बच्चों को गलतियों से सीखने और निर्णय लेने के लिए मोटिवेट करेगी 'पर्पल टर्टल'

ऑनलाइन एजुकेशन: शहर की अंकिता, स्वाति और मनीष का इनिशिएटिव

By: hitesh sharma

Updated: 12 Oct 2020, 12:57 AM IST

भोपाल। कोरोना काल में स्कूल नहीं खुलने से छोटे बच्चों की क्लासेस ऑनलाइन चल रही हैं। टीचर्स उन्हें एजुकेशन वीडियो बनाकर एजुकेट करने के नए-नए तरीके खोज रहे हैं। इस कड़ी में बच्चों को ऑनलाइन एजुकेशन में मदद करने के लिए शहर की तीन युवाओं ने पर्पल-टर्टल सीरीज तैयार की है। इसे अंकिता श्रीवास्तव और मनीष राजौरिया ने प्रोड्यूस किया है जबकि इसकी डायरेक्टर स्वाति राजौरिया हैं। ये सीरीज बच्चों को छोटा भीम की तरह सही निर्णय लेने की टिप्स देंगी। अंकिता ने मां को बचाने के लिए 2014 में अपना 74 प्रतिशत लीवर डोनेट किया था लेकिन वो अपनी मां को बचा नहीं सकी थीं। इसके बाद उन्होंने अपनी फिटनेस बनाई और पिछले साल यूनाइटेड किंगडम में आयोजित विश्व प्रत्यारोपण खेलों में भारत का प्रतिधित्व कर एक स्वर्ण सहित तीन पदक जीते थे।

ऑनलाइन एजुकेशन के लिए लिखी किताब
अंकिता ने बताया कि मैं पर्पल-टर्टल नाम से पुस्तक भी प्रकाशित कराती हूं। इसे चीन, अमेरिका, ब्रिटेन, दक्षिण अफ्रीका, लातविया, रूस, यूक्रेन, कजाकिस्तान, इंडोनेशिया और श्रीलंका सहित 25 देशों में पसंद किया जाता है। इससे बच्चों को पढ़ाने में मदद मिलती है। ये ऑनलाइन एजुकेशन के क्षेत्र लोकप्रिय है। प्रोड्यूसर अंकिता ने बताया कि इसमें सात मिनट के 52 एपिसोड हैं। इस शो को दिन में डिस्कवरी किड्स मेना में दिखाया जा रहा है। एमी अवॉर्ड विनिंग ऑथर्स कार्ल गेयर्स, डेव रॉस, कार्टर क्रॉकर, पॉल पाक्र्स और फिल हार्नेज ने मिलकर इस सीरीज को लिखा है। अंकिता ने बताया कि प्री स्कूल के बच्चों को कार्टून बहुत पसंद होता है उन्हें देखकर ही वे अच्छी-अच्छी बातें सीखते हैं। हमने भी छोटा भीम कार्टून करैक्टर की तरह पर्पल टर्टल सीरीज को बनाया है। ये सीरीज प्राइमरी स्कूल के बच्चों को खोज करने, विकल्प ढूंढने, गलतियों से सीखने और निर्णय लेने के लिए प्रोत्साहित करती है।

इन्होंने बनाया है सीरीज को
स्वाति ने बताया कि यह 52 गुणा 7, टूडी-एचडी प्री-स्कूल एनिमेशन सीरीज है। पर्पल टर्टल के एडुटेंमेंट ऐप को लॉन्च करने की तैयारी चल रही है। इस सीरीज के जरिए टीचर्स बच्चों को विभिन्न कहानियों के माध्यम से मोटिवेट कर सकते हैं। चूंकि कार्टून कैरेक्टर हैं तो बच्चों को भी बोरियत महसूस नहीं होती। वे हर कहानी से कुछ नया सीखते हैं।

hitesh sharma Reporting
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