भोपाल एक्सप्रेस और जनशताब्दी पिटने के बाद शताब्दी और ओवर नाइट का प्रस्ताव खारिज, सिर्फ चलेगी रेवांचल एक्सप्रेस

- जल्द करेगा रेलवे बोर्ड फैसला, 60 प्रतिशत पैसेंजर डिमांड पर ही चलेंगी ट्रेन
- रिव्यू रिपोर्ट - कोरोना के चलते सफर करने से डर रहे हैं यात्री

भोपाल। कोरोना काल में करोड़ों रुपए का घाटा झेल चुका भोपाल डिवीजन अब पैसेंजर इनकम से कमाई करने का प्लान तैयार कर रहा है। रेलवे ने रूटीन ट्रेनों का ऑपरेशन शुरू करन की सिफारिश रेलवे बोर्ड से की है। कई जोन व डिवीजन के स्टेशनों को कनेक्ट करने वाली दर्जन भर ट्रेनों को चलाने के लिए प्रस्ताव भेजा गया था। भोपाल एक्सप्रेस और जनशताब्दी में 50 फीसदी यात्री नहीं मिलने की वजह से अब भोपाल-नई दिल्ली शताब्दी और ओव्हर नाइट एक्सप्रेस का प्रस्ताव निरस्त कर दिया गया है, सिर्फ रेवांचल एक्सप्रेस को चलाए जाने के प्रस्ताव पर मुहर लगी है।

रेलवे बोर्ड के आपरेटिंग विभाग ने पैसेंजर डिमांड रिपोर्ट भी सौंपी है। जिसके मुताबिक 1 जून से 10 जून के बीच हबीबगंज स्टेशन से दो रूटों पर चलाई जा रही भोपाल एक्सप्रेस और जनशताब्दी एक्सप्रेस में 50 फीसदी यात्री भी नहीं मिल रहे हैं। जबकि भोपाल से नई दिल्ली के लिए शताब्दी चलाने का प्रस्ताव भेजा गया है। इस पर रिव्यू रिपोर्ट में कहा गया है कि समान रूट की ट्रेनों में पैसेंजर डिमांड नहीं हो रही है। फिर कैसे ट्रेनों का आपरेशन शुरू किया जा सकता है। सूत्रों ने बताया कि शताब्दी चलाने का प्रस्ताव खारिज कर दिया गया है। इसके अलावा ओव्हर नाइट को भी होल्ड कर दिया गया है। इसकी बड़ी वजह यह है कि भोपाल एक्सप्रेस और जनशताब्दी में यात्री नहीं मिल रहे हैं। ट्रेनों को चलाया जा रहा है। जिससे रोजाना लाखों रुपए का नुकसान भी हो रहा है। ऐसे में बिना डिमांड वाली ट्रेनों को नहीं चलाया जा सकता है। सिर्फ भोपाल से रीवा के बीच चलने वाली रेवांचल एक्सप्रेस को ही बोर्ड की तरफ से हरी झंडी मिलने के आसार हैं।

रेलवे पर कोरोना का साया
- बीते 10-12 दिनों में रेलवे को कमाई की अपेक्षा घाटा हुआ है। रेलवे ने यात्रियों को 2 करोड़ रुपए से ज्यादा रिफंड किया है। जबकि आपरेशनल अर्निंग में घाटा हुआ है। वहीं दूसरी तरफ पैसेंजरों से आय में 70 फीसदी गिरावट आई है। वजह यह है कि कोरोना संक्रमण को देखते हुए यात्री सफर नहीं कर रहे हैं।

रेवांचल एक्सप्रेस का रैक वापस मिला

- इधर, रेवांचल एक्सप्रेस को चलाने की पूरी तैयारी भी की जा चुकी है। इस ट्रेक के लिए दो रैक की जरूरत पड़ती है। भोपाल मंडल ने इस ट्रेन का एक रैक तैयार कर लिया है। इस ट्रेन के कोचों को श्रमिक स्पेशल ट्रेनों के लिए दूसरे प्रदेशों में भेजा गया था जो वापस आ गया है। दूसरा रैक में तैयार किया जा रहा है।

इन मुख्य कारणों का हुआ रिव्यू
- पैसेंजर डिमांड - जिन ट्रेनों में यात्रियों की डिमांड है। उन्हें चलाए जाने की तैयारी चल रही है।

- कंटेनमेंट/हॉट-स्पॉट- कोरोना काल में यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखा गया है। जिन इलाकों में ज्यादा कोरोना के केस हैं। उन स्टेशनों और इलाकों में ट्रेनों का संचालन फिलहाल नहीं किया जाएगा।
- हाल्ट और टाइमिंग - रेलवे इन दिनों रूटीन ट्रेनों को फिर से शुरू करने के लिए कई स्टेशनों पर हॉल्ट कम कर सकता है। इसके साथ ही ट्रेनों का टेबल-टाइम भी रिवाइज किया जा रहा है।

सुनील मिश्रा
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