही प्लॉट की कर दी कई रजिस्ट्री, किसे असली मानें तय नहीं कर पा रहे

गौरव, समन्वय में एक प्लॉट की कई रजिस्ट्री, एक्सपर्ट की राय लेने की तैयारी

भोपाल. गौरव, समन्वय सहित कुछ अन्य गृह निर्माण सोसायटियों में एक-एक प्लॉट की कई रजिस्ट्री हो गईं हैं। अब ये रजिस्ट्रियां ही जांच अधिकारियों के गले की फांस बन रही हैं। सोसायटियों की स्पेशल सुनवाई के बाद अफसर भी तय नहीं कर पा रहे हैं, एेसे भूखंडों के संबंध में क्या किया जाए। जो लोग लाखों रुपए खर्च कर रजिस्ट्री करा चुके हैं, उनको अब भी राहत मिलती नहीं दिख रही है। जानकार बताते हैं कि एेसे मामले कोर्ट में ही तय होते हैं। एेसे में जो लोग प्लॉट पाने के लिए पिछले १० से १५ साल से संघर्ष कर रहे हैं। उन लोगों को न्याय मिलना दूर की कौड़ी लग रहा है। खुद प्रशासन के अधिकारी भी नहीं समझ पा रहे हैं कि क्या करें। समन्वय गृह निर्माण सोसायटी में ८७० लोगों को रुपया डूब में पड़ा है। सोसायटी में पीडि़तों की बड़ी संख्या है। अभियान में ही तीन बार सोसायटी के पीडि़त शिकायत कर चुके हैं। लेकिन उन्हें राहत नहीं मिल रही। इन लोगों में से करीब १९९ केसों में एक-एक प्लॉट की दो से चार रजिस्ट्री हैं। जब शिकायतकर्ता रजिस्ट्री दिखाते हैं तो अधिकारी सिर्फ बंगले झांकने के अलावा कुछ नहीं कर पा रहे। गौरव गृह निर्माण सोसायटी में तीन प्लॉटों की तीन-तीन रजिस्ट्री हुईं। इसके अलावा कुछ और सोसायटी हैं जिनमें एक ही प्लॉट की चार-चार लोग रजिस्ट्री लेकर घूम रहे हैं। एेसे मामलों में अधिकारी एक्सपर्ट की राय लेने की बात भी कह रहे हैं। समन्वय सोसायटी के संबंध में शिकायतकर्ता एसएस मेहता का कहना है कि कागजी कार्रवाई में १५ साल निकल गए। ईओडब्ल्यू ने भी जांच कर फाइल बंद कर दी, गोविंदपुरा थाने में आरोपियों के खिलाफ एफआईआर हो रखी है। इस बार कुछ उम्मीद जागी, लेकिन मामला अधर में ही अटका है।

एक ही एड्रेस का मामला पड़ा ठंडा
संभागायुक्त और कलेक्टर के यहां हुई एक शिकायत में गौरव, गुलाबी और महाकाली सोसायटी के कार्यालय का एक ही पता होने की जानकारी दी गई थी। इस संबंध में सहकारिता इंस्पेक्टर ने जांच भी की, रिपोर्ट में सोसायटी के पदाधिकारी दोषी पाए गए, पर मामले में एफआईआर नहीं हुई, जबकि जांच करने वाले इंस्पेक्टर को सोसायटी के प्रशासक के पद से हटा दिया।

इस संबंध में जो भी उचित कार्रवाई होगी वो कराई जाएगी। हमारी कोशिश है ज्यादा से ज्यादा लोगों को न्याय मिले।
तरुण पिथोड़े, कलेक्टर

पुलिस ने तिलक गृह निर्माण संस्था की मूल दस्तियों का किया परीक्षण
को हेफिजा पुलिस ने तिलक गृह निर्माण संस्था की जमीन के मूल दस्तियों का शनिवार को रजिस्ट्रार कार्यालय जाकर जांच की । शुरुआती जांच में बड़े स्तर पर दस्तावेजों में गड़बड़ी उजागर हुई है। पुलिस ने दस्तावेज को जब्त करने कलेक्टर को पत्र लिखा है। इधर, मामले का मुख्य आरोपी शरीफ का राजनीतिक कनेक्शन उजागर हुआ है। वह खुद को एक मंत्री को अपना रिश्तेदार बताकर जालसाजी की जांच को अब तक दबाता रहा। सूत्रों की मानें तो वह शिकायतों की जांच कर रहे अफसरों को कई बार मंत्री का हवाला देकर जांच प्रभावित करता रहा। इसमें भोपाल पुलिस में पदस्थ रहे कई अफसरों का भी उसे संरक्षण मिला हुआ था। बता दें मिलेट्री रोड शाहजहांनाबाद निवासी अनवर व उनके परिवार की एयरपोर्ट रोड पर स्थित करीब ९३ एकड़ जमीन के फर्जी दस्तावेज बनाकर भू-माफिया शरीफ ने हड़प ली है।


संपत्ति का आंकड़ा जुटा रही पुलिस
मामले में अब तक गिरफ्तार हुए शरीफ, कर्नल भूपेन्द्र की संपत्ति की पुलिस जानकारी जुटा रही है। पुलिस को जानकारी मिली कि आरोपियों ने जमीन में हेरफेर कर करोड़ों रुपए की बेनामी संपत्ति बनाई है। कई प्रॉपर्टी आरोपियों ने दूसरे के नाम से भी करने की पुलिस को जानकारी मिली है।

तिलक गृह निर्माण संस्था के जमीन की मूल दस्तियां रजिस्ट्रार कार्यालय में जाकर देखी गई हैं। कलेक्टर कार्यालय को पुलिस ने पत्र लिखकर मूल दस्तावेज मांगे हैं।
सुधीर अरजरिया, टीआई

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Ram kailash napit Desk
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