scriptRights given to Panches and Sarpanches | सीएम की बड़ी घोषणा, पंचों-सरपंचों को फिर मिले ये अधिकार | Patrika News

सीएम की बड़ी घोषणा, पंचों-सरपंचों को फिर मिले ये अधिकार

पंचों और सरपंचों के साथ संवाद

भोपाल

Published: January 17, 2022 01:15:30 pm

भोपाल. मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने एक बार फिर पंचों—सरपंचों को गांव की सरकार चलाने की जिम्मेदारी दे दी है. पंचायतों के संचालन की प्रशासकीय समिति को अधिकार देने की ये घोषणा सीएम ने पंचों और सरपंचों के साथ संवाद में की. सीएम ने स्पष्ट कहा कि गांवों में विकास के कार्य नहीं रुकें, इसे ध्यान में रखते हुए यह फैसला किया गया है. गौरतलब है कि इससे पूर्व भी सरकार ने प्रशासकीय समिति को पंचायतों के संचालन का अधिकार दे दिया था पर कुछ ही दिनों में इसे वापस ले लिया गया था.

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प्रदेश में पंचायत चुनावों की घोषणा कर दी गई थी और इसी के साथ आचार संहिता लागू कर दी गई थी. ऐसे में पंच, सरपंचों के अधिकार खत्म कर दिए गए थे हालांकि बाद में पंचायत चुनाव निरस्त हो गए. अब पंचायत चुनाव कब होंगे, यह तय नहीं है. ऐसे में गांवों में विकास कार्य थम से गए थे. कोविड की तीसरी लहर को देखते हुए गांवों में शासकीय कार्य और गतिविधियां जारी रखने की जरूरत महसूस की जा रही थी.

यह भी पढ़ें : दूसरी लहर जैसा खतरनाक ट्रेंड, डॉक्टर्स ने सरकार को दी ये चेतावनी

panchayat.jpgसोमवार को सीएम शिवराजसिंह चौहान ने पंचों और सरपंचों से सीधा संवाद किया और प्रशासकीय समिति को पंचायतों के संचालन की जिम्मेदारी देने की घोषणा की. उन्होंने यह भी कहा कि इस संबंध में आदेश तुरंत जारी किए जा रहे हैं. सीएम ने मुख्य रूप से गांवों की राशन व्यवस्था, विकास कार्यों और कोविड गाइडलाइन के पालन करने की भी बात कही. उन्होंने चेताया कि भ्रष्टाचार की शिकायतें मिलने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी.
सीएम के संबोधन की मुख्य बातें
— जब तब चुनाव नहीं होंगे तब तक पूर्व पंचों और सरपंचों को ही पंचायत चलाने की जिम्मेदारी
— गांवों में कोविड संक्रमण पर नियंत्रण की अहम जिम्मेदारी
— सभी से गाइडलाइन का पालन करने को कहा
— 24 घंटे में कोरोना रिपोर्ट देने के निर्देश
— 23 हजार से ज्यादा पंचायतों का संचालन करेगी प्रशासकीय समितियां
— हर हाल में जरूरतमंदों को उपलब्ध कराएं राशन
— पीएम आवास योजना का उचित क्रियान्वयन करें
— संभव हो तो गांव में रोज एक पौधा रोपें
घोषणा के राजनैतिक निहितार्थ— प्रदेशभर के पूर्व पंच, सरपंच अपने अधिकार बहाल करने की मांग कर रहे थे. संगठनों ने राजधानी में प्रदर्शन करने की भी बात कही थी. राज्य सरकार पर दबाव था.

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