रक्षा बंधन 2019: इस बार बना है ये खास योग, जानें क्या करें क्या न करें

रक्षा बंधन 2019: इस बार बना है ये खास योग, जानें क्या करें क्या न करें

Deepesh Tiwari | Updated: 10 Aug 2019, 01:36:29 PM (IST) Bhopal, Bhopal, Madhya Pradesh, India

इस बार का रक्षाबंधन है कुछ खास, जानें इस त्योहार के खास नियम...

भोपाल। श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन हर वर्ष रक्षाबंधन rakshabandhan का त्यौहार मनाया जाता हैं। इसलिए इसे राखी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। यह पर्व भाई-बहन के प्रेम का उत्सव है। इस दिन बहनें भाइयों की समृद्धि के लिए उनकी कलाई पर रंग-बिरंगी राखियां rakhi बांधती हैं, वहीं भाई बहनों को उनकी रक्षा का वचन देते हैं। कुछ क्षेत्रों में इस पर्व को राखरी भी कहते हैं। यह सबसे बड़े हिन्दू त्योहारों में से एक है।

वहीं इस साल रक्षा बंधन Rakshabandhan 2019 का त्योहार 15 अगस्त को मनाया जाएगा। इस दिन बहनें अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं और भाई अपनी बहनों की रक्षा का संकल्प लेते हैं। लेकिन इस बार यह त्योहार भाई-बहनों के लिए और भी खास होने जा रहा है।

पंडित सुनील शर्मा के अनुसार रक्षाबंधन का यह पवित्र त्योहार इस बार गुरुवार के दिन पड़ रहा है। यह दिन देवगुरु बृहस्पति का दिन माना जाता है। रक्षाबंधन Raksha Bandhan को लेकर मान्यता है कि देवगुरु बृहस्पति ने देवराज इंद्र की विजय प्राप्ति के लिए इंद्र की पत्नी को रक्षासूत्र बांधने को कहा था।

इस कारण गुरुवार के दिन यह पर्व होने से इसका महत्व और भी बढ़ गया है। इस दिन भाई बहन सुबह सबसे पहले भगवान विष्णु का पूजन करें और बाद में राखी बांधे तो और भी शुभ होगा।

रक्षाबंधन मुहूर्त 2019 : rakshabandhan 2019 muhurat ...
रक्षा बंधन का पर्व श्रावण मास में उस दिन मनाया जाता है जिस दिन पूर्णिमा अपराह्ण काल में पड़ रही हो। वहीं, इस बार राखी पर भद्रा का साया नहीं रहेगा।
इसलिए बहनें भाइयों की कलाई पर सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त के बीच रक्षाबंधन का अनुष्ठान कर सकती हैं। अनुष्ठान का समय प्रात: 05:53 से सांय 17:58 बजे तक रहेगा। अपराह्न मुहूर्त 13:43 बजे से 16:20 बजे तक है। हालांकि आगे दिए इन नियमों को भी ध्यान में रखना आवश्यक है–

1. यदि पूर्णिमा के दौरान अपराह्ण काल में भद्रा हो तो रक्षाबंधन नहीं मनाना चाहिए। ऐसे में यदि पूर्णिमा अगले दिन के शुरुआती तीन मुहूर्तों में हो, तो पर्व के सारे विधि-विधान अगले दिन के अपराह्ण काल में करने चाहिए।

2. लेकिन यदि पूर्णिमा अगले दिन के शुरुआती 3 मुहूर्तों में न हो तो रक्षा बंधन को पहले ही दिन भद्रा के बाद प्रदोष काल के उत्तरार्ध में मना सकते हैं।

रक्षाबंधन के दिन रेशमी वस्त्र में केशर, सरसों, चंदन चावल एवं दुर्वा रखकर रंगीन सूत का पूजन करने के बाद भाई के दाहिने हाथ में बांधना चाहिए। इससे वर्ष भर सुख समृद्धि रहती हैं। रक्षाबंधन के पर्व के संबंध में कई कथाएं प्रचलित हैं। बताया जाता है कि श्रावण पूर्णिमा के दिन राजा बलि को लक्ष्मी जी ने राखी बांधी थी।

शास्त्रों के अनुसार भद्रा होने पर रक्षाबंधन मनाने का पूरी तरह निषेध है, चाहे कोई भी स्थिति क्यों न हो।

ग्रहण सूतक या संक्रान्ति होने पर यह पर्व बिना किसी निषेध के मनाया जाता है।

राखी पूर्णिमा की पूजा-विधि : rakshabandhan puja vidhi
रक्षा बंधन के दिन बहने भाईयों की कलाई पर रक्षा-सूत्र या राखी बांधती हैं। साथ ही वे भाईयों की दीर्घायु, समृद्धि व ख़ुशी आदि की कामना करती हैं।

रक्षा-सूत्र या राखी बांधते हुए निम्न मंत्र पढ़ा जाता है, जिसे पढ़कर पुरोहित भी यजमानों को रक्षा-सूत्र बांध सकते हैं–

ॐ येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः।
तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल।।

इस मंत्र के पीछे भी एक महत्वपूर्ण कथा है, जिसे प्रायः रक्षाबंधन की पूजा के समय पढ़ा जाता है। एक बार धर्मराज युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से ऐसी कथा को सुनने की इच्छा प्रकट की, जिससे सभी कष्टों से मुक्ति मिल जाती हो। इसके उत्तर में श्री कृष्ण ने उन्हें यह कथा सुनायी–

प्राचीन काल में देवों और असुरों के बीच लगातार 12 वर्षों तक संग्राम हुआ। ऐसा मालूम हो रहा था कि युद्ध में असुरों की विजय होने को है। दानवों के राजा ने तीनों लोकों पर कब्ज़ा कर स्वयं को त्रिलोक का स्वामी घोषित कर लिया था।

दैत्यों के सताए देवराज इन्द्र गुरु बृहस्पति की शरण में पहुंचे और रक्षा के लिए प्रार्थना की। श्रावण पूर्णिमा को प्रातःकाल रक्षा-विधान पूर्ण किया गया।

इस विधान में गुरु बृहस्पति ने ऊपर उल्लिखित मंत्र का पाठ किया; साथ ही इन्द्र और उनकी पत्नी ने भी पीछे-पीछे इस मंत्र को दोहराया। इंद्र की पत्नी इंद्राणी ने सभी ब्राह्मणों से रक्षा-सूत्र में शक्ति का संचार कराया और इन्द्र के दाहिने हाथ की कलाई पर उसे बांध दिया। इस सूत्र से प्राप्त बल के माध्यम से इन्द्र ने असुरों को हरा दिया और खोया हुआ शासन पुनः प्राप्त किया।

रक्षा बंधन को मनाने की एक अन्य विधि भी प्रचलित है। महिलाएँ सुबह पूजा के लिए तैयार होकर घर की दीवारों पर स्वर्ण टांग देती हैं। उसके बाद वे उसकी पूजा सेवईं, खीर और मिठाईयों से करती हैं। फिर वे सोने पर राखी का धागा बांधती हैं। जो महिलाएँ नाग पंचमी पर गेंहूँ की बालियाँ लगाती हैं, वे पूजा के लिए उस पौधे को रखती हैं। अपने भाईयों की कलाई पर राखी बांधने के बाद वे इन बालियों को भाईयों के कानों पर रखती हैं।

कुछ लोग इस पर्व से एक दिन पहले उपवास करते हैं। फिर रक्षाबंधन वाले दिन, वे शास्त्रीय विधि-विधान से राखी बांधते हैं। साथ ही वे पितृ-तर्पण और ऋषि-पूजन या ऋषि तर्पण भी करते हैं।

कुछ क्षेत्रों में लोग इस दिन श्रवण पूजन भी करते हैं। वहाँ यह त्यौहार मातृ-पितृ भक्त श्रवण कुमार की याद में मनाया जाता है, जो भूल से राजा दशरथ के हाथों मारे गए थे।

इस दिन भाई अपनी बहनों तरह-तरह के उपहार भी देते हैं। यदि सगी बहन न हो, तो चचेरी-ममेरी बहन या जिसे भी आप बहन की तरह मानते हैं, उसके साथ यह पर्व मनाया जा सकता है।

रक्षाबंधन से जुड़ी हैं ये भी कथाएं : rakshabandhan katha ...
राखी के पर्व से जुड़ी कई कथाएं हैं। कई पौराणिक घटनाएं हैं, जो इस त्यौहार के साथ जुड़ी हुई हैं–

• मान्यताओं के अनुसार इस दिन द्रौपदी ने भगवान कृष्ण के हाथ पर चोट लगने के बाद अपनी साड़ी से कुछ कपड़ा फाड़कर बांधा था।

द्रौपदी की इस उदारता के लिए श्री कृष्ण ने उन्हें वचन दिया था कि वे द्रौपदी की हमेशा रक्षा करेंगे। इसीलिए दुःशासन द्वारा चीरहरण की कोशिश के समय भगवान कृष्ण ने आकर द्रौपदी की रक्षा की थी।

• ऐसा भी कहा जाता है कि इस दिन देवी लक्ष्मी ने सम्राट बाली की कलाई पर राखी बांधी थी।

यह है रक्षाबंधन के फैमस गाने : best songs of rakshabandhan ...

हिंदी फिल्मों में रक्षाबंधन के कई प्रसिद्ध गीत हैं! राखी के लिए ये गाने पुरानी फिल्मों से हैं, फिर भी वे अपने अद्भुत और भावपूर्ण शब्दों raksha bandhan wale gane के कारण वर्तमान समय में भी अपना आकर्षण बनाए हुए हैं।

फिल्मों को समाज का आइना कहा जाता है। इस आइने में हमें वही सबकुछ नजर आता है, जो हमारे समाज में और हमारे इर्द-गिर्द होता है।
हमारे समाज और भारतीय संस्‍कृति का सबसे बड़ा और अहम हिस्‍सा हैं इसके त्‍योहार। अब बात समाज के आइने की हो रही हो और यहां जिक्र त्‍योहारों का न हो, ऐसा कैसे मुमकिन है।

इस क्रम में हिंदी फ‍िल्‍मों में भारतीय त्‍योहारों को लेकर हर तरह के गानों को प्राथमिकता दी जाती है। प्‍यार-मोहब्‍बत, होली-दिवाली से लेकर फ‍िल्‍मों में हमारे समाज के ऐसे हर पहलू को तरजीह दी जाती है। ऐसे में आज रक्षाबंधन के पर्व पर भला बॉलीवुड गानों को कैसे भूला जा सकता है।

ये बॉलीवुड के वो सदाबहार गाने हैं, जो हर साल बहनों की जुबान पर आ ही जाते हैं। आइए गौर करें रक्षाबंधन से जुड़े बॉलीवुड के कुछ खास गानों rakshabandhan songs पर।

1 . 'मेरे भैया, मेरे चंदा, मेरे अनमोल रतन...'
भाई के प्रति बहन के प्यार, दुलार के भावों से भरा ये गाना जब भी कानों को सुनाई देता है। मन में रक्षाबंधन के त्‍योहार की खुशी हिलोरे मारने लगती है। भाई के प्रति बहन के अनन्य और समर्पित प्रेम भाव से दिल मधुरता से भर जाता है। अब अगर आप भी अपने भाई के लिए इस रक्षाबंधन पर कुछ खास करना चाहती हैं तो उसको राखी बांधते समय ये गाना उसके‍ लिए जरूर गाइएगा।

- 'काजल' फिल्म में संगीतकार रवि के संगीत से सजे आशा भोंसले आवाज में यह बोल बेहद बेमिसाल बन गए। फिल्म काजल में मीना कुमारी पर बेहद लोकप्रिय गीत "मेरे भइया मेरे चंदा मेरे अनमोल रतन" का फिल्मांकन किया गया था। रवि के संगीत निर्देशन में इस गीत को आशा भोंसले स्वर दिया था।

 

2 . 'बहना ने भाई की कलाई से प्यार बांधा है...',
प्‍यार के दो तार से संसार को बांधने वाले भाई-बहन के इस खास पर्व पर बॉलीवुड का ये गाना किसी बहन को न याद आए, ऐसा कैसे हो सकता है। वहीं सच ही तो है, बहन के प्रेम के बगैर तो राखी को कोई मोल भी नहीं। गाने से साफ है कि बहन राखी की डोर के रूप में भैया की कलाई पर अपने ढेर सारे प्यार और शुभकामनाओं को ही तो बांधती है।
- इस गीत में धर्मेन्द्र अपनी बहनों से घिरे हैं जो उनकी आरती कर रही हैं और यह गीत गा रहीं हैं। जिसे सुनकर धर्मेन्द्र की आंखों में प्यार के आंसू निकल पड़ते हैं। गीत बहुत ही यादगार है और रक्षा बंधन पर आज भी खूब बजता है।

3 . 'फूलों का तारों का, सबका कहना है...'
तो अब बारी आती है प्‍यारे भइया की। अब रक्षाबंधन का त्‍योहार सिर्फ बहनों का ही तो नहीं होता है। भाइयों के लिए भी तो कुछ खास होना चाहिए। लीजिए, आ गया भाइयों के लिए भी कुछ खास। भाई बॉलीवुड के इस बेहतरीन गाने के साथ अपनी प्‍यारी बहना के लिए अपने प्‍यार का इजहार करते हैं। तो आप भी क्‍यों चुप हैं। उठिए और हो जाइए शुरू अपनी बहन से अपने प्‍यार का इजहार करने के लिए।

- वर्ष 1971 में रिलीज 'हरे रामा हरे कृष्णा' में देवानन्द और जीनत अमान द्वारा निभाई भाई-बहन की भूमिका को आज भी लोग नहीं भूले हैं और न ही भूले हैं फिल्म के गाने "फूलों का तारों का सबका कहना है एक हजारों में मेरी बहना है"। यह गीत आज भी रक्षाबंधन के सदाबहार गीतों में शुमार है।

4 . 'भैया मेरे, राखी के बंधन को निभाना...'
अब बारी आती है भाई से अपनी राखी का वादा लेने की। बहनों को भी वादा और क्‍या चाहिए, सिर्फ इतना कि इस प्‍यार के बंधन को पूरी उम्र यूंही निभाते रहना। इसी वादे के साथ हर बहन का ये खुशियों का त्‍योहार सबसे खास बन जाता है। छोटी बहन और बड़े भैया के बीच का मिठास से भरा प्यारा रिश्ता इस गाने में हर कोई महसूस कर सकता है।
- 1959 में आई फिल्म 'छोटी बहन' में भाई-बहन के प्यार भरे अटूट रिश्ते को परदे पर दिखाया गया था। इस फिल्म का गीत "भइया मेरे राखी के बंधन को निभाना" राखी पर्व का चिरपरिचत गीत बन गया। गाने में बलराज साहनी ने बड़े भाई और नन्दा ने छोटी बहन की भूमिका निभायी थी।

5 . 'हम बहनों के लिए मेरे भैया...'
भाइयों का मन सबसे ज्‍यादा उस समय भर आता है, जब उनकी बहन उनसे पराई होती है। ऐसे में हर बहन की मासूम सी गुजारिश, किसका मन नहीं पिघलाती होगी भला। ऐसे में आप भी अगर अपने भइया से दूर हैं और आपका भाई बड़ी दूर से आपसे राखी बंधवाने आया है, तो आपको भी ये गीत जरूर याद आ जाएगा। आएगा भी क्‍यों नहीं भला, ये रिश्‍ता ही कुछ ऐसा है।

Show More

MP/CG लाइव टीवी

खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned