मध्यप्रदेश में बिजली कंपनियों ने ये क्या कर डाला, जानने के लिए पढ़ें पूरी खबर

मध्यप्रदेश में बिजली कंपनियों ने ये क्या कर डाला, जानने के लिए पढ़ें पूरी खबर
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Anil Chaudhary | Updated: 17 Jul 2019, 05:17:20 AM (IST) Bhopal, Bhopal, Madhya Pradesh, India

- कर्ज का लाइलाज मर्ज : मोदी सरकार की उदय योजना भी मध्यप्रदेश में फेल

भोपाल. प्रदेश सरकार ने बिजली कंपनियों का जितना कर्ज खत्म किया, उतना इन कंपनियों ने वापस खुले बाजार से उठा लिया। इसके लिए गारंटर भी वापस सरकार ही बन गई। बिजली के खिलाडिय़ों की इस चालाकी से मोदी सरकार का उदय योजना का मॉडल मध्यप्रदेश में फेल हो गया।
- ऐसे समझें कैसे फेल हुआ उदय
मोदी सरकार ने 2016 में उदय योजना लॉन्च की थी। इसके तहत राज्य सरकार को बिजली सेक्टर का 75 फीसदी कर्ज उठाकर खत्म करना था। इसके तहत मध्यप्रदेश में बिजली कंपनियों का करीब 26 हजार करोड़ कर्ज खत्म करना तय किया गया। राज्य सरकार ने सालाना औसत सात हजार करोड़ रुपए कंपनियों को पंूजी मद में देना तय किया। इसकी दो किस्त तुरंत 2017 व 2018 में दी गई, लेकिन बिजली कंपनियों ने इतना ही कर्ज फिर ले लिया। इसका बोझ बिजली दरों के रूप में उपभोक्ताओं पर ही डाला जाएगा। जिस समय बिजली कंपनियों पर उदय योजना के तहत कर्ज खत्म किया जाना था, तब कंपनियों पर करीब 35 हजार करोड़ का कर्ज था।
- यूं हुआ दोहरा नुकसान
बिजली कंपनियों ने औसत 6000 करोड़ रुपए सालाना का कर्जा वापस लिया तो इसमें भी गारंटी राज्य सरकार की ओर से ही दी गई। कैबिनेट से इसे मंजूर कराया गया।
- अभी भी उधार की सवारी
बिजली कंपनियां उधार की सवारी ही कर रही हैं। इस वित्तीय सत्र में भी दो हजार करोड़ रुपए कर्ज लेने को मंजूरी दी गई। पिछले साल भी औसत छह हजार करोड़ रुपए का कर्ज लिया गया। यानी जो 26 हजार करोड़ कर्ज खत्म होना था, वो चार साल में वापस बिजली कंपनियों पर चढ़ गया है।
- कंपनियां चाहती हैं 12 फीसदी बढ़े दर
इस साल भी बिजली कंपनियों ने करीब 4000 करोड़ रुपए का घाटा बताया है। यह घाटा लाइन लॉस व अन्य नुकसानों का हवाला देकर बताया गया है। दरअसल, एक ओर बिजली चोरी पर अंकुश नहीं किया जा रहा, तो दूसरी ओर लगातार कर्ज उठाया जा रहा है। इस बार कंपनियों ने औसत 12 फीसदी की दर वृद्धि मांगी है।

- घाटा घटाने ही हुआ था कंपनियों का गठन
बिजली कंपनियों का गठन बिजली सेक्टर को घाटे से निकालने के लिए हुआ था। कांग्रेस शासनकाल में राज्य विद्युत मंडल होता था। मंडल घाटे में चला गया, इसलिए बिजली कंपनियों का गठन किया गया था। अब बिजली कंपनियां भी विद्युत मंडल से ज्यादा कर्ज लेने लगी हैं। इसके अलावा घाटा भी नियंत्रण में नहीं आया। 15वें वित्त आयोग ने हाल ही में मप्र दौरे के दौरान भी राज्य सरकार को इन घाटों के कारण नाराजगी जताई है।

भाजपा ने बिजली कंपनियों को कर्ज में डुबा दिया है। अब हमारे सामने इन्हें कर्ज से उबारने की चुनौती है। इसके लिए प्रयास हो रहे हैं।
- प्रियव्रत सिंह, ऊर्जा मंत्रीे

 

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