कोरोना: गर्भवती महिलाओं को ये टेस्ट करवाना जरुरी, ये लक्षण दिखने पर कराएं एडमिट

- गर्भवती महिलाओं के लिए न्यूक्लियर टेस्ट जरुरी

- इस स्थिति में कराएं ICU में एडमिट

- कोरोना के असिम्प्टोमटिक लक्षण के लिए क्या करें

By: Tanvi

Updated: 23 Apr 2020, 03:38 PM IST

भोपाल/ कोरोना वायरस का संक्रमण हर जगह अपने पैर पसार रहा है। लगातार बढ़ते संक्रमण को देखते हुए लॉकडाउन की अवधी भी बढ़ा दी गई है। लेकिन अब भी लोगों को संक्रमण का डर बना हुआ है। खासकर बुजुर्ग, बच्चे और गर्भवती महिलाएं को, इसलिए भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद ( ICMR ) ने गर्भवती महिलाओं और गर्भस्थ शिशुओं को लेकर कोरोना के इन्फेक्शन से बचाव के लिए कुछ गाइडलाइन जारी की है। आइए जानते हैं क्या करें गर्भवती महिलाएं और कैसे बचें इन्फेक्शन से...

 

ICMR की सलाह के अनुसार, अगर किसी गर्भवती महिला को सर्दी, जुखाम, बुखार या फिर सांस लेने में तकलीफ है तो इसे तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। इसे बिलकुल भी नजरअंदाज ना करें और अगर आप किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आई हैं तो तुरंस अपने डॉक्टर से सलाह लें।

गर्भवती महिलाओं के लिए न्यूक्लियर टेस्ट जरुरी:

आईसीएमआर के अनुसार, गर्भवती महिलाओं की कोरोना जांच के साथ नाक और खाने की नली के लिए सैंपल का आरटी-पीसीआर टेस्ट किया जाता है। इस टेस्ट को एक तरह की न्यूक्लियर जांच कहा जाता है, इस जांच का इस्तेमाल व्यक्ति के शरीर में वायरस के अनुवांशिक तत्व के होने का पता लगाने के लिए किया जाता है।

 

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इस स्थिति में कराएं ICU में एडमिट:

- अगर प्रेग्नेंट महिलाओं का सिस्टॉलिक ब्लड प्रेशर100 एमएमएचजी से कम हो तो.
- अगर प्रेग्नेंट महिलाओं की ब्रीदिंग रेट टेस्ट में 22 श्वास प्रति मिनट से ज्यादा मिले.
- अगर प्रेग्नेंट महिलाओं में ग्लासगो कॉन्शियस स्केल (कोमा का पैमाना) 15 से नीचे चली जाए.

कोरोना के असिम्प्टोमटिक लक्षण के लिए क्या करेंः

आईसीएमआर की गाइडलाइन के मुताबिक, अगर किसी प्रेग्नेंट महिला को कोरोना वायरस का इंफेक्शन होता है तो उसे तुरंत डॉक्टर से संपर्क कर हॉस्पिटल में ए़डमिट करवा देना चाहिये। इसके बाद उसका दिन में तीन से चार बार बॉडी का तापमान, ब्लड प्रेशर, हार्ट बीट और ब्रीदिंग रेट की जांच होनी चाहिए। इसके अलावा प्रेग्नेंट लेडी के गर्भस्थ शिशु ( भ्रूण) का दिन में एक बार हार्ट रेट, नसों के जरिये एंटीबायोटिक ट्रीटमेंट दें, 34-37 हफ्ते की प्रेग्नेंसी हो तो बीटामीथाजोम इंजेक्शन से भ्रूण को मैच्योर किया जाना चाहिये। क्योंकि असिम्प्टोमटिक लक्षण होने के कारण
व्यक्ति में कोरोना पॉजिटिव होने के बाद भी कोई लक्षण नहीं दिखाई देते हैं

कोरोना के लक्षण वाली महिलाएं रखें इन बातों का ध्यान:

- जांच रिपोर्ट न आने तक ऐसी गर्भवती महिलाओं को अस्पताल के आइसोलेशन वॉर्ड में रखना जरूरी

- अगर सर्दी, बुखार जैसे लक्षण बढ़ें या बने रहें तो दोबारा जांच कराएं

-अगर जांच में पॉजिटिव नहीं पाई जाती हैं तो घर में कम से कम 14 दिन खुद को अलग रखें, समय-समय पर बुखार नापती रहें, अन्य लक्षणों पर भी ध्यान दें

- प्रसव के साथ ही नवजात की देखभाल के लिए आवश्यक उपकरण उपलब्ध होने चाहिए

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