एक किस्सा ऐसा भी: जब राष्ट्रपति रो रहे थे और प्रधानमंत्री सो रहे थे!

एक किस्सा ऐसा भी: जब राष्ट्रपति रो रहे थे और प्रधानमंत्री सो रहे थे!
pv narasimha rao

mp.patrika.com तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हाराव की जयंती के मौके पर बताने जा रहा है वह किस्सा जो भोपाल में जन्मे तत्कालीन राष्ट्रपति डा. शंकर दयाल शर्मा के साथ आज भी याद किया जाता है....।

mp.patrika.com तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हाराव की जयंती के मौके पर बताने जा रहा है वह किस्सा जो भोपाल में जन्मे तत्कालीन राष्ट्रपति डा. शंकर दयाल शर्मा के साथ आज भी याद किया जाता है....। हालांकि अब दोनों ही दिग्गज अब इस दुनिया में नहीं हैं।

भोपाल। देश में कभी-कभी ऐसा वक्त भी आता है, जब इतने बड़े ओहदे पर बैठे राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री भी असहाय हो जाते हैं। ऐसा ही वक्त 6 दिसंबर 1992 को आया था जब अयोध्या में बाबरी ढांचा ढहाया जा रहा था। उसी वक्त दिल्ली में देश के राष्ट्रपति डॉ. शंकर दयाल शर्मा फूट-फूटकर रो रहे थे और प्रधानमंत्री नरसिंहराव अपने बंगले में सो रहे थे। डा. शर्मा बाबरी ढांचे का विध्वंस रोकने के लिए हस्तक्षेप करना चाहते थे, लेकिन उनकी मंशा पूरी नहीं हो सकी।


देश के चार प्रधानमंत्रियों के साथ काम करने वाले भारत के नौवे राष्ट्रपति डॉ. शंकर दयाल शर्मा और तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिंहाराव के बीच यह किस्सा लोग आज भी याद करते हैं। mp.patrika.com तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हाराव की जयंती के मौके पर बताने जा रहा है कुछ किस्से, जो इतिहास के पन्नों में आज भी पढ़ें जाते हैं। डा. शर्मा और नरसिंहराव के कार्यकाल में कई घटनाक्रम हुए, जिनमें से बाबरी ढांचे का विध्वंस उनमें से एतिहासिक था।


क्या हुआ था उस वक्त
भोपाल में जन्मे डा. शंकर दयाल शर्मा राष्ट्रपति पद पर रहते हुए इतने असहाय थे कि वे प्रधानमंत्री नरसिंहराव से भी नहीं मिल पाए। डॉ शर्मा 1992-97 तक देश के राष्ट्रपति रहे।


एक पुस्तक ने किए राज उजागर
कुछ सालों पहले मार्केट में आई एक पुस्तक में इस बात का उल्लेख किया गया है कि जब बाबरी ढांचा ढहाने के लिए कार सेवकों ने चढ़ाई कर दी थी, उस समय मदद के लिए समाजसेवियों और मुस्लिम नेताओं ने प्रधानमंत्री कार्यालय में फोन किया तो वहां से कोई राहत नहीं मिल पाई थी। तत्काल यह लोग राहत के लिए राष्ट्रपति डा. शर्मा के पास पहुंच गए, लेकिन उनसे मिलने वाले लोग यह देखकर हैरान थे कि उनके सामने देश का राष्ट्रपति फूट-फूटकर रो रहा है। वे सभी लोग बाबरी ढांचे के मामले में राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की मांग करने आए थे। इस पर डा. शर्मा ने उन्हें एक पत्र दिखाया, जो उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव को लिखा था।


डा. शर्मा ने पत्र में नरसिम्हा राव से कहा था कि उत्तरप्रदेश की सरकार को बर्खास्त कर सुरक्षा व्यवस्था को केंद्र सरकार अपने हाथों में ले। फिर शर्मा ने आसपास मौजूद लोगों से कहा कि मैं भी प्रधानमंत्री राव तक नहीं पहुंच पाया हूं।


नरसिंह राव कर रहे थे आराम
कहा जाता है कि डा. शर्मा ने प्रधानमंत्री बनने से इनकार किया था, तभी नरसिम्हा राव को यह पद मिल गया था। उस समय डा. शर्मा अस्वस्थ्य रहते थे। हालांकि 2013 में समाजवादी पार्टी नेता मुलायम सिंह के एक बयान ने सभी को चौंका दिया था कि राष्ट्रपति को बाबरी ढांचा गिराए जाने की जानकारी पहले ही मिल गई थी। इस बयान पर काफी विवाद भी हुआ था।


पहले दक्षिण भारतीय प्रधानमंत्री थे नरसिंहराव
पीवी. नरसिंह राव का जन्म 28 जून 1921 को करीमनगर आंध्रप्रदेश में एक सामान्य परिवार में हुआ था। उनके पिता पी. रंगा राव और माता रुक्मिनिअम्मा कृषक थे। राव की मातृभाषा तेलुगु थी पर मराठी भाषा पर भी उनकी जोरदार पकड़ थी। आठ भारतीय भाषाओँ (तेलुगु, तमिल, मराठी, हिंदी, संस्कृत, उड़िया, बंगाली और गुजराती) के अलावा वे अंग्रेजी, फ्रांसीसी, अरबी, स्पेनिश, जर्मन और पर्शियन बोलने में पारंगत थे। नरसिंह राव के तीन बेटे और पांच बेटियां हैं।

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