PM मोदी के बर्थडे पर मध्यप्रदेश को मिला ये गिफ्ट!, विवादों से जुड़े रहे सरदार सरोवर बांध का हुआ उद्धाटन

Deepesh Tiwari

Publish: Sep, 17 2017 10:01:48 (IST) | Updated: Sep, 17 2017 11:24:05 (IST)

Bhopal, Madhya Pradesh, India
PM मोदी के बर्थडे पर मध्यप्रदेश को मिला ये गिफ्ट!, विवादों से जुड़े रहे सरदार सरोवर बांध का हुआ उद्धाटन

दुनिया के दूसरे सबसे बड़े बांध सरदार सरोवर से बिजली का सबसे अधिक 57 प्रतिशत हिस्सा मध्य प्रदेश को मिलेगा।

भोपाल। प्रधानमंत्रनरेंद्र मोदी (Modi 67th Birthday) आज 17 सितंबर को 67 साल के हो गए। भारतीय जनता पार्टी इस दिन को सेवा दिवस के रूप में मना रही है। इसी के तहत मध्यप्रदेश में भी सेवा दिवस के तहत स्वच्छता पर खास काम किए जाएंगे।

वहीं आज सृष्टि के पहले शिल्पी भगवान विश्वकर्मा की जयंति भी है। इन्हीं सब अवसरों के तहत प्रधानमंत्री मोदी(PM Narendra Modi) आज सरदार सरोवर बांध का उद्धाघटन किया। पीएम मोदी ने नर्मदा नदी के तट पर पूजा अर्चना करने के बाद सरदार सरोवर बांध का लोकार्पण किया। इस मौके पर उनके साथ केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, गुजरात के मुख्यमंत्री विजय भाई रूपाणी भी मौजूद रहे। जिससे मध्य प्रदेश के साथ ही गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान को फायदा मिलेगा। इसके तहत बनने वाली बिजली का 57 फीसदी मध्य प्रदेश को मिलेगा।

इसके अलावा मध्यप्रदेश(mp bjp) में भी पीएम मोदी का जन्मदिन सेवा दिवस के रूप में मनाया जाएगा। इस दिन शौचालय विहीन घरों में श्रमदान कर ट्विनपिट तकनीक अपनाते हुए शौचालय निर्माण हेतु गड्डे खोदे जाकर शौचालय निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा। प्रत्येक ग्राम में नदी-नाले में बहते पानी को रोकने के लिए नालाबंधान का एक कार्य श्रमदान कर प्रारंभ किया जाएगा।  स्वच्छता के लिए सरकार विशेष अभियान चला रही है, जो 17 सितम्बर से 2 अक्टूबर तक चलेगा। 

प्रदेश के सभी जिलों में इसके निर्देश दे दिए गए हैं। इसके साथ ही जिस गांव में शौचालय नहीं है वहां मंत्री जाकर शौचालय के गड्ढे खोदेंगे।

सरदार सरोवर बांध की यह है खासियत:
यह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बांध है, जिसका रविवार को पीएम मोदी उद्धाघटन करेंगे। इसके बाद मोदी नर्मदा के पास बन रहे सरदार पटेल की विशाल प्रतिमा के काम को देखने जाएंगे। वह विशालकाय मूर्ति अगले साल के जून तक बनकर तैयार होनी है। बाद में पीएम कुछ और कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे।

- नर्मदा नदी पर बनकर तैयार यह बांध (Sardar Sarovar Dam) दुनिया में दूसरे नंबर का और अपने देश का सबसे ऊंचा बांध है. बांध की ऊंचाई 138 मीटर है और इस ऊंचाई को पाने में सरदार सरोवर ने 56 साल के विवादों का लंबा सफर तय किया है।  बांध को बनाने में जितना कंक्रीट लगा है, उसके मुताबिक यह सबसे बड़ा बांध है। अमेरिका के ग्रैंड कौली डैम के बाद यह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बांध है।

ऐसे रुक-रुक कर आगे बढ़ता रहा काम:
वहीं दूसरी ओर इस बांध के साथ सैंकड़ों गांवों के गुम होने जाने की दर्दनाक हकीकत भी जुड़ी हुई है। ऐसे में सरदार सरोवर के साथ राजनीति के लंबे दांवपेंच भी चले और मामला कोर्ट तक भी पहुंचा। बरसों तक डूब में आने वाले गांव के लोगों ने जल सत्याग्रह किया और इन सबके साथ बांध का काम रुक-रुक कर आगे बढ़ता रहा। आखिरकार 56 साल बाद सरदार सरोवर बांध अपनी पूरी क्षमता के साथ पानी और बिजली देने के लिए तैयार है।

सरदार पटेल का था सपना :
सरदार सरोवर बांध का उद्घाटन देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों होना है, यहां सरदार पटेल की मूर्ति भी रखी गयी है। ये प्रोजेक्ट सरदार वल्लभ भाई पटेल का सपना था कि गुजरात का किसान पानी की किल्लत की वजह से अपनी पूरी फसल नही ले पाता है, उसे इस बांध से फायदा मिले।

27 फीसदी बिजली मध्य प्रदेश को :
138 मीटर ऊंचे सरदार सरोवर बांध की जल भंडारण क्षमता अब 4,25,780 करोड़ लीटर हो चुकी है। ये पानी पहले बह कर समुद्र में चला जाया करता था।
वहीं 2016-17 के दौरान बांध से 320 करोड़ यूनिट बिजली पैदा की गई। अब ज्यादा पानी जमा होने से 40 फीसदी ज्यादा बिजली पैदा की जा सकती है। सरदार सरोवर डैम से बनी बिजली का 57 फीसदी महाराष्ट्र को, 27 फीसदी मध्य प्रदेश को और 16 फीसदी गुजरात को मिलेगा।

कई राज्यों के साथ मध्यप्रदेश को भी मिलेगा फायदा :
सरदार सरोवर बांध से मध्यप्रदेश को तो फायदा मिलेगा ही साथ ही गुजरात के हजारों गांवों के साथ महाराष्ट्र के 37, 500 हेक्टेयर इलाके तक सिंचाई की सुविधा होगी। राजस्थान के दो सूखा प्रभावित जिले जालौर और बाड़मेर तक 2,46,000 हेक्टेयर जमीन की प्यास बुझेगी। गुजरात के 9,633 गांवों तक पीने का पानी पहुंचेगा।

1961 में रखी गई थी आधारशिला:
नर्मदा कंट्रोल अथॉरिटी ने 16 जून को डैम के सभी गेट बंद करने आदेश दिया और बांध में जल का भराव 121.92 मीटर से बढ़ाकर 138 मीटर कर दिया गया। इससे बांध की स्टोरेज क्षमता 1.27 मिलियन क्यूबिक मीटर से बढ़कर 4.73 मिलियन क्यूबिक मीटर हो गई।
बांध की आधारशिला 1961 में रखी गई और इसके निर्माण की शुरुआत 1987 में हुई। अधिकारियों ने बताया कि मुख्य और सब कैनाल नेटवर्क का काम पूरा हो गया है, लेकिन छोटे-छोटे कैनालों का 30 प्रतिशत काम अभी किया जाना है।

 विवादों से नाता:
इस सारे तथ्यों के बीच यह भी सच है कि सरदार सरोवर बांध से विवादों का भी नाता है और इसके पीछे वो हजारों लोग हैं, जिनके गांव का अस्तित्व सरदार सरोवर बांध में हमेशा के लिए गुम हो जाएगा। बांध के 30 गेट के खुलते ही मध्य प्रदेश के 192 गांव, महाराष्ट्र के 33 और गुजरात के 19 गांव नक्शे से मिट जाएंगे।

बांध के बारे में वो सब जो आप जानना चाहते हैं :
1. सरदार वल्लभभाई पटेल ने 1946 में इस बांध की परिकल्पना की थी. इस पर काम 1970 के दशक से ही प्रारंभ हो पाया।
2. इस बांध परियोजना और इस पर बनी विद्युत परियोजना से चार राज्यों गुजरात, महाराष्ट, राजस्थान और मध्य प्रदेश को लाभ मिलेगा।
3. 5 अप्रैल 1961 को प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने सरदार सरोवर बांध की नींव रखी थी।
4. 65 हजार करोड़ रुपये खर्च हुए।
5. 138 मीटर ऊंचाई, देश में बना सबसे ऊंचा बांध।
6. 30 दरवाजे हैं, हर दरवाजे का वजन 450 टन है।
7. 4.73 मिलियन क्यूबिक पानी जमा करने की क्षमता।
8. 6000 मेगावॉट बिजली पैदा होगी बांध से।

9. 86.20 लाख क्यूबिक मीटर कॉन्क्रीट का प्रयोग बांध बनाने में हुआ है। इतने कंक्रीट में जमीन से चंद्रमा तक सड़क बनाया जा सकता है।
10. सरदार सरोवर बांध का सबसे अधिक फायदा गुजरात को मिलेगा। यहां के 15 जिलों के 3137 गांवों के 18.45 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई की जा सकेगी।
11. बिजली का सबसे अधिक 57 प्रतिशत हिस्सा मध्य प्रदेश को मिलेगा। महाराष्ट्र को 27 प्रतिशत, जबकि गुजरात को 16 प्रतिशत बिजली मिलेगी। दूसरी ओर, राजस्थान को सिर्फ पानी मिलेगा।

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