रेड्डी का सीएस पद से हटना तय, इकबाल हो सकते हैं नए सीएस

भाजपा के सत्ता में आते ही होगा बड़ा एक्शन...

- बड़े पैमाने पर होगी प्रशासनिक सर्जरी, बदलेंगे तीन दर्जन कलेक्टर
- पुलिस में भी बड़े बदलाव, पीएससी की नियुक्तियां भी रद्द होंगी

- दीपक खांडेकर और राधेश्याम जुलानिया भी सीएस की दौड़ में

jitendra [email protected] भोपाल। कमलनाथ सरकार गिरने के बाद अब मुख्य सचिव पद से एम गोपाल रेड्डी का हटना लगभग तय हो गया है। भाजपा ने सत्ता में आते ही अफसरों को निशाने पर लेने की तैयारी कर ली है, क्योंकि पिछले कुछ महीनों में भाजपा नेताओं के साथ अफसरशाही का जो रवैया रहा, उससे भाजपा में भारी नाराजगी है। पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान ने दो दिन पूर्व ही गोपाल रेड्डी को भष्टाचार बताया था। अब वे शिवराज ही सीएम पद के लिए भाजपा की ओर से सबसे प्रबल दावेदार हैं। ऐसे में गोपाल रेड्डी की सीएस पद से विदाई लगभग तय हो गई है। उनकी जगह एसीएस इकबाल सिंह बैंस का मुख्य सचिव बनना तय माना जा रहा है। हालांकि सीएस पद की दौर में एसीएस दीपक खांडेकर व राधेश्याम जुलानिया भी है। ये दोनों ही अफसर फिलहाल केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर है। इन तीनों ही अफसरों को शिवराज की पसंद का माना जाता है।
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इसलिए हटेंगे रेड्डी-
दरअसल, एम गोपाल रेडडी को कमलनाथ सरकार ने जाते-जाते सीएस बनाया है। 1992 में छिंदवाड़ा कलेक्टर होने के कारण रेड्डी कमलनाथ की पसंद थे। 31 मार्च को एसआर मोहंती मुख्य सचिव पद से सेवानिवृत्त होने वाले थे, लेकिन रेड्डी को सीएस बनाने के लिए ही मोहंती को प्रशासन अकादमी में डीजी बनाकर भेजा गया। इसके बाद रेड्डी को ताबड़तोड़ तरीके से चार दिन पूर्व सीएस बनाया गया। रात को ही रेड्डी ने पदभार भी संभाल लिया। रेड्डी सितंबर 2020 में सेवानिवृत्त होना है। अब सरकार बदलने के कारण उनका हटना तय हो गया है।

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बड़ी प्रशासनिक सर्जरी तय, निशाने पर कलेक्टर-

भाजपा सरकार के सत्ता में आते ही बड़ी प्रशासनिक सर्जरी होना है। इसमें इंदौर, भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर, गुना, छिंदवाड़ा, राजगढ़ सहित तीन दर्जन से ज्यादा कलेक्टर भी बदले जाएंगे। इनमें उन जिलों के कलेक्टर भी शामिल रहेंगे, जिन जिलों में सिंधिया समर्थक 22 विधायकों के इस्तीफे के बाद उपचुनाव होना है। भाजपा चुनाव वाले इन जिलों में अपने हिसाब से प्रशासनिक जमावट करेगी। जौरा और आगर-मालवा में विधानसभा सीट पर उपचुनाव होना है, इस कारण यहां भी सारे अफसरों की नए सिरे से जमावट होगी। इसके अलावा एसीएस, पीएस, आयुक्त सहित दो दर्जन से ज्यादा अन्य विभागाध्यक्ष भी बदले जाएंगे। छह से ज्यादा संभागायुक्तों की जिम्मेदारी बदली जा सकती है। राजगढ़ कलेक्टर निधि निवेदिता को भाजपा नेताओं से थप्पड़ कांड के विवाद के कारण हटाया जाना तय है। इसी तरह राज्य प्रशासनिक सेवा में भी भारी बदलाव होंगे। जिन अफसरों के तबादले कमलनाथ सरकार ने जाते-जाते किए हैं, उन सभी में बदलाव किया जाएगा।
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पुलिस में भारी-फेरबदल, राजेंद्र पर गिरेगी गाज-
आईएएस व राज्य प्रशासनिक अफसरों के अलावा पुलिस महकमे में भी भारी फेरबदल होना तय है। इसमें आईपीएस अफसरों में राजेंद्र कुमार, पुरूषोत्तम कुमार, सुशोभन बैनर्जी, रूचिवर्धन मिश्रा सहित दो दर्जन प्रमुख पदों वाले अफसरों को बदला जाएगा। इंटेलीजेंस डीजी एसडब्ल्यू नकवी को भी हटाया जाएगा। वहीं दो दर्जन से ज्यादा जिलों के एसपी बदले जा सकते हैंं। इनमें भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, गुना, छिंदवाड़ा, राजगढ़ सहित अन्य प्रमुख जिले होंगे। पीएचक्यू में भी प्रशासन-इंटेलीजेंस सहित अन्य अफसरों की जिम्मेदारी बदली जाएगी।

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रद्द हो जाएगी एमपी-पीएससी की नियुक्तियां, छीनेंगे मंत्री का दर्जा-

भाजपा ने सत्ता में आते ही कमलनाथ सरकार की नियुक्तियों पर गाज गिराने का मन बना लिया है। इसके तहत एमपी-पीएससी में सदस्य के तौर पर रामू टेकाम व राशिद सोहेल सिद्दीकी की नियुक्तियों को रद्द किया जाएगा। वहीं विभिन्न आयोगों में बनाए गए अध्यक्ष व सदस्यों से कैबिनेट मंत्री व राज्यमंत्री का दर्जा भी तुरंत छीना जाएगा। इससे इन अध्यक्षों व सदस्यों को मिलने वाली गाड़ी, आवास सहित अन्य सरकारी सुविधाएं छीन जाएंगी।
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ग्वालियर-चंबल में चलेगी सिंधिया की पसंद-
कमलनाथ सरकार को गिराने में अहम भूमिका निभाने वाले दिग्गज नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया की पसंद अब ग्वालियर-चंबल अंचल में पहली प्राथमिका रहेगी। उनकी पसंद के आधार पर ही अफसरों की तैनाती होगी। इसके अलावा मालवा अंचल में भी सिंधिया की पसंद को कुछ हद तक तवोज्जो दी जाएगी। आईएएस से लेकर पुलिस अफसरों तक की पदस्थापना में सिंधिया की पसंद दिखेगी। जिन अफसरों ने सिंधिया के खिलाफ जांच खोली, उनको पहली तबादला सूची में ही हटाया जाएगा। वहीं जिन अफसरों ने अन्य भाजपा नेताओं को निशाने पर लिया था, उनको भी मैदानी पोस्टिंग से हटाया जाएगा।

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इधर, आयोग अध्यक्षों-सदस्यों के खिलाफ कोर्ट पहुंचे दुबे-

दूसरी ओर आरटीआई एक्टिविस्ट अजय दुबे विभिन्न आयोगों में पदस्थ किए गए अध्यक्षों व सदस्यों के खिलाफ कोर्ट पहुंच गए हैं। कमलनाथ सरकार ने जाते-जाते आयोगों में जिन अध्यक्षों व सदस्यों की नियुक्ति की, उन्हें अवैध ठहराया है। दुबे ने जबलपुर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। इसमें राज्यपाल, प्रदेश सरकार, शोभा ओझा, जेपी धनोपिया, अभय तिवारी सहित अन्य को पक्षकार बनाया है। हाईकोर्ट ने कोरोना वायरस के कारण अभी सुनवाई नहीं की गई है। हाईकोर्ट ने सुनवाई के लिए 27 अप्रैल की तारीख दी गई है।
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जीतेन्द्र चौरसिया Reporting
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