संविदा शिक्षक: कवायद ऐसी की चुनाव से पहले ही हो भर्ती!

Deepesh Tiwari

Publish: Sep, 16 2017 04:36:40 (IST)

Bhopal, Madhya Pradesh, India
संविदा शिक्षक: कवायद ऐसी की चुनाव से पहले ही हो भर्ती!

स्कूल शिक्षामंत्री विजय शाह और माध्यमिक शिक्षा मंडल के अध्यक्ष एसआर मोहंती के बीच पहले दौर की बैठक हो चुकी है।

भोपाल। 2018 में आ रहे विधानसभा चुनाव को देखते हुए प्रदेश भाजपा ने भी अपनी तैयारी शुरू कर दी है। माना जा रहा है कि इसी के चलते रूठों को मनाने और सरकार विरोधी लहर को कम करने के लिए अब रणनीतिक कवायद भी शुरू हो गईं हैं।

वहीं यह बात भी इन दिनों प्रदेश में कई जगह चर्चा का विषय बनी हुई है जिसमें कहा जा रहा है कि चुनावों में बढ़त बनाने के लिए एक बार फिर मप्र में अब हर साल संविदा शाला शिक्षक पात्रता परीक्षा की खबर को सुर्खियों में लाया गया है। वहीं विरोधियों का यह भी कहना है कि लोग इसे कोरी घोषणा ना कह पाएं इसलिए इसकी प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

इस संबंध में सूत्रों का कहना है कि स्कूल शिक्षामंत्री विजय शाह और मंडल के अध्यक्ष एसआर मोहंती के बीच पहले दौर की बैठक हो चुकी है। कहा जा रहा है कि अब यह परीक्षाएं माध्यमिक शिक्षा मंडल बोर्ड द्वारा कराई जाएंगी लेकिन अब तक सिर्फ प्रक्रिया शुरू की गई है। फैसला नहीं हुआ है।


वहीं यह भी माना जा रहा है किप्रक्रिया को जानबुझकर ऐसा कर दिया गया है, जिससे चुनाव के ठीक पहले ही भर्ती हो। जबकि कुछ जानकार इसमें 2018 के चुनावों को देखते हुए इसे  भाजपा का एक पैंतरा भर मान रहे हैं। उनके अनुसार इसी के चलते बैठकों का दौर जारी है और उम्मीद है कि आचार संहिता लागू होने तक कई बैठकें हो जाएंगी, ताकि लोगों को भरोसा हो जाए कि सरकार इस दिशा में काम कर रही है।

मध्यप्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के 43 हजार से ज्यादा पद खाली हैं। सरकार ने वर्ष 2011 के बाद से पात्रता परीक्षा नहीं कराई है। 2011 की परीक्षा में जो वेटिंग लिस्ट थी उससे भी रिक्त पदों की पूर्ति नहीं की गई। जबकि 2013 के चुनाव में ऐलान किया गया था कि परीक्षाएं हर साल कराई जाएंगी। अब जबकि बीएड/डीएड पास अभ्यर्थियों की भीड़ जमा हो गई है। परीक्षाएं ना होने से वो राज्य सरकार से नाराज चल रहे हैं तो 2018 में जीत के लिए यह नया आइडिया निकाला गया।

कहा जा रहा है कि जैसे केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा मंडल (सीबीएसई) टीचर एलिजिबिलटी टेस्ट (सीटीईटी) लेता है, ठीक वैसी ही व्यवस्था मंडल बनाएगा। हालांकि इसके नियम मंडल की परीक्षा को लेकर सहमति मिलने के बाद ही बनाए जाएंगे।

इधर, बच्चों को रेडियो से पढ़ा रही सरकार :-
सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी को देखते हुए सरकार कक्षा एक से आठ तक के स्कूली बच्चों को अंग्रेजी रेडियो से अंग्रेजी पढ़ा रही है। प्रदेश के आकाशवाणी केंद्र से इंग्लिश इज फन लेबल-1 कक्षा 1 और 2 के लिए सोमवार से शुक्रवार प्रतिदिन दोपहर 12 से 12.30 बजे तक, इंग्लिश इज फन लेबल-2 दोपहर 12.30 से दोपहर एक बजे तक कक्षा 3 से कक्षा 5 तक के छात्रों के लिए प्रत्येक सोमवार से बुधवार तक प्रसारित किया जा रहा है।

मध्यप्रदेश के स्कूलों में 50 हजार से ज्यादा शिक्षकों की कमी है और अंग्रेजी पढ़ाने वाले शिक्षकों की तो बहुत अधिक कमी है। सरकार ने भर्तियां भी नहीं की। उसका कहना है कि कि रेडियो के माध्यम से यदि बच्चे अंग्रेजी सीख सकते हैं तो इसमें कोई बुराई नहीं है।

वहीं जिन प्राइमरी और मिडिल स्कूलों में रेडियो नहीं हैं उन स्कूलों में तत्काल रेडियो भी खरीदे गए हैं। साथ ही शिक्षकों को भी रेडियो कार्यक्रम का महत्व बताने के लिए कहा गया है। जिससे वे रेडियो फेमिलियर हो सके। शिक्षकों का कहना है कि इस कार्यक्रम के कारगर परिणाम निकल और बच्चों को अंग्रेजी सीखने में मदद मिल रही है। सरकार का कहना है कि यदि ये प्रयोग कामयाब हुआ तो सरकार को विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की कमी से निजात मिल जाएगी क्योंकि अंग्रेजी के बाद दूसरे विषय भी इसी तरह सिखाए जा सकेंगे।

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