scriptReal truth of life threaded by Kabir's couplets | कबीर के दोहों में पिरोई जीवन की असल सच्चाई | Patrika News

कबीर के दोहों में पिरोई जीवन की असल सच्चाई

दुष्यंत संग्रहालय में भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद(आईसीसीआर) की ओर से लोकगायन प्रस्तुति का आयोजन

भोपाल

Updated: June 18, 2022 12:43:33 am

भोपाल। दुष्यंत संग्रहालय में भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद(आईसीसीआर) की ओर से लोकगायन प्रस्तुति का आयोजन किया गया। होराइजन सीरीज के अंतर्गत आयोजित इस प्रस्तुति में विक्रम सिंह ने कबीर के दोहे पर भजन प्रस्तुत किए। वहीं, सुरेखा कांबले ने शास्त्रीय गायन और उदय प्रताप सिंह ने तबला वादन की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम का शुभारंभ कबीर गायन से हुआ। विक्रम सिंह व मंडली ने कबीर के दोहे आवरी सहेली गुरु जी का मंगल गाओ री... पद गाया। इस पद में गुरु के अतिथि के घर आगमन पर स्वागत का भाव प्रकट करने के लिए खुशी से मंगल गीत गाए जाते हैं। वहीं, दूसरी प्रस्तुति म्हारी सदा राम रस भीनी चदरिया झीनी रे.... की प्रस्तुति रही। इस पद में गायक ने शरीर रूपी चादर का उदाहरण देकर समझाया कि चादर कैसे बनाए और इसे मेला होने से कैसे बचाया जाए। वहीं उन्होंने अगली प्रस्तुति भरा सत्संग का दरिया, म्हालो जिसका जी चाहे.... से बताया कि कबीर दास जी ने सत्य ज्ञान रूपी दरिया में गोता लगाने की बात कही है। वहीं, निमाड़ अंचल के लोक गायक संत सिंगाजी के भजन खेती खेड़ा रे हरी नाम की जा में.... की प्रस्तुति ने संत सिंगाजी महाराज के हरि नाम भक्ति करने का उपाय बताया है। वहीं अंतिम कड़ी में जरा हल्के गाड़ी हाको मेरे राम गाड़ी वाले... के माध्यम से गायक ने मानव शरीर की बैलगाड़ी का उदाहरण देकर समझाया है कि इस गाड़ी में चेतन स्वरूप राम चालक हैं, वह इस गाड़ी को बड़ी जतन से चला रहे हैं।

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दिल्ली और अजराड़ा घराने के कायदे किए पेश

अगली कड़ी में सुरेखा कांबले ने शास्त्रीय गायन की प्रस्तुति देकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने राग मालकौंस में अलाप जोड़ झाला की प्रस्तुति दी इसके बाद चोताल में एक बंदिश की प्रस्तुति दी जिसके बोल थे परमेश्वर प्रथम नाथ ब्रह्मम द्वितीय वैद कहो है... खे। इसके बाद गौतम शाक्य मुनि शुद्धोधन सुरज में... से अपनी वाणी को विराम दिया अंतिम कड़ी तबला वादक उदय प्रताप सिंह ने तीनताल में तबला वादन किया। इसमें परम्परागत उठान, पेशकार में लयकारी की प्रस्तुति दी। वहीं, अजराड़ा घराना के कायदे और दिल्ली घराने का कायदा पेश किया।

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