सीरियल किलर के खुले राज: ड्राइवर-क्लीनर की हत्या कर, कोड वर्ड में सरगना को दी खबर

सीरियल किलर के खुले राज: ड्राइवर-क्लीनर की हत्या कर, कोड वर्ड में सरगना को दी खबर

KRISHNAKANT SHUKLA | Publish: Sep, 10 2018 11:20:05 AM (IST) Bhopal, Madhya Pradesh, India

सीरियल किलर के खुले राज: लूट की रकम से मंडीदीप में आरोपी खांबरा ने खरीदा है 30 लाख का मकान

भोपाल. सीरियल किलर आदेश खांबरा के गिरोह ने होशंगाबाद रोड ग्यारह मील पर वर्ष 2007 में पहली लूट की थी, जिसमें ट्रक चालक की हत्या नहीं की। कुछ दिन बाद राघौगढ़ में लूट को अंजाम देने ट्रक ड्राइवर-क्लीनर को ट्रक से रौंदकर हत्या कर दी। इसी बीच गिरोह के कुछ सदस्य पकड़े गए। सरगना ने आदेश समेत अन्य सदस्यों को ताकीद कि अब हर लूट के बाद ड्राइवर-क्लीनर को नशीली दवा देकर मौत के घाट उतार देना। यह दवा ग्वालियर और झांसी के लिंक से सरगना भेजता था।

आदेश खांबरा से पूछताछ में यह भी खुलासा हुआ है कि गिरोह का सरगना सदस्यों से कोड वर्ड में बात करता था। इसमें गिरफ्तार आरोपी और गिरोह के सदस्य जयकरण व तुकाराम ट्रक ड्राइवरों को फंसाने का काम करते थे। इसके बाद खांबरा को फोन पर कहते थे, भाई साहब कुछ मीठा लेकर आ जाओ। खांबरा मौके पर आता और नशीली दवा शराब, दूध या अन्य में पिला देता था।

बेहोश होने पर ड्राइवर-क्लीनर की गला घोंटकर हत्या कर देते थे। ट्रक लूटने के बाद ग्वालियर या झांसी के सरगना जिसे कोड वर्ड में ‘साहबजी’ कहते थे, उनसे बात होती थी। आका, खांबरा से कोड वर्ड में कहता था ‘कचरा साफ माल’ चाहिए। खांबरा बताता था कचरा साफ हो गया है। खांबरा ने लूट की रकम से हाल ही में मंडीदीप में 25-30 लाख रुपए का घर लिया है।

मोबाइल चार्जिंग के बहाने करते थे दोस्ती
एएसपी दिनेश कौशल ने बताया कि गिरोह में शामिल जयकरण व तुकाराम हाईवे, औद्योगिक इलाकों में खड़े ट्रक के ड्राइवर-क्लीनर से मोबाइल चार्ज के बहाने दोस्ती करते थे। वह खुद को ड्राइवर ही बताते थे। इस दौरान कहते थे कि उन्होंने अभी नया ट्रक खरीदा है, चलो पार्टी करते हैं। जैसे ही चालक तैयार होता जयकरण और तुकाराम आदेश खांबरा को फोन कर बुला लेते थे।

टेलरिंग का काम छोड़ बना सीरियल किलर
खांबरा को टेलरिंग के काम के दौरान अपराधिक प्रवृत्ति से जुड़े तीन-चार दोस्त मिले। उन्होंने लालच दिया साथ आ जाओ टेलरिंग से अधिक मुनाफा दिलाएंगे। खांबरा गिरोह में शामिल हो और लूटने लगा। मुनाफा देख उसे काम पसंद आया। अमरावती में वर्ष 2010 में हत्या करने के बाद पहली बार खांबरा पकड़ा गया। वह करीब 18 माह जेल की सजा काटकर आया।

अमरावती और ग्वालियर में पुलिस ने डाला डेरा
एसआईटी की टीमें अमरावती और ग्वालियर पहुंच गई हैं। अयोध्या नगर बिलखिरिया की तीसरी टीम को आरोपियों को उठाने ग्वालियर भेजा गया है। पुलिस को लूटा माल बरामद करना है। इसके लिए ग्वालियर के गोल पहाडिय़ा से बाबू और सुनील के घर पर छापा मारा है। बाबू फरार है जबकि सुनील को एसआईटी भोपाल लेकर आ गई है। उसका मोबाइल जब्त कर लिया, लेकिन माल को बिकवाने की पूरी जानकारी सरगना उर्फ साहबजी के पास है। वह फरार चल रहा है।

पत्नी के लिए वार्ड-4 से मांगा था टिकट
खांबरा का मंडीदीप थाने में कोई रेकॉर्ड नहीं है। वर्ष 2016 में मंडीदीप नगर पालिक चुनाव में आदेश ने पत्नी के लिए वार्ड 04 से कांग्रेस से टिकट की मांग की थी। जोर-शोर से चुनाव प्रचार भी शुरू कर दिया था, लेकिन टिकट नहीं मिला।

नेता का प्रॉपर्टी विवाद सुलझाने कर दी हत्या
खांबरा को फिलहाल मिसरोद थाने में रिमांड पर रखा गया है। उसके साथ महाराष्ट्र का तुकाराम भी है। आदेश ने देर रात पूछताछ में कबूल किया कि उसके कुछ नेताओं से नजदीकी रिश्ते हैं। उसने ऐसे कई नेताओं के प्रॉपर्टी विवाद सुलझाने के लिए लोगों की हत्या भी की है।

बेटे ने पत्रिका से कहा- पिता का स्वभाव पांच साल से हो गया था आक्रामक

पत्रिका टीम रविवार को आदेश खांबरा के मंडीदीप के वार्ड 04 विमान चौक में माता मंदिर के पास वाले घर में पहुंची। खांबरा का बड़ा बेटा शुभम मिला। उसने बताया कि दो साल से पिता परिवार से कम संपर्क रख रहा था। वह तीन महीने से घर नहीं आया। एक पैसा भी नहीं दिया।

कुछ दिन पहले फोन कर हमसे गाली-गालौज की। पिता सीरियल किलर है, सुनकर परिवार हैरान है। शुभम के अनुसार खांबरा का बैंक खाता नहीं है। चार-पांच साल से स्वभाव आक्रामक हो गया था। परिजनों से भी मारपीट करता था। मोहल्ले सहित शहर के लोग उसे अच्छे टेलर के रूप में जानते हैं। उनकी नजर में खांबरा बहुत ही शरीफ आदमी था।

बड़ा सवाल - चार बार पकड़ा, पुलिस रही लापरवाह

एएसपी दिनेश कौशल ने बताया कि आरोपी चार बार पकड़ा जा चुका है। दूसरे राज्य की पुलिस ने उससे कभी डिटेल मेें पूछताछ नहीं की। इसलिए वह हत्या के केस दबाकर बैठा रहा।

चार स्तर पर गिरोह करता था काम, खांबरा को मिलता था कमीशन
गिरोह चार स्तर पर काम करता था। पहले चैनल में ट्रक-ड्राइवर के साथ दोस्ती करने वाले सदस्य थे। दूसरे में सदस्यों के ट्रक ड्राइवर से दोस्ती के बाद बुलावे पर उनकी हत्या करने वाला एक्सपर्ट (जैसे खांबरा) था।

फिर एक्सपर्ट ट्रक को ठिकाने लगाने तीसरे चैनल के सदस्य से बात करता था। इसके बाद ट्रक खपाने चौथे चैनल को भेज दिया जाता था। खांबरा गिरोह में दूसरे चैनल का सदस्य है। उसे तीसरे चैनल से कमीशन मिलता था। इसका बड़ा हिस्सा वह पहले चैनल को बांट देता था। पुलिस तीसरे-चौथे चैनल तक नहीं पहुंची है।

एक ही कंपनी के ट्रक को निशाना बनाते थे
पुलिस को गिरोह ने पूछताछ में बताया कि वे टाटा कंपनी के ट्रकों को ही लूटते हैं। खांबरा के अनुसार ट्रक जिस जगह कबाड़ में काटे जाते हैं वहां टाटा की ही अधिक मांग है। टाटा के कलपुर्जे आसानी से कबाड़ी खपा देते हैं।

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