राष्ट्रीय विमर्श ज्ञान-संगम सेमिनार में पहुंचे उच्च शिक्षा मंत्री पवैया

Deepesh Tiwari

Publish: Dec, 07 2017 11:52:13 (IST)

Bhopal, Madhya Pradesh, India
राष्ट्रीय विमर्श ज्ञान-संगम सेमिनार में पहुंचे उच्च शिक्षा मंत्री पवैया

जीवन दर्शन सेमिनार की व्याख्या पर आयोजित संगोष्ठी के लिए महाविद्यालयीन प्राध्यापकों को उच्च शिक्षा विभाग द्वारा जबरन भेजा गया।

भोपाल। मखानलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय द्वारा गुरुवार को भोपाल के प्रशासन अकादमी के स्वर्ण जंयती सभागार में ज्ञान परंपरा पर राष्ट्रीय विमर्श ज्ञान-संगम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में उच्च शिक्षा मंत्री जयभान सिंह पवैया शामिल हुए।

बता दें कि दो दिवसीय सेमिनार माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित किया जा रहा है। वहीं विवि के प्रध्यापकों का कहना है कि इस जीवन दर्शन सेमिनार की व्याख्या पर आयोजित संगोष्ठी के लिए महाविद्यालयीन प्राध्यापकों को उच्च शिक्षा विभाग द्वारा जबरन भेजा गया। इसके लिए उच्च शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव बी आर नायडू द्वारा 67 प्राध्यापकों को इस संगोष्ठी में भाग लेने की अनुमति दी है। जबकि इस हेतु इन प्राध्यापक ने सेमिनार में जाने के लिए आवेदन नहीं किया है।

अनियमितताओं को लेकर सुर्खियों में विश्वविद्यालय

मध्यप्रदेश के भोपाल में स्थित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय अक्सर विवादों में रहा है। नियुक्तियों और अनियमितताओं को लेकर सुर्खियों में रहने वाला विश्वविद्यालय इस बार सेमिनार में जबरन प्रध्यापकों को भेजने का मामला सामने आया है। इसके पहले स्टडी सेंटर खोलने को लेकर विवादों में था। विश्वविद्यालय पर नियमों को ताक पर रख कर देश-विदेश में 200 से ज्यादा स्टडी सेंटर खोलने के आरोप लगे हैं। ये सेंटर देश के अलावा भूटान और नेपाल में भी खोले गए हैं।

विश्वविद्यालय का गठन विधानसभा में पारित अधिनियम के तहत किया गया था। जिसका क्षेत्राधिकार राज्य के भीतर ही था। इससे साफ है कि विश्वविद्यालय केवल राज्य के अंदर ही स्टडी सेंटर खोल सकता था। यूजीसी की गाइडलाइन के मुताबिक भी विश्वविद्यालय केवल प्रदेश में ही अपने सेंटर खोलने के लिए पात्र है। लेकिन यूजीसी के नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए विश्वविद्यालय ने न केवल देश बल्कि विदेशों में भी अपने सेंटर खोल दिए हैं।

गौरतलब है कि विश्वविद्यालय मात्र 15 सौ वर्गफीट भवन और 25 हजार रुपए पंजीयन शुल्क लेकर पीजी कॉलेज चलाने की अनुमति दे रहा है। जबकि यूजीसी के मुताबिक कॉलेज संचालन के लिए 2 एकड़ जमीन और साढ़े पांच लाख रुपए पंजीयन शुल्क निर्धारित है। विश्वविद्यालय की अनियमितताओं को लेकर पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के रिटायर प्रोफेसर एलएस निगम ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर प्रदेश के बाहर और विदेशों में चल रहे सेंटर बंद करने की मांग की है।

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