सांची विधानसभा सीट : कभी धुरविरोधी रहे दो नेता इस बार एक साथ, जानें इस सीट का इतिहास

- एमपी में चढ़ा उपचुनाव का रंग
- क्या है सांची सीट का हाल ?
- क्या कहता है इतिहास और क्या बन रहे समीकरण ?

By: Shailendra Sharma

Published: 30 Sep 2020, 03:30 PM IST

सांची. मध्यप्रदेश में 28 सीटों पर होने वाले अब तक के सबसे बड़े उपचुनाव में एक सीट है सांची। ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ कांग्रेस का हाथ छोड़कर बीजेपी का दामन थामने वाले डॉ. प्रभुराम चौधरी के इस्तीफे के बाद यहां उपचुनाव होने हैं। उपचुनाव का खुमार विधानसभा क्षेत्र में साफ नजर आता है। वजह है कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए प्रभुराम चौधरी का मौजूदा सरकार में भी मंत्री बनाया जाना। प्रभुराम चौधरी के पार्टी बदलने से क्षेत्र में कुछ ऐसे समीकरण भी बने जो भितरघात और सामंजस्य बिगाड़ने वाले नजर आते हैं लेकिन कई मौकों पर कभी धुर विरोधी कहलाने वाले प्रभुराम चौधरी और गौरीशंकर शेजवार का एक साथ नजर आना बीजेपी के लिए राहत भरा संकेत जरुर है।

 

एक ही जाजम पर बैठे धुर विरोधी
सांची विधानसभा सीट का उपचुनाव इसलिए काफी अहम है क्योंकि यहां दशकों से जिन प्रत्याशियों के बीच चुनावी जंग होती थी वो इस बार एक ही जाजम पर आकर बैठ गए हैं। प्रभुराम चौधरी के बीजेपी में शामिल होने के बाद सालों तक चला शेजवार वर्सेज प्रभुराम चौधरी का चुनावी मुकाबला अब खत्म हो गया है। बात अगर इतिहास की करें तो पांच विधानसभा चुनावों में शेजवार वर्सेज प्रभुराम चौधरी एक दूसरे के खिलाफ चुनावी मैदान में 6 बार आमने सामने आ चुके हैं जिनमें से 2018 के विधानसभा चुनाव में प्रभुराम चौधरी और गौरीशंकर शेजवार के बेटे मुदित शेजवार के बीच हुआ चुनाव भी शामिल है।

 

कब कब हुआ शेजवार v/s प्रभुराम चौधरी चुनावी मुकाबला
प्रभुराम चौधरी और गौरीशंकर शेजवार के बीच पांच बार विधानसभा चुनाव की जंग हुई है जिनमें से तीन बार गौरीशंकर शेजवार ने तो दो बार प्रभुराम चौधरी ने जीत दर्ज की। लेकिन 1985 से दोनों के बीच शुरु हुआ चुनावी मुकाबला अब प्रभुराम चौधरी के बीजेपी में आने के बाद खत्म हो गया है। प्रभुराम चौधरी और गौरीशंकर शेजवार के
बीच हुए मुकाबला को देखिए-

-पहली बार साल 1985 में प्रभुराम चौधरी और गौरीशंकर शेजवार के बीच चुनावी मुकाबला हुआ था तब प्रभुराम चौधरी ने गौरीशंकर शेजवार को चुनाव में 3635 मतों से पराजित किया था।

- साल 1993 में हुए विधानसभा चुनाव में एक बार फिर गौरीशंकर शेजवार और प्रभुराम चौधरी के बीच मुकाबला हुआ तब गौरीशंकर शेजवार ने प्रभुराम चौधरी को 16941
वोटों से हराया था।

- साल 1998 के विधानसभा चुनाव में भी गौरीशंकर शेजवार ने प्रभुराम चौधरी को 3190 वोटों से शिकस्त दी थी।

- करीब दस साल बाद एक बरा फिर साल 2008 में विधानसभा चुनाव में प्रभुराम चौधरी ने गौरीशंकर शेजवार को 9197 वोटों से हराया।

- साल 2013 के विधानसभा चुनाव में गौरीशंकर शेजवार ने एक बार फिर प्रभुराम चौधरी को 20936 वोटों से शिकस्त दी।

- साल 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने गौरीशंकर शेजवार की जगह उनके बेटे मुदित शेजवार को सांची विधानसभा से प्रत्याशी बनाया था तब प्रभुराम चौधरी ने मुदित शेजवार को 10571 वोटों से चुनाव हराया था।

 

सांची विधानसभा का जातिगत समीकरण
विधानसभा क्षेत्र में विभिन्न जातियों के वोटों की संख्या इस तरह है (लगभग)
लोधी: 26 हजार
मीणा: 08 हजार
हरिजन: 25 हजार
मुस्लिम: 27 हजार
ब्राह्मण: 04 हजार
ठाकुर: 08 हजार
कुमी: 18 हजार
किरार: 17 हजार
साहू: 08 हजार
कुशवाहा: 08 हजार

2018 में किसे मिले कितने वोट ?
सांची विधानसभा सीट पर हुए 2018 के विधानसभा चुनाव की बात की जाए तो तब कांग्रेस प्रत्याशी डॉ. प्रभुराम चौधरी और भाजपा प्रत्याशी मुदित शेजवार के बीच मुकाबला हुआ था। साल 2018 में सांची विधानसभा सीट पर 74 फीसदी मतदान हुआ था और 2 लाख 32 हजार 474 मतदाताओं ने मताधिकार का प्रयोग किया था। तब प्रभुराम चौधरी को 88 हजार 832 वोट मिले थे और मुदित शेजवार को 78 हजार 261 वोट मिले थे और प्रभुराम चौधरी ने 10571 वोटों से जीत दर्ज की थी।

इस बार इनके बीच मुकाबला ?
उपचुनाव में कांग्रेस की तरफ से मदनलाल चौधरी को चुनावी मैदान में उतारा गया है तो वहीं बीजेपी की तरफ से डॉक्टर प्रभुराम चौधरी ही संभावित उम्मीदवार हैं और इस बार मुकाबला चौधरी बनाम चौधरी होता दिख रहा है।

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