scriptReconciliation between opposition leaders of Congress | कांग्रेस के घुर विरोधी नेताओं के बीच पिछली सियासी वर्फ | Patrika News

कांग्रेस के घुर विरोधी नेताओं के बीच पिछली सियासी वर्फ

11 साल से थी दोनों नेताओं के बीच अदावद, गिले शिकवे दूर, एक दूसरे का मुंह मीठा कराया

भोपाल

Published: April 30, 2022 11:45:28 pm

भोपाल। वैसे तो एक पुरानी कहावत है कि सियासत (politics) में कुछ स्थाई नहीं होता, दुश्मनी कब दोस्ती में बदल जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता। दोस्त कब एक दूसरे के घुर विरोधी हो जाएं। 11 साल पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अजय सिंह (Ajay singh) और चौधरी राकेश सिंह ( Rakesh singh) चतुर्वेदी के बीच की दोस्ती कड़वाहट में बदल गई थी। ये दोनों एक दूसरे के घुर विरोधी हो गए। लेकिन शनिवार को एक अच्छी तस्वीर सामने आई। चौधरी राकेश सिंह और अजय सिंह के बीच सियासी वर्फ पिछल गई। गिले शिकवे भूल वे एक दूसरे से मिले। एक दूसरे को मिठाई खिलाई। यानी यह संदेश देने का प्रयास किया कि अब हम साथ-साथ हैं। मध्यप्रदेश कांग्रेस में इसे बड़े बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।
कांग्रेस के घुर विरोधी नेताओं के बीच पिछली सियासी वर्फ
कांग्रेस के घुर विरोधी नेताओं के बीच पिछली सियासी वर्फ
असल में वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव के पहले प्रदेश कांगे्रस अध्यक्ष कमलनाथ (Kamalnath) सभी नेताअेां को एक मंच पर लाने के प्रयास में जुटे हैं। एक दूसरे के घुर विरोधी नेताअेां को साथ लाने में भी कमलनाथ की सक्रिय भूमिका रही। इसके लिए ग्वालियर-चंबल के कद्दावर नेता डॉ. गोविंद सिंह को भी लगाया गया। अन्य नेताओं ने भी जिम्मेदारी निभाई। आखिरकार इन दोनों को एक साथ एक मंच पर लाने में पार्टी को सफलता मिली। आपसी कड़वाहट भी दूर हुई। शायद यही कारण है कि चौधरी राकेश सिंह शनिवार को अजय सिंह के बंगले जा पहुंचे। जिन्होंने यह दृश्य देखा वे चौंक गए। अजय सिंह ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। दोनों ने एक दूसरे का मुंह मीठा कराया। साथ गुफ्तगू भी हुई।
विधानसभा सत्र के दौरान बढ़ी थीं दूरियां

मामला करीब 11 वर्ष पुराना है। उस दौरान अजय ङ्क्षसह नेता प्रतिपक्ष थे और चौधरी राकेश सिंह चतुर्वेदी उप नेता थे। तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सरकार के खिलाफ विपक्ष ने अविश्वास प्रस्ताव पेश किया था। अविश्वास प्रस्ताव पर सदन में लम्बी चर्चा चली। सब कुछ तय रणनीति के मुताबिक चल रहा था, लेकिन नाटकीय घटनाक्रम के तहत चौधरी राकेश सिंह कांग्रेस का खेमा छोड़कर भाजपा के खेमे से जा मिले। इससे सदन का पूरा नजारा ही बदल गया। कांग्रेस की रणनीति फेल हो गई। इसके बाद अजय सिंह और राकेश सिंह एक दूसरे के घुर विरोधी हो गए।

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