जानिये भाजपा की किस बात पर भड़के अजय यादव, ट्विट कर दिया ऐसा जवाब

Deepesh Tiwari

Publish: Sep, 17 2017 01:08:05 (IST) | Updated: Sep, 17 2017 01:21:14 (IST)

Bhopal, Madhya Pradesh, India
जानिये भाजपा की किस बात पर भड़के अजय यादव, ट्विट कर दिया ऐसा जवाब

मुख्यमंत्री शिवराज द्वारा ट्विटर पर दी गई यह बधाई कांग्रेस को रास नहीं आई। जिसके चलते एक बार फिर दोनों दलों ट्विटर पर आमने सामने आ गए हैं।

भोपाल। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज यानि रविवार को विश्वकर्मा जयंति व अपने 67वें जन्मदिन पर नर्मदा नदी पर बने सरदार सरोवर बांध का उद्घाटन कर दिया है। पिछले कई दशकों से तमाम विवादों में घिरे रहे सरदार सरोवर नर्मदा बांध परियोजना के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा लोकार्पण किए जाने पर मध्यप्रदेश समेत कई प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों ने बधाई दी।
मुख्यमंत्री शिवराज द्वारा ट्विटर पर दी गई यह बधाई कांग्रेस को रास नहीं आई। जिसके चलते एक बार फिर दोनों दलों ट्विटर पर आमने सामने आ गए हैं।
शिवराज के ट्विट पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव ने कहा मध्य प्रदेश की जनता डूब रही है, मर रही है, शिवराज को गुजरात की चिंता है। अगले वर्ष होने वाले प्रदेश के चुनावों को देखते हुए पिछले कुछ समय से लगातार दोनों दल कई मुद्दों पर एक दूसरे के सामने आ चुके हैं। इससे पहले भी निर्माण कार्यों में श्रेय लेने की कोशिशों के मामले में दोनों दल एक दूसरे पर हमला कर चुके हैं।

जानकारों की माने तो इस मुद्दे से जहां एक ओर कांग्रेस डूब क्षेत्र में आए लोगों को अपनी ओर खीचने का कोशिश कर रही है, वहीं भाजपा सरकार इसे तरक्की का मामला बताते हुए इससे प्रदेश की जनता के फायदों को गिनाने की कोशिश करते दिख रहे हैं।

पहले भी हो चुका है पूतला वॉर...
पूर्व में अशोकनगर में भाजपा द्वारा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया का पुतला जलाए जाने के विरोध में पुतला वार की शुरुआत करते हुए कांग्रेसियों ने को पीएम नरेन्द्र मोदी का पुतला फूंक दिया था। इस दौरान इंदिरा पार्क पर जमकर हंगामा हुआ। पुलिसकर्मियों ने पुतले में लगी आग को बुझाने का भरसक प्रयास किया, लेकिन वे सफल नहीं हो सके।
जानकारी के अनुसार कांग्रेस द्वारा इंदिरा पार्क पर किसानों के साथ हो रही बेरुखी और किसान क्रेडिट कार्ड से राशि न मिलने के विरोध में प्रदर्शन किया जा रहा था। 

इसी दौरान उन्होंने पीएम का पुतला भी दहन किया। इसका मुख्य कारण भाजपा द्वारा बार-बार सांसद का पुतला दहन किया जाना बताया गया। इस दौरान कांग्रेसियों ने बेवजह सांसद का पुतला दहन करने का आरोप भी लगाया और कहा कि यदि यही माहौल चलता रहा तो कांगे्रस द्वारा और ज्यादा पुतला दहन किए जाएंगे।

कांग्रेसियों ने पहले से ही सारी तैयारियां कर रखी थीं। पुलिस के हाथ पुतला न लगने देने और आग को बुझाने से रोकने के लिए कांगे्रसी एकजुट थे। चोरी-छिपे पुतला लाकर उसे आग के हवाले कर दिया गया। पुलिसकर्मी जहां कांग्रेस को पुतला जलाने से रोकने के लिए अपनी पूरी जान लगा रहे थे, वहीं कांग्रेसियों ने भी पुलिस को चारों ओर से घेर रखा था, ताकि वे जलते हुए पुतले पर पानी न डाल सकें। अंत में कांग्रेसी सफल हुए।

जानिए, सरदार सरोवर बांध की खास बातें :

— सरदार सरोवर बांध की नीव भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाला नेहरू ने 5 अप्रैल, 1961 में रखी थी। यह नर्मदा नदी पर बना 800 मीटर ऊंचा बांध है।
— सरदार सरोवर बांध दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बांध है। यूएस का ग्रांड कोली डेम दुनिया का सबसे बड़ा बांध है।
— बांध के 30 दरवाजे हैं। हर दरवाजे का वजन 450 टन है। हर दरवाजे को बंद करने में एक घंटे का समय लगता है।
— ये बांध अब तक 16,000 करोड़ की कमाई कर चुका है। जो इसके स्ट्रक्चर पर हुए खर्च से तकरीबन दोगुना है।
— सरदार सरोवर बांध की 4.73 मिलियन क्यूबिक पानी स्टोर करने की क्षमता है।

— सरदार सरोवर बांध को लेकर 1985 में जबरदस्त विरोध हुआ था। सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर की अगुवाई में डैम का निर्माण रोकने की कोशिश हुई थी।
— बांध की ऊंचाई 138 मीटर है। ये देश में बना सबसे ऊंचा बांध है।
— नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण ने 17 जून को बांध के 30 दरवाजे बंद किये थे। इसके बाद ये अभी तक बंद थे।

कहीं खुशी तो कहीं गम...
सरदार सरोवर बांध का का उद्देश्य गुजरात के सूखाग्रस्त इलाकों में पानी पहुंचाना और मध्य प्रदेश के लिए बिजली पैदा करना है। गुजरात में बांध के उद्घाटन को लेकर खुशी है तो वहीं मध्य प्रदेश मके कई इलाकों में शोक का माहौल बना हुआ है।
मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में लोग सरदार सरोवर बांध का विरोध कर रहे हैं। लोगों ने सिर मुंडवाते हुए प्रतीकात्मक शव रखकर सरकार का विरोध किया है।

वहीं सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर के साथ सैकड़ों लोग पानी में बैठकर विरोध कर रहे हैं। इनका कहना है कि सरदार सरोवर के 30 गेट खुलते ही, मध्य प्रदेश के अलीराजपुर, बड़वानी, धार, खारगोन जिलों के 192 गांवों, धर्मपुरी, महाराष्ट्र के 33 और गुजरात के 19 गांव इतिहास का हिस्सा बन जाएंगे। देश के शहरी इलाकों को रोशन करने, वहीं पानी भरने से हज़ारों लोगों के घर में हमेशा के लिये अंधेरा छा जाएगा।

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