राज्यसभा के अपने ही दांव में फंस गई भाजपा, एक दांव से कई पर निशाना लेकिन घेरेे में खुद ये नेता

कैलाश सोनी और अजय प्रताप सिंह को राज्य सभा का टिकट मिलने से पार्टी के अंदर ही कई सुर विरोध में उठने शुरू

By: shailendra tiwari

Published: 13 Mar 2018, 03:44 PM IST

भोपाल . राज्यसभा की सीट भले ही जीतना भाजपा के लिए आसान हो, लेकिन उस पर प्रत्याशी का चयन उसके लिए गले की फांस बन गया है। जिन पर भी वह दांव खेल रही है, उसके विरोध में एक अंदरुनी आवाज शुरू हो गई है। मध्यप्रदेश में भाजपा ने केंद्रीय मंत्री थावरचंद गहलोत, राज्यमंत्री धर्मेंद्र प्रदान, प्रदेश उपाध्यक्ष अजय प्रताप सिंह और कैलाश सोनी को मैदान में उतारा है। चारों ही सीट भाजपा की तय हैं। संभव है कि इसके लिए मतदान की जरूरत नहीं पड़ेगी और इन सभी उम्मीदवारों को निर्विरोध ही विजेता घोषित कर दिया जाएगा। लेकिन इससे पहले ही पार्टी के भीतर उम्मीदवारों के चयन पर सवाल खड़े होने लगे हैं। खुलकर कोई नहीं बोल रहा है, लेकिन अंदरूनी तौर पर प्रत्याशियों के चयन और काबिलियत पर सवाल उठ रहे हैं।

दरअसल, मध्यप्रदेश से राज्य सभा की पांच सीटें खाली हुईं, जिसमें भाजपा के चार और कांग्रेस की एक सीट शामिल है। अभी के गणित के हिसाब से भाजपा फिर से चार और कांग्रेस एक उम्मीदवार को निर्विरोध भेजने की क्षमता रखती है। ऐसे में दोनों ही पार्टियों ने कुल पांच उम्मीदवार ही मैदान में उतारे हैं। कांग्रेस ने जहां पूर्व मंत्री राजमणि पर दांव खेला है तो वहीं भाजपा ने केंद्रीय मंत्री थावरचंद गहलोत, राज्यमंत्री धर्मेंद्र प्रदान, प्रदेश उपाध्यक्ष अजय प्रताप सिंह और कैलाश सोनी को उम्मीदवार बनाया है। सभी प्रत्याशियों ने अपना नामांकन भी दाखिल कर दिया है।

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सत्ता का ऐसा भयानक समीकरण
मध्यप्रदेश में भाजपा के भीतर सत्ता का समीकरण क्या है, इसको इस तरह से समझा जा सकता है कि उमा भारती की लोध वोट की राजनीति को कमजोर करने के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रहलाद पटेल को भरोसे में लेते हुए उनके भाई जालम सिंह पटेल को प्रदेश सरकार में मंत्री बना दिया। मंत्री बनाने के साथ ही प्रहलाद पटेल को भविष्य की राजनीति के सपने भी दिखा दिए। हालांकि कहा तो यहां तक गया है कि मुख्यमंत्री ने इसके बहाने उन्हें प्रदेश अध्यक्ष की दौड़ से बाहर कर दिया। खैर, उमा को कमजोर करने के लिए प्रहलाद को मजबूत किया और फिर उन्हीं प्रहलाद और जालम को कमजोर करने के लिए उनके धुर विरोधी कैलाश सोनी को राज्यसभा का टिकट थमा दिया। अब जितने मुंह उतनी बातें हो रही हैं। चर्चा है कि यह पैतरा कांटे से कांटा निकालने के लिए आजमाया गया है।

क्या नुकसान में जाएगी भाजपा
भाजपा ने दूसरा चेहरा अजय प्रताप सिंह को बनाया है। अजय प्रताप को थका हुआ घोड़ा माना जाता है। कहा जा रहा है कि विंध्य में वह भाजपा के लिए मजबूत साबित होंगे और वहां पर कांग्रेस नेता अजय सिंह की ठाकुर राजनीति का विकल्प बनेंगे। लेकिन अंदरुनी सूत्रों का कहना है कि अजय सिंह से मुकाबला करने से पहले अजय प्रताप को पार्टी के भीतर ही कई लोगों से मुकाबला करना होगा। विंध्य में अजय प्रताप सबसे कमजोर चहेरे के तौर पर जाने जाते है और स्थानीय भाजपा के लोग ही उन्हें तवज्जो नहीं देते हैं। या दूसरे शब्दों में कहें तो उन्हें अपने घर में ही पैराशूट वाले नेता के तौर पर जाना जाता है। कैलाश सोनी का हाल भी इससे कुछ अलहदा नहीं हैं। खैर, भाजपा ने जिस रणनीति के तहत इन दोनों नामों को राज्य सभा के लिए चुना था, उसमें वह फिलहाल सफल होती दिखाई नहीं दे रही है।

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