निजी यूनिवर्सिटी-कॉलेजों ने सीधे दे दिए आयुष की सीटों पर दाखिले

आयुष विभाग की काउंसलिंग के बाद प्रवेश में हुई गड़बड़ी...

By: Krishna singh

Published: 25 Apr 2018, 07:48 AM IST

भोपाल@जितेंद्र चौरसियाकी रिपोर्ट...

प्रदेश में व्यापमं जैसा बड़ा घोटाला उजागर हुआ है। आयुर्वेद, होम्योपैथी और यूनानी की सीटों पर मनमर्जी से प्रवेश दे दिए गए। यह गड़बड़झाला निजी यूनिवर्सिटी और कॉलेज स्तर पर काउंसलिंग से हुआ। जबकि, इनको काउंसलिंग के जरिए प्रवेश देने का अधिकार नहीं है। ये सीटें आयुष विभाग की काउंसलिंग के जरिए भरना थी।

 

सरकार ने गलत ठहराया
सरकार ने जांच के बाद 2016-17 के प्रवेश को गलत ठहरा दिया है। यह गड़बड़ी 2007-08 से 2016-17 तक होती रही। इसमें करोड़ों रुपए का लेन-देन होने की आशंका है, इसलिए पूरे श्रंखलाबद्ध प्रवेशों पर जांच बैठने की स्थिति बन गई है। मध्यप्रदेश फीस नियामक आयोग से गहन जांच कराने के लिए लिख दिया गया है।

 

ऐसे समझिए खेल
सर्वपल्ली राधाकृष्णन विश्वविद्यालय और आरकेडीएफ व सम्बद्ध कॉलेजों के तहत 2016-17 में आयुष की १०० सीटों पर प्रवेश दिया गया। इनमें आयुष विभाग ने 41 सीटों पर प्रवेश दिया। इस काउंसलिंग के बाद खाली 59 सीटों पर निजी विवि व कॉलेज ने अपने स्तर पर प्रवेश दे दिए।

 

जब विभाग को प्रवेशित छात्रों की सूची भेजी तो सभी १०० सीटें भरी बता दी गईं। विभाग ने पड़ताल की तो मामला उजागर हुआ। जांच में सामने आया कि 59 सीटें नियम के विपरीत भरी गईं।

 

निजी विवि व कॉलेजों को नोटिस दिए गए तो उन्होंने फीस नियामक आयोग के नियमों का हवाला दे दिया। इसकी जांच में सामने आया कि इन नियमों की गलत व्याख्या की गई थी। इस पर आयुष विभाग ने मार्च 2018 में इन प्रवेशों को गलत ठहराकर प्रकरण को गंभीर मानते हुए सूक्ष्म व गहन जांच की जरूरत बताई है।

 

 

2007-08 से सीटों की खरीद-फरोख्त
प्रदेश में करीब चार निजी आयुष विवि और डेढ़ दर्जन कॉलेज हैं। निजी विवि 2012 से अस्तित्व में आए। इनकी प्रवेश देने का खेल सालों से चल रहा है।

निजी विवि और कॉलेज विभागीय काउंसलिंग के बाद खाली सीटों पर अपने हिसाब प्रवेश देते और एकजाई सूची आयुष विभाग को भेजते रहे हैं। पहले कभी यह सत्यापन ही नहीं हुआ कि यह प्रवेश सही है या नहीं। अब जब दो निजी विवि की शिकायत हुई तो प्रदेशभर में पड़ताल की जा रही है।

यहां सामने आई है गड़बड़ी
आरकेडीएफ आयुष, सर्वपल्ली राधाकृष्णन विवि के सम्बद्ध कॉलेज, रामकृष्ण कॉलेज ऑफ होम्योपैथी एंड मेडिकल साइंसेज भोपाल व डिस्ट्रिक्ट होम्योपैथी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल रतलाम और डॉ. पंडित शिवशक्ति लाल शर्मा आयुर्वेद महाविद्यालय एवं अस्पताल में गड़बड़ी सामने आ चुकी है।

मप्र निजी शिक्षण संस्था अधिनियम और प्रवेश तथा फीस नियामक समिति के नियमों के तहत ये काउंसलिंग नहीं करा सकते।

 

इसलिए की साठगांठ
आयुष विभाग की काउंसलिंग में प्रवेश नहीं मिलने पर छात्र निजी विवि व कॉलेज से साठगांठ करते थे। यहां उत्तरप्रदेश के विद्यार्थी भी बड़ी संख्या में आते हैं।

दूसरी बड़ी वजह पिछले कुछ सालों से आयुष डॉक्टरों को दो डिप्लोमा कोर्स कराकर एलोपैथी दवाइयां लिखने का अधिकार देना है, इसलिए आयुष के जरिए एलोपैथी का रास्ता पकडऩे भी फर्जीवाड़ा हुआ है।

 

निजी विवि व कॉलेज अपने स्तर पर प्रवेश नहीं करा सकते। जो गलत प्रवेश हुए हैं, उनहें रद्द किया जाएगा। इन प्रकरणों को देखा जा रहा है।
- शिखा दुबे, प्रमुख सचिव, आयुष विभाग

आयुष के प्रवेश में शासन के नियम बाध्यकारी हैं। शासन सेंट्रलाइज काउंसलिंग करता है तो उसका पालन जरूरी है। हम शासन के निर्देशों व नियमों का पालन कराते हैं।
- अखिलेश पांडेय, अध्यक्ष, राज्य विश्वविद्यालय नियामक आयोग

Krishna singh
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned