वर्षों से खाली पड़े प्लॉट पर भरा रहता है सीवेज का पानी, रहवासी डाल रहे कचरा

वर्षों से खाली पड़े प्लॉट पर भरा रहता है सीवेज का पानी, रहवासी डाल रहे कचरा
वर्षों से खाली पड़े प्लॉट पर भरा रहता है सीवेज का पानी, रहवासी डाल रहे कचरा

Rohit Prasad Verma | Publish: Oct, 09 2019 11:32:33 AM (IST) | Updated: Oct, 09 2019 11:32:34 AM (IST) Bhopal, Bhopal, Madhya Pradesh, India

ग्राउंड को कचरा नहीं छूना चाहिए, इसके बाद भी रोड पर पटक रहे

डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन को नगर निगम के जिम्मेदार लगा रहे पलीता

भोपाल. आगामी स्वच्छता सर्वेक्षण में कोलार क्षेत्र फिर से राजधानी को पीछे धकेल सकता है। इस क्षेत्र में कचरा और सीवेज अभी तक सबसे विकराल समस्या बनकर लोगों का जीना मुश्किल कर रहे हैं। शिकायत के बाद भी अधिकारियों का ध्यान इस ओर नहीं है। जनप्रतिनिधि भी खास सरोकार नहीं दिखा रहे हैं। गंदगी का मुख्य कारण खाली प्लॉट हैं, जो वर्षों से पड़े हैं और इनमें कचरा व सीवेज जमा हो गया है।

इससे आसपास के लोग परेशान हैं। वर्ष 2017 के सर्वे में राजधानी को देश के दूसरे सबसे स्वच्छ शहर का दर्जा मिला तो निगम अधिकारियों ने शहर को साफ समझ लिया और स्वच्छता की ओर गंभीरता से ध्यान देना ही बंद कर दिया। वर्ष 2017 के सर्वे में हासिल 1800 अंकों में 360 अंक जिस सॉलिड वेस्ट कलेक्शन एंड ट्रांसपोर्टेशन के लिए मिले थे, पर अब उसी को पलीता लगाया जा रहा है।

सॉलिड वेस्ट हैंडलिंग नियमों को नजरअंदाज किया जा रहा है। करोड़ों रुपए फूंके जाने के बाद भी जमीन पर कचरा फेंका जा रहा है। नियमों के तहत कचरा ग्राउंड को टच नहीं करना चाहिए, पर कंटेनर की जगह सड़कों खाली जमीन पर बिखरा पड़ा है।

 

निगम प्रतिवर्ष खर्च करता है 200 करोड़
भोपाल नगर निगम का वर्तमान क्षेत्रफल 648.24 वर्ग किलोमीटर है। निगम सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट पर प्रतिवर्ष 200 करोड़ खर्च करता है। 19 जोन में चार हेल्थ अफसर, 13 सहायक हेल्थ अफसर, हर वार्ड में एक स्वास्थ्य पर्यवेक्षक व 5330 सफाईकर्मी तैनात हैं। घरों से कचरा कलेक्शन में 1782 श्रमिक, 973 साइकिल रिक्शा व 190 ऑटो लगाए गए हैं। प्रतिदिन 800-900 मीट्रिक टन कचरा शहर से निकलता है, जो 227 वाहनों से भानपुर खंती पहुंचाया जाता है।

खाली प्लॉट बने हैं मुसीबत
कोलार क्षेत्र की मंदाकिनी कॉलोनी फेस-2, सर्वधर्म कॉलोनी के ए, बी, सी सेक्टर, बंजारी, दानिश कुंज, सौरभ नगर, वंदना नगर, राजहर्ष कॉलोनी, गेहूंखेड़ा, प्रियंका नगर समेत कई कॉलोनियों में पड़े खाली प्लॉट मुसीबत बने हुए हैं। इनमें कई फीट सीवेज भरा है, कचरे के अंबार लगे हैं। गंदगी और बदबू से लोगों का जीना मुश्किल हो गया है।

 

क्या कहता है नियम
सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट एंड हैंडलिंग रूल्स 2000 के तहत शहरी कचरे का निष्पादन इस तरह किया जाना चाहिए कि कचरा जमीन को टच न करे। जमीन पर कचरा डाले जाने से मृदा व भूगर्भ जल संक्रमित होगा। राजधानी में कई स्थानों पर अभी भी कचरा ओपन ग्राउंड पर पटक दिया जाता है। खाली प्लॉट पर जुर्माने के साथ राजसात किए जाने का प्रावधान भी म्यूनिसिपल एक्ट में है, पर निगम के अफसर कार्रवाई नहीं करते। इससे खाली प्लॉट वाले न निर्माण कराते हैं न ही सफाई।

70त्न क्षेत्रों से रोजाना डोर-टू-डोर कलेक्शन नहीं

राजधानी को स्वच्छ बनाने की दिशा में भोपाल नगर निगम लगातार प्रयास कर रहा है। कचरा और सीवेज की समस्या कोलार क्षेत्र में अधिक है। अमृत योजना के तहत वहां काम चल रहा है। इसके बाद समस्या नहीं रहेगी। कचरे का उचित तरीके से निष्पादन किया जा रहा है। जहां समस्या होगी, वहां दिखवाया जाएगा।
हरीश गुप्ता, उपायुक्त, नगर निगम

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