नरोत्तम को राकने शिवराज ने भार्गव को बनवाया नेताप्रतिपक्ष

एक तीर से दो निशान, कैलाश विजयवर्गीय और नरोत्तम को दी मात

 

By: harish divekar

Published: 07 Jan 2019, 10:07 PM IST

नेताप्रतिपक्ष की दौड़ में सबसे आगे चल रहे विधायक नरोत्तम मिश्रा को रोकने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की लॉबी ने गोपाल भार्गव पर सहमति देकर उन्हें नेताप्रतिपक्ष बनवा दिया।

शिवराज के इस कदम से माना जा रहा है कि उन्होंने एक तीर से दो निशान लगाते हुए नरोत्तम के साथ भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय को भी मात दी है।

विजयवर्गीय नरोत्तम के लिए लॉबिंग कर रहे थे।

शिवराज सिंह ने भार्गव को नेताप्रतिपक्ष बनवाकर यह संदेश दिया है कि प्रदेश की राजनीति में वही होगा जो वे चाहेंगे। हालांकि शिवराज पहले खुद नेताप्रतिपक्ष बनना चाहते थे, लेकिन हाईकमान ने पूर्व मुख्यमंत्रियों को नेताप्रतिपक्ष नहीं बनाने को कहा।

इसके बाद शिवराज ने अपने कटटर समर्थक राजेन्द्र शुक्ला एवं भूपेन्द्र सिंह का नाम आगे बढ़ाया, लेकिन इस पर भी बात नहीं बनी।

मामला बिगड़ता देख शिवराज ने अंतत: भार्गव के नाम पर सहमति दे दी।

 

सुम़ित्रा का साथ मिलने से बनी बात
गोपाल भार्गव को नेताप्रतिपक्ष चुनने के लिए लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने भी शिवराज सिंह का साथ दिया। दरअसल सुमित्रा महाजन भी कैलाश विजयवर्गीय को प्रदेश की राजनीति में हावी नहीं होने देना चाहती थीं, इसलिए उन्होंने भार्गव के नाम पर सहमति जताई। इधर शिवराज समर्थक विधायक भी खुलकर भार्गव के पक्ष में आ गए।

विनय ने की विधायकों से राशुमारी-
प्रदेश प्रभारी और नेता प्रतिपक्ष चयन प्रक्रिया के पर्यवेक्षक डॉ. विनय सहस्त्रबुद्धे सोमवार दोपहर भोपाल पहुंच गए थे। उन्होंने प्रदेश भाजपा कार्यालय में पार्टी विधायकों से दिन भर नेता प्रतिपक्ष के लिए रायशुमारी की।

चूंकि अधिकांश विधायक शिवराज समर्थ हैं। उन्होंने शिवराज के पक्ष में खड़े गोपाल भार्गव का नाम लिया। विधायक दल की बैठक के पहले प्रदेश कार्यालय में पार्टी के आला नेताओं के बीच मंत्रणा हुई सहस्त्रबुद्धे ने बताया कि रायशुमारी में भी विधायकों ने भार्गव का नाम लिया है।

 

दोहराई गई प्रदेश अध्यक्ष की कहानी-
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के चयन में भी दो नेताओं की पंसद के बीच तीसरा नाम निकल कर सामने आया था। तब शिवराज ने भूपेंद्र सिंह और राजेंद्र शुक्ला के नाम आगे किए थे तो दूसरा गुट नरोत्तम मिश्रा पर अड़ा था। अंतिम वक्त पर राकेश सिंह के नाम पर सहमति बन पाई थी।


13 साल बाद प्रदेश कार्यालय में विधायक दल की बैठक-
28 नवंबर 2005 को प्रदेश भाजपा कार्यालय में आखरी बार विधायक दल की बैठक हुई थी। इस बैठक में शिवराज सिंह चौहान को मुख्यमंत्री चुना गया था। उसके बाद से हर बार विधायक दल की बैठक सीएम हाउस में होती रही। 13 साल बाद यह यह अवसर था जब विधायक दल की बेैठक प्रदेेश भाजपा कार्यायल में हुई।

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