रेल कोच फैक्ट्री में तैयार हो रही हैं PPE ड्रेस किट, 200 किट बनकर तैयार, मई तक बनेंगी 4000 किट

बाजार से काफी कम कीमत पर तैयार हो रही हैं यह किट। अब तक भोपाल मंडल के रेलवे हॉस्पिटल को सौंपी गईं 150 किट

भोपाल। कोरोना संक्रमण के बीच निशातपुरा स्थित रेल कोच फैक्ट्री (सवारी डिब्बा पुनर्निर्माण कारखाना) के रेलकमिर्यों ने रेलवे अस्पतालो में कार्यरत डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ को कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाने के लिए पीपीई (पर्सनल प्रोटेक्शन इक्विपमेंट) ड्रेस तैयार किए जा रहे हैं। यह ड्रेस रक्षा अनुसंधान एवं विकास द्वारा अनुमोदित व आईएसओ मानक—16603 के तहत पॉली प्रोपलीन फाइबर के कपड़े से तैयार की जा रही हैं। कोरोना वायरस से संक्रमितों का इलाज़ कर रहे चिकित्सकों के लिए पीपीई ड्रेस की इस समय भारी कमी है, ऐसे में कोच फैक्ट्री में निर्मित यह ड्रेस काफी मददगार साबित होंगी। 

रेल कोच फैक्ट्री में मई तक बनाई जाएंगी 4000 पीपीई किट

रेल कोच फैक्ट्री के उप मुख्य यांत्रिक इंजीनियर कुमार आशीष ने बताया कि यहां 15 अप्रेल से निर्माण कार्य शुरू हुआ है। अब तक 200 पीपीई ड्रेस किट का निर्माण हो चुका है और इनका ट्रायल भी मण्डल रेल चिकित्सालय भोपाल में हो चुका है। 150 पीपीई किट मंडल रेल चिकित्सालय भोपाल को सौंपी गई है। कुमार आशीष ने बताया कि आगामी एक सप्ताह के अन्दर 800 पीपीई ड्रेस का निर्माण कर रेल अस्पताल को दिये जाने का लक्ष्य है। यह कारख़ाना मई तक करीब 4000 पीपीई ड्रेस का निर्माण करेगा। जानकारी के मुताबिक यह पीपीई किट बाजार में मौजूद किट की तुलना में काफी सस्ती हैं। रेल कोच फैक्ट्री के उप मुख्य यांत्रिक इंजीनियर सुनील टेलर ने बताया कि इस किट में क्यूआर कोड भी लगाए गए हैं, जिसकी मदद से इसकी मैन्युफैक्चरिंग, बैच नंबर आदि के बारे में जानकारी मिल सकेगी।

 

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नॉर्दन रेलवे के जगाधरी वर्कशॉप में तैयार हुआ था पीपीई किट का यह मॉडल

मुख्य कारखाना प्रबंधक मनीष अग्रवाल ने बताया सबसे पहले नॉर्दन रेलवे के जगाधरी वर्कशॉप में रेलवे कर्मचारियों ने प्रेशर फ्रेबिक से पीपीई किट तैयार की थी। इस किट के तीन सैंपल डीआरडीओ के पास टेस्टिंग के लिए भेजे गए, जिन्हें अप्रूवल मिल मिलने के बाद रेलवे बोर्ड देश भरी में मौजूद रेलवे वर्कशॉप को इसी सैंपल के आधार पर किट तैयार करने के निर्देश जारी किए थे। इस किट में प्रेशर फेब्रिक का प्रयोग किया गया है। इसकी सिलाई इस तरह से की गई है कि उसमें कहीं से हवा अंदर न जा सके। सिलाई के बाद ऊपर से टेप लगाई गई है। निशातपुरा स्थित रेल कोच फैक्ट्री को यह पॉली प्रोपलीन फाइबर का कपड़ा रेल मंत्रालय की ओर से उपलब्ध कराया गया है।

विकास वर्मा
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