देश के हर नागरिक के मन में बसते हैं राम...

देश के हर नागरिक के मन में बसते हैं राम...

Deepesh Tiwari | Publish: Nov, 02 2018 08:09:55 AM (IST) | Updated: Nov, 02 2018 08:09:56 AM (IST) Bhopal, Bhopal, Madhya Pradesh, India

बनारस घराने के प्रख्यात शास्त्रीय गायक पद्मभूषण छन्नूलाल मिश्र की पत्रिका से विशेष बातचीत...

भोपाल। संत का अर्थ होता है जो हर तरह के कष्ट सहकर भी समाज की भलाई के बारे में सोचे... समाज को धर्म की राह दिखाए... यदि संत ही राजनीति करने लगेंगे तो समाज की भलाई के बारे में कौन सोचेगा। संतों को ये शोभा नहीं देता।

उनके इस कदम के बारे में वे जानें, लेकिन मेरा मानना है कि संतों को राजनीति से दूर ही रहना चाहिए। यह बात बनारस घराने के प्रख्यात शास्त्रीय गायक पद्मभूषण पं.छन्नूलाल मिश्र ने हितेश शर्मा से विशेष बातचीत में कहीं। वे यहां रवीन्द्र भवन में आयोजित मध्यप्रदेश स्थापना दिवस समारोह में प्रस्तुति देने आए थे।

: राम मंदिर बनाने के लिए क्या किया जाए?
- राम मंदिर राजनीति का मुद्दा बना दिया गया है जबकि ये तो आस्था का विषय है... देश के हर नागरिक के मन में राम बसते हैं। हर हिन्दू चाहता है कि अयोध्या में जन्मभूमि पर राम मंदिर बने।

 

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राम के लिए तो भक्त अपनी जान देने के लिए तैयार हैं। वो मरते हुए भी यही सोचेगा कि रामजी का मंदिर बन जाए। यदि मंदिर हमारे देश में नहीं बनेगा तो कहां बनेगा।

: विवाद को कौन हवा दे रहा है?
- हमारा देश गंगा-जमुनी तहजीब वाला है। हिन्दू-मुस्लिम सब साथ रहते हैं। किसी को भी राम मंदिर बनने से परेशानी नहीं है। विवाद की कोई बात नहीं है। हां, हमें ये देखना होगा कि विवाद कराने वाले कौन लोग हैं। वे किस कारण से विवाद करा रहे हैं। ये मुद्दा भले ही न्यायालय में हो, लेकिन ये कोर्ट का विषय नहीं है ये पूरी तरह से हिन्दुओं की आस्था का विषय है। उसी तरह से विचार होना चाहिए।

: सरदार पटेल की प्रतिमा लगाने पर राजनीति हो रही है?
- लौह पुरुष सरदार पटेल इस देश की महान शख्सियत हैं। देश में कबीरदास, तुलसीदास से लेकर लक्ष्मीबाई तक की मूर्तियां लगनी ही चाहिए। इस पर राजनीति बंद होनी चाहिए। अस्पताल, स्कूल जैसी मूलभूत सुविधाएं अपनी जगह हैं, लेकिन पटेल की मूर्ति देख हर भारतीय का सीना फख्र से चौड़ा ही होगा। इस में किसी को भी राजनीति नहीं करना चाहिए।

इधर, पटियों पर चर्चा है... मायूस हो गए छोटे-बड़े नेता:
दक्षिण पश्चिम से कांग्रेस के एक नेताजी मायूस हैं। शुरुआत में वे टिकट की दौड़ में थे, लेकिन बाद में पिछड़ गए। नेताजी के साथ परिवार के ही छोटे नेताजी भी उदास हो गए। दोनों ने सोचा था कि टिकट किसी एक को जरूर मिलेगा। सर्वे और पैनल में तीसरा नाम सामने आने के बाद छोटे-बड़े नेताजी नाखुश दिख रहे हैं।

कार्यकर्ताओं का सता रहा डर:
गोविंदपुरा विधानसभा में कांग्रेस के नेताजी खुश हैं कि बाबूलाल गौर का टिकट कटता है और कांग्रेस से उनका टिकट फाइनल होता है तो सीट जीती जा सकती है। डर है तो अपनी ही पार्टी के कार्यकर्ताओं से जो डैमेज कर सकते हैं। कहीं वे पिछले चुनाव में कांग्रेस के कद्दावर उम्मीदवार की तरह ही हरा ना दें।

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