राइट टू वॉटर कार्यशाला : पानी की कमी के कारण युवा करेंगे पलायन, मुश्किल में आ जाएगी सरकार

राइट टू वॉटर कार्यशाला : पानी की कमी के कारण युवा करेंगे पलायन, मुश्किल में आ जाएगी सरकार

Amit Mishra | Publish: Jun, 25 2019 11:47:40 AM (IST) Bhopal, Bhopal, Madhya Pradesh, India

कार्यशाला : जलविद् राजेंद्र सिंह ने सरकार को खरी-खरी सुनाई

भोपाल। मिंटो हॉल में राइट टू वॉटर (right to water) को लेकर हुई कार्यशाला (Workshop) में जलविद् राजेंद्र सिंह (Rajendra singh ) ने सरकार (government) को खरी-खरी सुनाई। राजेंद्र सिंह ने कहा कि प्रदेश को पानीदार बनाने के लिए जनआंदोलन public movement चलाने की जरूरत है। राइट टू वॉटर कार्यशाला (right to water WORKSHOP ) में बोलते हुए राजेंद्र सिंह ने कहा कि कानून बनाने के पहले ठेकेदारों को दूर कर लोगों को इससे जोडऩा होगा।

जल संरक्षण ( water conservation )के लिए लोगों को जागरूक Aware करने के साथ उनको शिक्षित भी करना पड़ेगा। अकेले एमपी सरकार (mp government) के कहने से पानी नहीं बचेगा इसके लिए इंजीनियरों Engineersको वैज्ञानिकों scientists के साथ मिलकर पानी बचाने के लिए काम करना सीखना होगा।

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सरकार की ये मंशा
राजेंद्र सिंह ने कहा कि लोगों को लगना चाहिए कि ये एक्ट कोई सरकारी कार्यक्रम नहीं बल्कि उनके लिए बनाया गया है। सरकारों का कार्यकाल पांच साल का होता है, इसलिए इस तरह के आंदोलन सरकारी बनकर रह जाते हैं। पीएचई मंत्री सुखदेव पांसे ने राजेंद्र सिंह से कहा कि ये कार्यक्रम जन-जन तक पहुंचे यही सरकार की मंशा है।


सरकार मुश्किल में आ जाएगी
राजेंद्र सिंह ने कहा कि मध्यप्रदेश भगवान का लाड़ला बेटा है, इसलिए वो बिगड़ गया है, राजस्थान सौतेला बेटा है इसलिए वो बिगड़ नहीं पाया। पानी की यही स्थिति रही तो आने वाले पांच सालों में मध्यप्रदेश के लिए बड़ी मुसीबत आ जाएगी, पानी की कमी की वजह से युवा यहां से पलायन करेंगे और सरकार मुश्किल में आ जाएगी। इस स्थिति से बचने के लिए जनता को जोड़कर काम करने की जरूरत है।

शिक्षा से जोड़ा जाएगा जल संरक्षण
मंत्री पांसे ने कहा कि सरकार की मंशा लोगों को उनका सबसे बुनियादी अधिकार देने की है, इसलिए राइट टू वॉटर पर काम किया जा रहा है। जल संरक्षण के पाठ को स्कूल के सिलेबस में जोड़ा जाएगा, ताकि बच्चे शुरुआत से ही पानी बचाने के लिए अपनी जिम्मेदारी समझें।

 

पौधरोपण पर भी रहेगा फोकस
पांसे ने कहा कि ये सिर्फ सरकारी कर्मकांड नहीं है, बल्कि सबके साथ मिलकर पानी बचाने की मुहिम चलाई जाएगी। जो अधिकार जनता को पहले मिलना चाहिए था वो अब तक नहीं मिला है। पानी स्त्रोतों से अतिक्रमण हटाया जाएगा, पुराने तालाबों का जीर्णोद्धार किया जाएगा और पानी के नए स्त्रोत खोजे जाएंगे। सरकार का फोकस पौधरोपण पर भी रहेगा। पांसे ने कहा कि कार्यशाला में आए सभी जल विशेषज्ञों के सुझावों पर अध्ययन कर उन्हें कानून में शामिल किया जाएगा। जल संसद का आयोजन भी किया जाएगा।

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