Stree से ज्यादा डरावनी है इसकी असली कहानी, जानिए कैसे मर्दों को शिकार बनाती थी भूतनी ?

Stree से ज्यादा डरावनी है इसकी असली कहानी, जानिए कैसे मर्दों को शिकार बनाती थी भूतनी ?

Astha Awasthi | Publish: Sep, 06 2018 02:12:46 PM (IST) | Updated: Sep, 06 2018 02:38:14 PM (IST) Bhopal, Madhya Pradesh, India

Stree से ज्यादा डरावनी है इसकी असली कहानी, जानिए कैसे मर्दों को शिकार बनाती थी भूतनी ?

भोपाल। बीते दिनों रिलीज हुई फिल्म 'स्त्री' लोगों को खूब पसंद आ रही है। राजकुमार राव, श्रद्धा कपूर और पंकज त्रिपाठी जैसे कलाकारों की ये फिल्म लोगों को हंसाने के साथ ही साथ खूब डरा भी रही है। इस बात को तो नकारा नहीं जा सकता है कि भूत-प्रेत की बात पर कोई यकीन नहीं करता है लेकिन कुछ चीजें कभी-कभी ऐसी घटित हो जाती है जिन पर लोगों को न चाहते हुए भी विश्वास करना ही पड़ता है। ये चीजें आपको यकीन करने के लिए मजबूर कर देती हैं। फिल्म स्त्री (‘Stree movie’) की कहानी भी सच्ची कहानी पर आधारित है। ये देश के कुछ हिस्सों में प्रचलित एक अवधारणा पर आधारित है।

Stree movie

भोपाल, रायसेन और चंदेरी में हुई शूटिंग

बता दें कि फिल्म के गानों को छोड़कर फिल्म की पूरी शूटिंग मध्य प्रदेश के भोपाल, रायसेन और चंदेरी में हुई है। ‘Stree movie’ की कहानी है मध्यप्रदेश के एक शहर चंदेरी की। आपको बता दें कि मध्य प्रदेश का ऐतिहासिक शहर चंदेरी मालवा और बुंदेलखंड की सीमा पर बसा है। इस शहर का इतिहास 11वीं सदी से जुड़ा है, जब यह मध्य भारत का एक प्रमुख व्यापार केंद्र था। फिल्म के गांव के सभी सीन को चंदेरी में शूट किया गया है। वहीं जगह-जगह पर रयसेन के किले भी फिल्म में देखने को मिलते है। पूरी फिल्म में जितने भी डरावने सीन की शूटिंग की गई है वे सभी भोपाल के ताजमहल फोर्ट के हैं। यहीं पर फिल्म की शूटिंग की गई है।

stree

ये है ‘Stree movie’ की कहानी

फिल्म की कहानी में यहां पर एक स्त्री की आत्मा है, जो किसी वजह से मर्दों को अपने साथ ले जाती है और मर्द के कपड़ों को उतारकर फेंक देती है। फिल्म में विक्की (राजकुमार राव) मध्यप्रदेश के एक छोटे से कस्बे चंदेरी में एक टेलर है। चंदेरी में साल के चार दिन पूजा होती है। माना जाता है कि उन दिनों में स्त्री लोगों को अपना शिकार बनाती है, इसलिए इन दिनों वहां के लोग खासे सावधान रहते हैं।

एक दिन उसकी मुलाकात एक अंजान स्त्री (श्रद्धा कपूर) से होती है। विक्की अपने दोस्तों बिट्टू (अपारशक्ति खुराना) और जना (अभिषेक बनर्जी) को उसके बारे में बताता है। विक्की उस लड़की से कई बार मिलता है। इसी बीच विक्की का कोई दोस्त और दूसरा दोस्त जना एक के बाद एक करके स्त्री के शिकार बन जाते हैं। तब बिट्टू विक्की को स्त्री की अजीब हरकतों के बारे में समझाता है, तो वे रुद्रा (पंकज त्रिपाठी) की शरण में जाते हैं, जो उन्हें स्त्री की सच्चाई से परिचित कराता है। विक्की और उसके साथी स्त्री से कैसे छुटकारा पाते हैं इसके लिए आप फिल्म देखें।

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ये है स्त्री की डरावनी असली कहानी

ऐसा माना जाता है कि 1990 की बात है कर्नाटक की राजधानी में बेंगलुरु में एक अंधविश्वास फैल गया था। इस अंध विश्वास के मुताबिक रात के समय शहर की गलियों में एक भूतनी घूमती थी। ये भूतनी मर्दों को अपना शिकार बनाती थी। कहानी ऐसी भी है कि ये भूतनी घर के बाहर से मर्दों को आवाज लगाती थी। वो आवाज वैसी ही निकालती थी जैसी घर में उस मर्द की पत्नी , बहन या मां की होती थी। मर्द आवाज सुनकर जैसे ही बाहर जाते थे भूतनी उसे चौबीस घेटं के अंदर मार देती थी। ऐसा भी माना जाता था कि कुछ खास दिनों में कोई रूह स्त्री का रूप धर कर घर के मर्द का नाम लेकर दरवाजे पर दस्तक देती है और अगर कोई पुरुष दरवाजा खोल देता है, तो वह उसे अपने साथ ले जाती है। बाहर बस उसके कपड़े पड़े रह जाते हैं।

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मर्दों ने निकलना कर दिया था बंद

कर्नाटक में ये बात आग की तरह फैल चुकी थी। इस घटना के बाद से घर के मर्दों ने रात के समय घर से बाहर निकलना बंद कर दिया था। वहां के लोगों ने इससे बचने के लिए एक तरीका निकाला। ये तरीका था नालबा यानि कि कलाना, लोगों ने घर के बाहर नालबा लिखना शुरू कर दिया। ऐसा माना जाता था कि ये लिखने से भूतनी भाग जाती थी। आज तक इस बात का खुलासा तो नहीं हो पाया है कि क्या सच है और क्या झूठ लेकिन वहां पर आज भी 1 अप्रेल को नालबा डे बनाया जाता है। ये थी फिल्म स्त्री की असली कहानी।

stree 2018

चंदेरी क्यों है प्रसिध्द

चंदेरी मध्य प्रदेश के अशोक नगर जिले में स्थित एक ऐतिहासिक नगर है। बुन्देलों और मालवा के सुल्तानों की बनवाई कई इमारतें यहां देखी जा सकती है। इसका उल्लेख महाभारत में भी मिलता है। चंदेरी बुन्देलखंडी शैली की साड़ियों के लिए काफी प्रसिद्ध है। पारंपरिक हस्तनिर्मित साड़ियों का यह एक प्रसिद्ध केंद्र है। चंदेरी पर गुप्त, प्रतिहार, गुलाम, तुगलक, खिलजी, अफगान, गौरी, राजपूत और सिंधिया वंश ने शासन किया है। राणा सांगा ने चंदेरी को महमूद खिलजी से जीता था। जब सभी प्रदेशों पर मुगल शासक बाबर का आधिपत्य था तो 1527 में एक राजपूत सरदार ने चंदेरी पर अपनी पताका लहराई।

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