EXCLUSIVE: इस आर्किटेक्ट ने डिज़ाइन किया इंडियन आर्मी का पहला शौर्य स्मारक

    EXCLUSIVE: इस आर्किटेक्ट ने डिज़ाइन किया इंडियन आर्मी का पहला शौर्य स्मारक

शौर्य स्मारक की डिजाइन के बारे में शोना ने अनुभव साझा किया कि जब पता चला कि मप्र में एप्को वॉर मेमोरियल बनाने के लिए आर्किटेक्ट की तलाश में है तो खुद को आजमाने का आइडिया आया।

शैलेंद्र तिवारी @ भोपाल। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 14 अक्टूबर को मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में इंडियन आर्मी के जांबाज शहीद जवानों की याद में बने शौर्य स्मारक का उद्घाटन करने आ रहे हैं। ये शौर्य स्मारक वीर शहीदों की बहादुरी की सच्ची दास्तां बयां करता है। इसकी खूबसूरती वीर जवानों की गाथा कह रही है। ऐसे में बड़ा सवाल मन में आता है कि आखिर वो कौन सा दिमाग है, जिसमें इस शौर्य स्मारक को बनाने का ख्याल आया? या फिर ये कहें कि वो कौन दिमाग है, जिसमें इस स्मारक की खूबरसूत डिजाइन को तैयार किया गया? आइए हम बताते हैं वो कौन सा दिमाग है....



इनकी कलम से बना स्मारक का डिज़ाइन


'शूरवीरों की याद में कोई मेमोरियल नहीं बनाया है, बल्कि मंदिर बनाया है। शौर्य स्मारक ऐसा मंदिर है, जहां लोग सिर्फ फूल चढ़ाने नहीं आएं, बल्कि फौजियों के बलिदान को महसूस करें।' यह कहना है शौर्य स्मारक की आर्किटेक्ट यूसीजे आर्किटेक्चर एंड एनवायरमेंट की मुखिया शोना जैन का।  शौर्य स्मारक की खासियत यह रही कि इसे देश के दिल से बनाया गया है। शौर्य स्मारक की डिजाइन के बारे में शोना ने अनुभव साझा किया कि जब पता चला कि मप्र में एप्को वॉर मेमोरियल बनाने के लिए आर्किटेक्ट की तलाश में है तो खुद को आजमाने का आइडिया आया। एक थीम लेकर गए कि इसे स्मारक जैसा नहीं, मंदिर सरीखा बनाएंगे। आइडिया शानदार था तो काम मिल गया। 




सबसे बड़ी समस्या थी शुरुआत कहाँ से करें
शोना कहती हैं कि हम नहीं चाहते हैं कि कोई यहां पर सिर्फ फूल रखने के लिए आए। हम चाहते थे कि हर कोई जब यहां आए तो उसके मन में सेना के श्रद्धा पैदा हो। ठीक उसी तरह, जैसा मंदिर में पहला कदम रखते समय ईश्वर के प्रति भाव पैदा होता है। अब समस्या थी कि शुरुआत कहां से करें। फौजी के जीवन, युद्ध, मृत्यु और उसके बाद की आशाओं पर ध्यान केंद्रित किया। फिर ठीक वैसे काम का श्रीगणेश किया, जैसे मंदिर में गर्भ गृह होता है। बुनियाद रखी, और मिलकर काम शुरू कर दिया। अब स्मारक तामीर हो चुका है, देखिए और समझिए... बिल्कुल शहादत के मंदिर जैसा नजर आएगा। शौर्य स्तंभ गर्व का परिचायक है।







जानिए वो FACT, जिसके कारण ये स्मारक बनाया गया
कुछेक साल पहले की बात है...ठीक आठ साल पहले की। तारीख है 10 जुलाई 2008। मौका था भारतीय सेना के कर्नल मुशरान की जयंती पर संगोष्ठी। वैन्यू दिल्ली का इंडिया हैबिटेट सेंटर। वहां तत्कालीन चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ जनरल दीपक कपूर मौजूद थे। मुद्दा था, भारतीय सेना के प्रति युवा आकर्षित क्यों नहीं होते? सवाल के जवाब में जनरल दीपक कपूर बोले, आप लोग ही बताइए कि सेना को आम आदमी और युवाओं के बीच आकर्षण का मुद्दा बनाए रखने के लिए किया ही क्या है? जांबाज सैनिकों की शौर्य गाथाएं शहादत के वक्त तो याद रहती हैं, उसके बाद कितने लोग याद रखते हैं? क्यों नहीं सेना और सैनिकों की गाथा को आम आदमी के बीच में सहेजा जाता है? क्यों नहीं उनकी शहादत को अमर करने का प्रयास होता है? आर्मी चीफ के तमाम सवालों के जवाब में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ऐलान करते हैं कि मध्यप्रदेश जांबाज सैनिकों की याद में शौर्य स्मारक बनाएगा। वह ऐलान भोपाल में साक्षात तैयार है। और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 14 अक्टूबर को इसे देश को समर्पित करने आ रहे हैं।

Shaurya smarak

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सेना के लिए गौरवशाली 
दिल्ली में वॉर मेमोरियल की रूपरेखा के ऐतिहासिक घटनाक्रम का मैं भी साक्षी था। आयोजक विवेक तन्खा ने इसकी मांग रखी थी, जिसे थल सेना अध्यक्ष जनरल दीपक कपूर ने आगे बढ़ाया। आज जब स्मारक बनकर तैयार है, तो यह सेना के लिए गौरवशाली क्षण है।
- लेफ्टिनेंट जनरल मिलन नायडू, तत्कालीन उप थल सेना अध्यक्ष

Shaurya smarak

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