Raksha Bandhan 2020 : हिन्दू रानी ने माना था अपना भाई, मुस्लिम दोस्त ने भी निभाया 'रक्षा का वचन'


historical rakshabandhan: यह कहानी है भोपाल नवाब दोस्त मोहम्मद खान और रानी कमलापति के रिश्तों की। राखी के स्नेह की यह इमारत आज भी बुलंदी के साथ खड़ी है...।

By: Manish Gite

Published: 01 Aug 2020, 07:00 AM IST

raksha bandhan 2020

भोपाल। यह किस्सा है भोपाल रियासत की नींव रखने वाले पहले नवाब दोस्त मोहम्मद खान का। जिन्होंने एक हिन्दी रानी की रक्षा का वचन निभाया था। रक्षा के इस वचन की इमारत आज भी महल के रूप में बुलंदी के साथ खड़ी है। इसे आज सभी रानी कमलापति महल के नाम से जानते हैं।

 

माना जाता है कि किसी हिन्दू रानी से राखी बंधवाने वाला पहला शासक था दोस्त मोहम्मद खान। रानी कमलापति की सुरक्षा की थी और आराम से गुजर-बसर करने के लिए एक अलग महल बनवाकर दिया था...।

 

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(यह है भोपाल स्थित रानी कमलापति महल, इस महल को दोस्त मोहम्मद खान ने बनवाया था)

 

 

patrika.com रक्षाबंधन के मौके पर इतिहास के पन्नों से ऐसे किस्से बता रहा है जिसका भोपाल से गहरा नाता है...।

किंवदंती है कि जब रातापानी सेंचुरी के बीच स्थित गिन्नौरगढ़ के गौंड राजा निजाम शाह को जहर देकर मार दिया गया था। तब उनकी विधवा पत्नी अपने बेटे को जान बचाते हुए किले और आसपास के जंगलों में छुपती रही। अपनी जान बचाते हुए मां-बेटे भटकते-भटकते भोपाल की सरहद में पहुंच गए। दोनों ने भोपाल के पहले नवाब दोस्त मोहम्मद खान से मदद मांगी। रानी कमलापति के संस्कार और सहृदय व्यवहार देख वे काफी प्रभावित हो गए।

 

 

रानी ने कहा भाई :-:

मदद के लिए आी कमलापति ने दोस्त मोहम्मद खान को भाई कहकर संबोधित किया। उन्होंने भी वचन दिया और कमलापति की जान बचाने के लिए सुरक्षित ठिकाना देने का भरोसा दिलाया। कोलांस नदी के डैम पर यह महल आज भी बुलंदी के साथ खड़ा है। यह महल छोटे तालाब और बड़े तालाब के बीच स्थित है। माना जाता है कि कमलापति जब तक जीवित रहीं दोस्त मोहम्मद को राखी जरूर भेजती रही। किंवदंती यह भी है कि वे उस समय एक हिन्दू रानी से राखी बंधवाने वाले पहले शासक थे।

 

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भोपाल से 55 किमी दूर है गिन्नौरगढ़ किला :-:

भोपाल से 55 किलोमीटर दूर रायसेन जिले में रातापानी सेंचुरी के बीच में गिन्नौरगढ़ आज भी मौजूद है। हालांकि यह काफी जर्जर हालत में है, लेकिन यह किला आज भी लोगों के लिए कौतूहल का विषय बना रहता है।

 

उस समय 750 गांवों से मिलकर गिन्नौर राज्य बनाया गया था। बात उस समय की है जब मुगल साम्राज्य का पतन हो चुका था। गोंड़ राजा निजाम शाह का राज था। वे सात रानियां के साथ रहते थे। इनमें कृपाराम गोंड की बेटी कमलापति भी थी। सभी रानियों में कमलापति सबसे खूबसूरत थीं। वो काफी बुद्धिमान और वीर भी थी। निजाम शाह के परिवार का भतीजा चैनशाह का बाड़ी में राज्य था। वह अपने चाचा से नफरत करता था। उसने चाचा की हत्या करने के लिए काफी प्रयास किए थे। चैनशाह ने धोखे से निजाम शाह को जहर देकर मार दिया। चैनशाह के षड्यंत्र से बचने के लिए विधवा हुई कमलापति और उसका बेटा नवलशाह गिन्नौरगढ़ किले में ही छुप गए थे।

 

यह किला गौड़ राजाओं के समय में बनाया गया था, जो जंगल के बीच में स्थित है। कई विद्रोह और आक्रमणों से बचते बचते पति के हत्यारों से बदला लेने के लिए उसने इस्लामनगर के नवाब जो बाद में भोपाल के बने नवाब दोस्त मोहम्मद से मदद की पेशकश की। माना जाता है कि रानी ने दोस्त मोहम्मद को राखी बांधी थी और उन्हें अपना भाई बनाया था।

 

 

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2 मंजिल ऊपर, 5 मंजिल तालाब में :-:

कमलापति के लिए बड़े तालाब किनारे जो महल बनावाया था, जो 18वीं शताब्दी के शुरुआत में वास्तु का अनोखा उदाहरण है। यह महल दो मंजिला ऊपर है, जबकि तालाब के भीतर इसकी पांच मंजिलें हैं। लखौरी ईंटों और मिट्टी से इसे बनाया गया है। इस महल के नीचे के हिस्से में भारी-भरकम पत्थरों का बेस तैयार किया गया था। यह महल कोलांस नदी के डैम पर बनाया गया है, जिसका निर्माण राजा भोज ने किया था। अब भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने 1989 से इसे अपने संरक्षण में रख रखा है। इस महल के परिसर को सुंदर बगीचे में तब्दील किया गया है।

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