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अजब मामला : लोक सूचना अधिकारी न RTI में जानकारी देने को तैयार, न आदेश मानने को राजी

राज्य सूचना आयोग में ऐसा ही मामला सामने आया है। लोक सूचना अधिकारी न तो RTI के तहत जानकारी देने को तैयार है और न ही आयोग की सुनवाई में आ रहीं हैं।

भोपाल

Updated: February 17, 2022 12:21:51 am

भोपाल। सूचना पाने के लिए आमजन के पास आरटीआई बहुत बड़ा हथियार है, लेकिन जब अफसर ही बेखौफ हो जाएं तो फिर क्या कहा जा सकता है। राज्य सूचना आयोग में ऐसा ही मामला सामने आया है। लोक सूचना अधिकारी न तो आरटीआई के तहत जानकारी देने को तैयार है और न ही आयोग की सुनवाई में आ रहीं हैं। यहां तक आयोग ने उन्हें गिरफ्तारी वारंट की चेतावनी भी दी लेकिन वह चेतावनी भी बेअसर रही है। अब आयोग ने राज्य सरकार को पत्र लिखकर अधिकारी के खिलाफ कार्यवाही करने की अनुशंसा भी की है। साथ ही लोक सूचना अधिकारी को सुनवाई का एक और मौका दिया है।
अजब मामला : लोक सूचना अधिकारी न RTI  में जानकारी देने को तैयार
अजब मामला : लोक सूचना अधिकारी न RTI में जानकारी देने को तैयार
मामला रीवा जिले की रायपुर कर्चुलियान जनपद का है। जनपद पंचायत में हुए विकास कार्य और यहां हुई खर्च से जुड़ी राशि का लेखा जोखा आरटीआई के तहत आवेदक ने मांगा था। यहां से जानकारी न मिलने पर मामला राज्य सूचना आयोग में आया। राज्य सूचना आयुक्त राहुल ङ्क्षसह ने जनपद की खण्ड पंचायत अधिकारी तथा लोक सूचना अधिकारी सुरभि दुबे से जवाब मांगा। लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। यहां तक आयोग ने उन्हें सुनवाई में उपस्थित होने के लिए समन भी भेजे, उन्होंने समन तो रिसीव किए लेकिन वे सुनवाई में उपस्थित नहीं हुईं।
सुनवाई के लिए कई बार तिथि दी गई। आयोग के आदेश के लगातार अवहेलना करने पर सूचना आयोग ने उन्हें चेतावनी दी कि यदि वे उपस्थित नहीं होती तो आयोग सिविल प्रक्रिया संहिता के तहत गिरफ्तारी वारंट (जमानती) जारी कर उपस्थित सुनश्चित कराएगा, लेकिन इसका भी असर नहीं हुआ। हालांकि उन्होंने टेलीफोन पर सुनवाई की अनुमति मांगी। सूचना आयुक्त ने यह अनुमति दी लेकिन वे इस सुनवाई में शामिल नहीं हुईं। यहां तक आयोग कार्यालय से जब उनसे संपर्क किया गया तो उन्होंने आयोग पर ही टिप्पणी करते हुए बेतुके जवाब दिए। इससे आयोग और सख्त हुआ है।
लोक सूचना अधिकारी बदलने का आदेश
सूचना आयुक्त ने पंचायत विभाग को पत्र लिखकर लोक सूचना अधिकारी की कार्यप्रणाली से अवगत कराया है। साथ ही कहा है कि वे लगातार आरटीआई का उल्लंघन कर रही हैं। उनके स्थान पर अन्य लोक सूचना अधिकारी पदस्थ किया जाए। प्रदेश के इतिहास में शायद यह पहला मामला होगा जब आयोग ने किसी लोक सूचना अधिकारी को हटाकर अन्य अधिकारी पदस्थ करने के लिए राज्य सरकार से कहा हो। अब मामले की अगली सुनवाई के लिए 28 फरवरी की तिथि आयोग ने तय की है। यह सुनवाई आयोग के कोर्ट रूम में होगी।
आयोग जारी कर सकता है जमानती गिरफ्तारी वारंट 
आयोग को यह अधिकार है कि यदि बार-बार मौका दिए जाने के बाद भी लोक सूचना अधिकारी सुनवाई में उपस्थित नहीं होते संबंधित के खिलाफ जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी करने का अधिकार आयोग के पास है। इसका पालन करने के लिए संबंधित जिले के एसपी को आदेश दिया जाता है। एसपी को इसका पालन करना होता है।

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