आजादी के बाद से बच्चों के भविष्य से खेलती रहीं सरकारें - आर्य

देश में 59 हजार करोड़ रुपये से 4 करोड़ बच्चों को मिलेगी छात्रवृत्ति, अभी तक 60 लाख बच्चों को मिलती थी स्कॉलरशिप।

By: Hitendra Sharma

Published: 02 Jan 2021, 04:28 PM IST

भोपाल. अनुसूचित जाति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालसिंह आर्य ने कांग्रेस की तत्कालीन सरकारों पर आरोप लगाते हुए कहा है कि आजादी के बाद से अनुसूचित जाति के बच्चों के भविष्य से खेलती रही हैं। देश में 1944 में अनुसूचित जाति वर्ग के पोस्टमैट्रिक छात्रों के लिए छात्रवृत्ति शुरू की गई थी। इसके बाद देश में 57 साल और मध्यप्रदेश में 45 सालों तक कांग्रेस की सरकारें रहीं। आर्थिक तंगी और असुविधाओं के कारण अनुसूचित जाति के करोड़ों बच्चों ने पढ़ाई-लिखाई छोड़ दी, लेकिन सरकारों ने इस बात की फिक्र नहीं की।

आर्य ने कहा कि कांग्रेस सालों तक अनुसूचित जाति वर्ग के बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ करती रही है। अब अनुसूचित जाति के बच्चों के लिए पोस्टमैट्रिक छात्रवृत्ति को सरकार ने 1100 करोड़ से बढ़ाकर 59 हजार करोड़ किया है। और इसका श्रेय देश के प्रधानमंत्री मोदी और उनकी सरकार को जाता है। अब इस वर्ग के बच्चों का भविष्य संवरेगा और उनका जीवन बेहतर होगा। लालसिंह आर्य ने कहा कि 1944 के बाद कभी किसी सरकार ने पोस्टमैट्रिक छात्रवृत्ति बढ़ाने या अजा वर्ग के बच्चों को सुविधाएं देने के बारे में नहीं सोचा। देश में पहली बार मोदी सरकार ने इस बारे में सोचा ।

छात्रवृत्ति में हर साल बढ़ेगा केंद्र सरकार का हिस्सा
वर्तमान में अनुसूचित जाति वर्ग के 60 लाख बच्चों को यह स्कॉलरशिप मिलती है, लेकिन अब बजट बढ़ने से इस वर्ग के 4 करोड़ बच्चों को छात्रवृत्ति के दायरे में आएगी। उन्होंने कहा कि इसके अलावा सरकार बीते वर्षों में स्कूल छोड़ने वाले 1.36 करोड़ बच्चों को वापस स्कूल लाने के लिए भी घर-घर संपर्क अभियान चलाएगी।

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केंद्र सरकार 59 हजार करोड़ की छात्रवृत्ति में अगले पांच सालों तक अपने हिस्से में 5% की वृद्धि करेगी, राज्यों का योगदान घटता जाएगा। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार इस पूरी प्रक्रिया की लगातार मॉनीटरिंग भी होगी, ताकि अजा वर्ग का कोई और बच्चा छात्रवृत्ति न मिलने या देर से मिलने के कारण पढ़ाई छोड़ने पर विवश न हो। 59 हजार करोड़ की पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति का 60 फीसदी हिस्सा केंद्र सरकार और 40 फीसदी हिस्सा राज्य सरकारों को देना होगा। राज्य सरकार पहले बच्चों का रजिस्ट्रेशन करेगी और अपने हिस्से की रकम बच्चों के खातों में डालेगी, जिसके बाद केंद्र सरकार अपने हिस्से की राशि बच्चों के खातों में जमा कराएगी।

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