343 करोड़ रुपए के सीवेज नेवटर्क में टूटे-फूटे पाइप का उपयोग, कैसे होगा मजबूत?

343 करोड़ रुपए के सीवेज नेवटर्क में टूटे-फूटे पाइप का उपयोग, कैसे होगा मजबूत?

By: KRISHNAKANT SHUKLA

Published: 03 Jan 2020, 11:44 AM IST

भोपाल/ राजधानी में कोलार, कटारा हिल्स से लेकर तालाबों के किनारे सीवेज लाइन बिछाकर एक नेटवर्क बनाने का काम टूटे फूटे पाइप से किया जा रहा है। 343 करोड़ रुपए खर्च के साथ 30 से 40 साल की उपयोगिता की मजबूती के दावे इन टूटे, किनारों से खीरे हुए और जोड़ में पड़ी दरारों वाले पाइप को देखकर थोथे साबित हो रहे हैं। निगम के जिम्मेदार संबंधित एजेंसियों से इस मामले में चर्चा कर स्थिति ठीक कराने की बात कह रहे हैं, लेकिन हकीकत कोलार, सनखेड़ी रोड पर जाकर देखी जा सकती है।

यहां काम चल रहा है और आपको टूटे व जर्जर पाइप नजर आ जाएंगे। ये काम अंकिता कंस्ट्रक्शन कंपनी को दिया हुआ है। पूरे शहर में सीवेज नेटवर्क की डीपीआर में 900 करोड़ रुपए खर्च बताया था, इसलिए अमृत प्रोजेक्ट में टुकड़ों में केंद्र से मंजूरी कराई जा रही है, जिसमें तीन टुकड़ों में 343 करोड़ रुपए के काम को मंजूरी मिली। अभी 40 फीसदी काम हुआ है।

इतना बड़ा काम, लेकिन पाइप टूट रहे

- अमृत योजना के 343 करोड़ रुपए से सीवेज नेटवर्क का काम चल रहा
- बड़ा तालाब, कोलार समेत भोजवेट लैंड के तहत सीवेज नेटवर्क का रिनोवेशन करना है

- राज्य स्तरीय तकनीकी समिति ने फ रवरी 2017 में अमृत योजना में सीवेज संबंधी कामों के लिए 350 करोड़ रुपए के काम की स्वीकृति दी थी।
- कोलार क्षेत्र में 135 करोड़ रुपए से सीवेज नेटवर्क बिछाने का काम चल रहा है।

- कोलार से कटारा हिल्स के बीच पांच ट्रीटमेंट प्लांट के साथ ही कुल 138 किमी लंबा सीवेज नेटवर्क बिछाया जा रहा है।
- बड़ा तालाब में 27 गंदे नालों के जरिए करीब 20 एमएलडी सीवेज मिलता है। इसे रोकने के लिए 105 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं।

- भोजवेट लैंड , एबीडी प्रोजेक्ट के तहत शहर में शाहपुरा और छोटे तालाब में भोजवेट लैंड एरिया में बनाया गया। यहां सीवेज नेटवर्क के रिनोवशन के लिए 103 करोड़ रुपए का काम हो रहा है।


सीवेज की लाइन मजबूत होना चाहिए। पाइप के परिवहन में यदि कोई टूट फूट होती है तो लाइन में पूरी तरह से दुरूस्त पाइप ही उपयोग करें। ऐसा नहीं करने पर बाद में लीकेज की आशंका बनती है।

- अब्दुल मजीद, स्ट्रक्चरल इंजीनियर

हमने मॉनीटरिंग के लिए एजेंसी तय कर रखी है। हम इसका निरीक्षण करवा लेंगे। किसी भी तरह से कोई कमजोर काम नहीं होने दिया जाएगा।
- कमल सोलंकी, अपर आयुक्त

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