बंद पड़ा है नए स्कूल खुलने का रास्ता, बच्चों का भविष्य भी अधर में, जानिए क्या है वजह

मान्यता के लिए अब तक नहीं खुला है अक्टूबर में खुलने वाला एजुकेशन पोर्टल

भोपाल. निजी स्कूलों को मान्यता देने की प्रक्रिया इस वर्ष लेटलतीफी का शिकार हो गई है। मान्यता देने के लिए जो एजुकेशन पोर्टल अक्टूबर अंत तक खुल जाता था, वह इस वर्ष फरवरी का एक पखवाड़ा बीतने के बाद भी नहीं खुल सका है। इससे प्रदेश में नए स्कूल खुलने का रास्ता लगभग बंद हो गया है, वहीं नवीनीकरण के दौरान जिन स्कूलों की मान्यता अटकेगी उनमें प्रवेश ले चुके लाखों विद्यार्थियों का भविष्य भी अधर में फंस जाएगा।

शैक्षणिक सत्र 2018-19 लोक शिक्षण संचालनालय ने अप्रैल के बाद अचानक पहले से संचालित दो हजार से अधिक स्कूलों को नियमों पर खरा न बताकर मान्यता रोक दी थी। इसके साथ इन स्कूलों में प्रवेश ले चुके हजारों विद्यार्थियों का भविष्य असुरक्षित हो गया था। लगभग चार महीने खींचतान के बाद आखिरकार सभी स्कूलों को मान्यता देनी पड़ी थी। इसके बाद सबक लेते हुए विभाग ने 2019-20 में पोर्टल दिसंबर की शुरुआत में ही खोल दिया जिससे स्कूलों की मान्यता तय समय पर हो गई। शैक्षणिक सत्र 2020-21 की मान्यता के लिए अभी तक पोर्टल नहीं खुला है। इसके चलते नए स्कूलों की नौवीं-ग्यारवीं की मान्यता और पुराने की मान्यता नवीनीकरण के नियम भी स्पष्ट नहीं हो पाए हैं। गौरतलब है कि आरटीई एक्ट लागू होने के बाद से लगभग हर वर्ष स्कूलों की मान्यता प्रक्रिया में देरी हुई है। यदि अक्टूबर-नवंबर में पोर्टल खुल जाए तो प्रक्रिया समय पर पूरी हो सकती है। लेकिन इस वर्ष ऐसा होता दिख नहीं रहा है।

स्कूलों की मान्यता समय से और तय मापदंडों के अनुसार होनी चाहिए, देरी से स्कूल संचालकों के साथ उन स्कूलों में प्रवेश ले चुके लाखों विद्यार्थी भी प्रभावित होते हैं, इसलिए प्रक्रिया तय समय में पूरी किया जाना जरूरी है।
अजीत सिंह, प्रदेशाध्यक्ष, निजी स्कूल एसोसिएशन

praveen malviya Reporting
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