आरटीआईः साधारण आवेदन के दम पर लोग कर रहे संघर्ष

आरटीआई से तय किया आरटीई का सफर, निकाली जानकारी पाई विजयश्री, तो किसी ने मिटवाया गरीबी का दाग।

By: Hitendra Sharma

Published: 13 Oct 2021, 01:15 PM IST

भोपाल. वाजिव हक जरूर मिलता है, जरूरत है तो बस धेर्य के साथ संघर्ष की। भारतीय संसद ने प्रत्येक भारतीय को इस संघर्ष के लिए एक हथियार दिया है। नाम है सूचना का अधिकार (आरटीआई)। भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने, सरकारी कामकाज में पारदर्शित्ता लाने के लिए व 2005 में लागू किए गए इस अधिनियम के तहत जागरूक आम आदमी अपने अधिकार पा रहे है। प्रदेशभर में ऐसे कई रोचक मामले हैं जिनसे पता चलता है कि सूचना दबाने बाले अफसर-संस्थाओं को आरटीआई से मुंह की खानी पडी।

मजदूर पिता ने तीन साल लड़ी लड़ाई
सूरजगंज निवासी मजदूर अभिभावक दशरथ चोधरी ने अपने दो बच्चों की खातिर तीन साल तक आरटीआई के दम पर लाई लड़ी। इसके लिए उन्हें 400 से ज्यादा आवेदन देने पड़े थे। मामला शिक्षा के अधिकार के तहत दो बच्चों की पढ़ाई का है। पड़ाई निःशुल्क होने के बावजूद निजी स्कूल प्रबंधन ने पहली में पढ़ने बाली उनकी बेटी और केजी टू में पढ़ रहे चेटे की फीस के लिए दबाव बनाया। परीक्षा देने नहीं दी। उनको जातिगत रूप से अपमानित कर स्कूल से भगा दिया। ऐसे दशरथ ने आरटीआइ को हथियार बनाया और उनके अधिकारों की जीत हुईं। बच्चों को पढ़ाई से वंचित करने वाले स्कूल संचालक, उनके भाई सहित क्लास टीचर पर एफआईआर हुई। इसी साल स्कूल शिक्षा विभाग ने स्कूल की मान्यता रद्द करने का आदेश जारी कर दिया।

दीवार पर लिखवाया -मैं गरीब हूं फिर मिटवाया
सततनबाड़ा के कुछ गांव में सितबर 2017 को प्रशासन ने बीपीएल परिवारों के घर के बाहर लिखवा दिया मैं गरीब हूं। युवा अधिवक्ता अभय जैन की जेनिथ संस्था ने जानकारी निकलवाई कि यह किसके आदेश पर लिखा गया। पता चला कि जनपद पंचायत सीईओ गगन वाजपेयी ने लिखवाया था। बाद में लेखन को साफ करवाया गया। मामले में मानवाधिकार आयोग ने भी संज्ञान लिया।

रातोरात खनन, लगवाए हैंडपंप
गंगेव जनपद के नेवरिया, अमया गांव का मामला रोचक है। हरिजन बस्ती में पेपजल संकट को लेकर शिवानंद द्विवेदी ने पीएचई में आवेदन लगाया कि ग्रामीणों द्वारा पूर्व में हैडपंप की मांग पर क्या कार्रवाई हुईं। आनन-फानन में रात में ही बोरिंग करवाए गए। इसके बाद सूचना दी गई कि दोनों गांवों में हैंडपंप लग गए है।

सिंहस्थ क्षेत्र अतिक्रमण तोड़ने के आदेश
सिंहस्थ क्षेत्र में अवेध निमांण को लेकर समाजसेवी किशोर दग्धो ने वर्ष 2014 में जिला प्रशासन में आरटीआई लगाकर 281 अवैध निर्माणों की सूची निकाली। उन्होंने निर्माण हटाने की मांग की थी। जब अधिकारियों ने नहीं सुनी तो इंदौर हाईकोर्ट में जनहित याचिका लगाई हाईकोर्ट ने प्रशासन को अवैध निर्माण हटाने के आदेश दिए। तब मामूली कार्रवाई की गई। दग्धी बताते हैं कि उन्होंने एक बार फिर याचिका लगाई है कि 2016 से पहले हुए अतिक्रमण हटाने के आदेश जिला प्रशासन को दिए जाएं।

क्षतिपूर्ति के लिए पीएस पर लगाया एक रुपए का जुर्माना
नगर पालिका में जुड़ी जानकारी राशिद जमील ने आरटीआई के तहत मांगी थी। जब जानकारी नहीं दी गईं तो मामला राज्य सूचना आयोग पहुंचा। इसके बाद सूचना आयोग ने नगर पालिका सीएमओ इकमर अहमद को नोटिस जारी किया। इसके बाद भी सूचना नहीं दी गई। अंतत, सीएमओ इकरार अहमद पर दो मामलों में 25- 25 हजार का जुर्माना लगाया गया। वहीं सूचना आयोग के सामने समय की मांग रखने वाले नगरीय प्रशासन के तत्कालीन प्रमुख सचिव संजय दुबे को भी एक रुपए का जुर्माना क्षतिपूर्ति के रूप में लगाया गया। हालांकि यह राशि अभी तक नहीं दी गई।

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