प्रेमचंद गुड्डू की कांग्रेस वापसी का विरोध तेज

कांग्रेस के तीन विधायकों ने कमलनाथ को लिखा पत्र, गुड्डू को लिया तो जनता को क्या मुंह दिखाएंगे

 

 

By: Arun Tiwari

Published: 24 May 2020, 06:57 PM IST

भोपाल : कांग्रेस छोड़कर भाजपा में गए नेताओं की घर वापसी को लेकर पार्टी में घमासान तेज हो गया है। पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा के बाद कांग्रेस के तीन मौजूदा विधायकों ने प्रेमचंद गुड्डू की वापसी को लेकर मोर्चा खोल दिया है। इन विधायकों ने पूर्व मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ को पत्र लिखकर गुड्डू की वापसी पर कड़ी आपत्ति जताई है। पत्र लिखने वाले इन विधायकों में घट्टिया विधायक रामलाल मालवीय, तराना विधायक महेश परमार और आलोट विधायक मनोज चावला शामिल हैं। मालवा के इन विधायकों ने कमलनाथ से गुहार लगाई है कि यदि प्रेमचंद गुड्डू जैसे नेताओं को वापस कांग्रेस में शामिल कर लिया तो फिर जनता को क्या मुंह दिखाएंगे।

इनसे पहले हाल ही में पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने कमलनाथ के साथ बैठक में गुड्डू की वापसी का विरोध किया था। हालांकि कांग्रेस में अभी गुड्डू की वापसी नहीं हुई है लेकिन वापसी की चर्चाएं तेज हैं और उनके सांवेर से चुनाव लडऩे की खबरें भी राजनीतिक गलियारों में तेजी से चल रही हैं।

गुड्डू और 22 नेताओं में क्या अंतर :
घट्टिया विधायक रामलाल मालवीय ने 2018 के विधानसभा चुनाव में गुड्डू के पुत्र अजीत बोरासी को 12 हजार से ज्यादा मतों से हराया था। बोरासी को भाजपा ने टिकट दिया था। मालवीय ने अपने पत्र में लिखा है कि प्रेमचंद गुड्डू जैसे दलबदलू नेता और कमलनाथ सरकार गिराकर भाजपा में शामिल हुए 22 विधायकों में क्या अंतर रहा है। मालवीय ने कहा कि जनता हमसे सवाल पूछेगी तो हम क्या जवाब देंगे। ऐसे नेता यदि वापस कांग्रेस में आएंगे तो हम जनता के बीच मुंह दिखाने लायक नहीं रहेंगे। मालवीय ने कहा कि यदि गुड्डू को सांवेर ये कांग्रेस ने चुनाव लड़ाया तो वे चुनाव प्रचार करने भी नहीं जाएंगे। तराना विधायक महेश परमार ने कहा कि जिन 22 विधायकों ने सरकार गिराई क्या कल वे वापस आएंगे तो क्या उनको भी कांग्रेस में शामिल कर लिया जाएगा। परमार ने कहा कि उन्होंने कमलनाथ को अपनी आपत्ति बता दी है और आगे भी इस बात का विरोध जताएंगे। आलोट विधायक मनोज चावला ने भी अपने पत्र में कहा कि सरकार गिरने से जनता में भाजपा के प्रति आक्रोश है लेकिन गुड्डू को कांग्रेस में शामिल कर लिया तो जनता यही समझेगी की कांग्रेस और भाजपा में आखिर क्या अंतर रहा इसलिए गुड्डू को कांग्रेस में शामिल न किया जाए।

ग्वालियर-चंबल में ठाकुर-ब्राह्मण फैक्टर :
ग्वालियर-चंबल में ठाकुर-ब्राह्मण राजनीति शुरु हो गई है। ग्वालियर चंबल में ये फैक्टर सबसे प्रभावी माना गया है। लोकतंत्र में भले जातिवादी राजनीति की मुखालफत की जाती रही हो लेकिन राजनीति इससे अछूती नहीं है। चौधरी राकेश सिंह चतुर्वेदी के मेहगांव से चुनाव लडऩे की चर्चा के पीछे भी यही फैक्टर माना जा रहा है। कांग्रेस के ठाकुर नेता राकेश सिंह के विरोध में उतर आए हैं। कमलनाथ के सामने अजय सिंह, डॉ गोविंद सिंह, केपी सिंह, अशोक सिंह, लाखन सिंह और भिंड जिला अध्यक्ष जय श्रीराम बघेल ने राकेश सिंह को टिकट देने का विरोध किया है। मेहगांव में ठाकुर और ब्राह्मण के वोट निर्णायक हैं। यहां पिछले चुनाव में ओपीएस भदौरिया ने जीत हासिल की थी। इससे पहले मुकेश सिंह चतुर्वेदी विधायक थे। चतुर्वेदी के पहले राकेश शुक्ला मेहगांव से विधायक रहे हैं।

Arun Tiwari
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