शिवराज सिंह चौहान बने BJP के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष

शिवराज सिंह चौहान बने BJP के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष

Deepesh Tiwari | Publish: Jan, 11 2019 12:58:18 AM (IST) Bhopal, Bhopal, Madhya Pradesh, India

रमन सिंह और वसुंधरा राजे सिंधिया को भी मिली पार्टी में नई जिम्मेदारी...

भोपाल। विधानसभा चुनाव 2018 में मिली भाजपा को शिकस्त के बाद अब राष्ट्रीय स्तर से तीनों प्रदेश के मुख्यमंत्रियों को नई जिम्मेदारी दी गई है। सूत्रों के अनुसार लगातार विरोध का शिकार हो रहे और कई तरह की उठ रही मांगों के बीच शिवराज सिंह को पार्टी ने नई जिम्मेदारी देते हुए प्रदेश की राजनीति से निकाल कर राष्ट्रीय स्तर पर ला दिया है।

दरअसल सामने आ रही जानकारी के अनुसार भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के अध्यक्ष अमित शाह ने पिछले महीने सत्ता गंवाने वाले अपने 3 मुख्यमंत्रियों को नई जिम्मेदारी देते हुए पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नियुक्त किया है। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह ने ट्वीट के जरिए जानकारी देते हुए बताया कि शिवराज सिंह चौहान, रमन सिंह और वसुंधरा राजे सिंधिया को पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नियुक्त किया है।

इससे पहले राजस्थान में वसुंधरा राजे के अलावा 13 साल से मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे शिवराज सिंह चौहान और 15 साल से छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रहे रमन सिंह एक महीने पहले दिसंबर में अपने-अपने राज्यों की सत्ता गंवा बैठे थे। अब लोकसभा चुनाव से करीब 2-3 महीने पहले बीजेपी ने इन तीनों बड़े नेताओं को केंद्र में लाने का फैसला लेते हुए पार्टी का उपाध्यक्ष नियुक्त कर दिया।


नेता प्रतिपक्ष को लेकर भी चला था नाम...
वहीं इससे पहले पूर्व सीएम शिवराज सिंह का नाम नेता प्रतिपक्ष को लेकर भी जोर शोर से चला था, लेकिन उन्होंने चयन से पहले ही इस पद के लिए इनकार कर दिया था। जिसके बाद गोपाल भार्गव को मध्यप्रदेश में नेता प्रतिपक्ष चुना गया।

शिवराज का विरोध...
वहीं इससे पहले पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद रघुनंदन शर्मा के निशाने पर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान रहे। इस दौरान शर्मा ने एक बार फिर शिवराज को नसीहत देते हुए, ऐसी बात कह दी है कि पार्टी में हडकंप मच गया है।

दरअसल पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान को कुछ समय के लिए सन्यास की नसीहत देते हुए शर्मा ने कहा था कि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज को पांच-दस साल तक कोई पद नहीं लेना चाहिए और न ही कोई चुनाव लड़ना चाहिए।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में उनके नेतृत्व में पार्टी हार गई है तो अब उन्हें संयम में रहना चाहिए और अब साधारण विधायक की तरह रहना चाहिए। साथ ही पार्टी के पैसे या अपने पैसे से वायुयान जैसी सुविधाओं का इस्तेमाल भी नहीं करना चाहिए।

यहां रघुनंदन शर्मा ने पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह का उदाहरण देते हुए कहा कि 2003 में कांग्रेस की हार के बाद दिग्विजय ने दस साल तक कोई पद नहीं लिया और पार्टी के लिए लगातार काम किया। इसी तरह शिवराज सिंह चौहान को भी भाजपा कार्यकर्ताओं के सामने ऐसा ही आदर्श पेश करना चाहिए।

ज्ञात हो कि विधानसभा चुनाव के नतीजे आने से पहले शर्मा ने कहा था कि अगर पार्टी जीतती है तो इसके जिम्मेदार भी शिवराज होंगे। और यदि हारती है तो भी उनकी ही जिम्मेदारी होगी।

 

शिवराज को थी राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने की मांग!...
दरअसल लोकसभा चुनाव 2019 से पहले पांच राज्यों में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा है। इसके बाद से भाजपा आलाकमान को कई तरीकों से नसीहतें मिल रही है। वहीं पूर्व केंद्रीय मंत्री संघप्रिय गौतम का जो पत्र मीडिया में सामने आया है उसमें कहा गया है कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को राज्यसभा में और मेहनत करनी चाहिए।

इसी कड़ी में राजनीति से किनारे चल रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं भाजपा नेता संघप्रिय गौतम के बयान के बाद परिवर्तन की चर्चाएं तेज हो गई हैं। गौतम ने इस संबंध में एक पत्र भी लिखा है। गौतम ने कहा है कि बीजेपी को 2019 में सत्ता में वापसी के लिए अपने कामकाज में परिवर्तन करना चाहिए। गौतम के मुताबिक बीजेपी जरूरी मुद्दों को भूलकर धार्मिक मुद्दों को भुनाने में लगी है।


अब नहीं चल रहा मोदी का जादू...
गौतम ने अपने पत्र में कहा है कि लोकसभा 2019 में बीजेपी की वापसी मुश्किलें नजर आ रही है। हाल ही में पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की जोड़ी का जादू नजर नहीं आया। गौतम ने कहा कि पार्टी को चाहिए कि वे मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाएं और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को देश का उप प्रधानमंत्री बनाएं।

गौतम ने यह भी कहा कि गृहमंत्री राजनाथ सिंह को उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाकर योगी आदित्यनाथ को धार्मिक कार्यों में लगाया जाना चाहिए।

ये भी कहा गौतम ने...
गौतम ने योजना आयोग का नाम बदलने, cbi व rbi के कार्यों में सरकार के हस्तक्षेप और उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाने के फैसलों पर BJP सरकार की निंदा की।

- गौतम ने गोवा और मणिपुर में जोड़-तोड़ कर सरकार बनाने के फैसले को भी निंदनीय बताया।
- भाजपा की केंद्र सरकार युवाओं, किसानों और जनता से किए वायदे पूरे करने में विफल साबित हुई है।

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