एमपी में नसबंदी टारगेट पर बवाल, भाजपा बोली, ये इमरजेंसी पार्ट-2 है

बैक फुट पर आई सरकार, आदेश वापस, मिशन संचालक छवि भारद्वाज पर गिरी गाज, सरकार ने हटाते हुए मंत्रालय अटैच किया

भोपाल। राज्य में नसबंदी के टारगेट पर बवाल मचा है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की राज्य संचालक छवि भारद्वाज ने टारगेट पूरा नहीं करने वाले स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को वीआरएस दिए जाने का आदेश दिया। आदेश वायरल होते ही राजनीति गरमाई। भाजपा ने इसे इमरजेंसी पार्ट-2 कहते हुए सरकार को घेरा। वहीं कर्मचारी संगठन भी आदेश के विरोध में खड़े गए। बवाल मचने पर बैकफुट पर आई सरकार ने शाम होते-होते आदेश वापस ले लिया। वहीं डैमेज कंट्रोल करने के लिए सरकार ने आदेश जारी करने वाली राज्य संचालक छवि भारव्दाज को हटाते हुए मंत्रालय में ओएसडी बना दिया।

असल में पूरा मामला नसबंदी के टारगेट को लेकर है। हाल ही में इस टारगेट की समीक्षा की गई तो पता चला कि कई स्वास्थ्य कर्मचारी ऐसे हैं जो दिए गए पुरुष नसबंदी के टारगेट को पूरा ही कर पाए। इस पर मिशन की स्वास्थ्य संचालक ने नसबंदी का टारगेट पूरा न करने वाले कर्मचारियों के वेतन में कटौती और अनिवार्य सेवानिवृत्ति का आदेश दिया। मालूम हो राज्य में परिवार नियोजन कार्यक्रम में कर्मचारियों के लिए पांच से दस पुरुषों की नसबंदी कराना अनिवार्य किया गया है। इस संबंध में राज्य संचालक छवि के हस्ताक्षर से जारी आदेश में कहा गया कि टारगेट में पिछडऩे वाले कर्मचारियों पर 'नो वर्क, नो पे' के आधार पर वेतन न दिया जाए।

दरअसल, परिवार नियोजन अभियान के तहत हर साल जिलों को कुल आबादी के 0.6 फीसदी नसबंदी ऑपरेशन का टारगेट दिया जाता है। जबकि राज्य में मात्र 0.5 प्रतिशत पुरुषों द्वारा ही नसबंदी अपनाई जा रही है। इसीलिए विभाग के मैदानी अमले विशेषकर एमपीडब्ल्यू पर दबाव बनाए जाने के लिए यह आदेश दिया गया।

मांगे थे वीआरएस के प्रस्ताव -

मिशन संचालक छवि सभी कलेक्टर, कमिश्नरों और सीएमएचओ को पत्र लिखते हुए कहा था कि अक्रियाशील एमपीडब्ल्यू को अनिवार्य सेवानिवृत्ति किए जाने के प्रस्ताव भेजे जाएं। इसी आधार पर जिला कलेक्टरों ने भी आदेश जारी कर दिए। इसको लेकर विभाग में हड़कम्प मचा। कर्मचारी संगठन सरकार के आदेश के खिलाफ खड़े हो गए।

किसने क्या कहा -

मध्य प्रदेश में अघोषित आपातकाल है। क्या ये कांग्रेस का इमर्जेंसी पार्ट-2 है? एमपीएचडब्ल्यू के प्रयास में कमी हो तो सरकार कार्रवाई करे, लेकिन लक्ष्य पूरे नहीं होने पर वेतन रोकना और सेवानिवृत्त करने का निर्णय, तानाशाही है।
- शिवराज सिंह चौहान, पूर्व मुख्यमंत्री

किसी भी कर्मचारी को इस आधार पर वीआरएस नहीं दिया जाएगा कि उसने नसबंदी का लक्ष्य पूरा नहीं किया। आदेश की समीक्षा के बाद उसे निरस्त कर दिय गया है।

- तुलसी सिलावट, स्वास्थ्य मंत्री

कर्मचारी सिर्फ जागरूकता अभियान चला सकते हैं लेकिन किसी की जबरदस्ती नसबंदी नहीं कर सकते। ऐसे में वेतन वृद्धि रोकने और वीआरएस दिए जाने का निर्णय उचित नहीं है। पुरुष नसबंदी जैसे संवेदनशील मसले पर इस तरह की कार्यवाही तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ विरोध करता है।
- एलएन शर्मा, महामंत्री तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ

दीपेश अवस्थी Reporting
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