नहीं होगी ऑनलाइन पढ़ाई, बंद रहेंगे प्राइवेट स्कूल, यह है मामला

स्कूल फीस विवाद के बाद अब स्कूल संचालकों ने भी खोला मोर्चा, बंद कर सकते हैं ऑनलाइन क्लासेस...।

By: Manish Gite

Published: 14 Dec 2020, 02:05 PM IST

भोपाल। मध्यप्रदेश में अब निजी स्कूल और कॉलेज संचालकों ने विरोध का रास्ता अपना लिया है। इनके एसोसिएशन ने सरकार के समक्ष कुछ मांगे रखी है। इस संबंध में सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए मंगलवार को सभी स्कूल-कॉलेज बंद करने का निर्णय लिया गया है। यदि तब भी मांगे नहीं मानी जाती है तो 16 दिसंबर को बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा।

 

मध्य्रदेश के निजी शैक्षणिक संस्थान, स्कूल और कालेज अब एकजुट होने लगे हैं। उन्होंने सरकार के खिलाफ हड़ताल और प्रदर्शन का रास्ता अपनाया है। प्रदेश के गैर अनुदान प्राप्त निजी स्कूल मंगलवार को हड़ताल पर रहेंगे। वहीं एसोसिएशन ऑफ अन-एडिड प्राइवेट स्कूल्ज के उपाध्यक्ष विनी राज मोदी के मुताबिक पहले 14 दिसंबर को ही मुख्यमंत्री आवास घेराव की योजना थी, लेकिन बाद में शासन को कुछ और समय देने का निर्णय लिया गया। इसलिए अब पहले मंगलवार को सभी निजी स्कूल और कॉलेज बंद रखने का फैसला किया गया है। इसेक बाद भी हमारी मांगे नहीं मानी गई तो शांतिपूर्ण ढंग से 16 को प्रदर्शन किया जाएगा।

 

एक नजर

इसके अलावा प्राइवेट स्कूल डायरेक्टर्स के पदाधिकारियों ने 14 एवं 15 को घोषित विरोध-प्रदर्शन में परिवर्तन किया है। नए कार्यक्रम के मुताबिक यदि 14 दिसंबर तक सरकार आदेश जारी नहीं करती है, तो 15 दिसंबर को पूरे प्रदेश के स्कूल कॉलेजों में ऑनलाइन क्लासेस संचालित नहीं की जाएंगी। इसके बाद 16 दिसंबर को पूरे प्रदेश के शिक्षक, संचालक, पालक एवं छात्र भोपाल के यादगार-ए- शाहजहानी पार्क में सुबह 11 बजे शांतिपूर्ण प्रदर्शन करेंगे और सीएम के नाम ज्ञापन सौंपेंगे।

 

स्कूल संचालकों की यह है मांग

  • केंद्र सरकार की ओर से जारी दिशा-निर्देशों के मुताबिक कक्षा 9वी से 12वीं के स्कूल तुरंत खोले जाना चाहिए।
  • 31 मार्च 2021 तक कक्षा पहली से आठवीं के स्कूल बंद रखे जाने का फैसला वापस लिया जाए।
  • संचालकों का कहना है कि पहली से 8वीं तक कक्षाएं बंद होने के कारण शारीरिक दूरी का पालन करते हुए कक्षाओं में बिठाया जा सकता है।
  • नियमित स्कूल के साथ-साथ ऑनलाइन कक्षाओं का संचालन कर पाना मुश्किल है।
  • पालकों से लिखित सहमति की जरूरत को भी शिथल किया जाना चाहिए।
  • सभी कक्षाओं में ऑफलाइन एवं ऑनलाइन असाइनमेंट एवं असेसमेंट के आधार पर ही प्रमोशन होना चाहिए। केवल प्रोजेक्ट वर्क पर आधारित जनरल प्रमोशन किसी भी सूरत में न हो।
  • आरटीआई के अंतर्गत प्रवेशित विद्यार्थों के शिक्षण सत्र 2020-21 तक की बकाया राशि की प्रतिपूर्ति जल्द हो।
  • यदि पढ़ाई के लिए शिक्षण शुल्क ले रहे हैं, तो परीक्षा के लिए भी परीक्षा शुल्क भी लेने की अनुमति देना चाहिए।
  • नियमित स्कूल खुलने पर वार्षिक शुल्क, विकास शुल्क, ट्रांसपोर्ट फीस आदि लेने की अनुमति दी गई है, जिसे आदेश में समाहित किया जाना चाहिए।
  • शिक्षण शुल्क नहीं देने वाले पालकों के बच्चों को अगली कक्षा में प्रमोट न किया जाए।
Manish Gite
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