6 लेन एक्सप्रेस वे से मिनी मुंबई की दूरी होगी कम, मुख्यमंत्री ने दिया ये निर्देश

6 लेन एक्सप्रेस वे से मिनी मुंबई की दूरी होगी कम, मुख्यमंत्री ने दिया ये निर्देश

KRISHNAKANT SHUKLA | Updated: 12 Jun 2019, 02:58:41 PM (IST) Bhopal, Bhopal, Madhya Pradesh, India

भोपाल इंदौर के बीच बनेगा 6 लेन एक्सप्रेस वे, कमलनाथ ने की पीडब्ल्यूडी और एमपीआरडीसी की समीक्षा
भोपाल कलेक्टर रहे सुदाम खाड़े को बनाया भू-अर्जन अधिकारी

भोपाल. मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मंगलवार को अफसरों से पूछा कि भोपाल-इंदौर एक्सप्रेस-वे मध्यप्रदेश का ड्रीम प्रोजेक्ट है तो इसके लिए भू-अर्जन की टाइम लिमिट मार्च 2020 क्यों रखी है। इसे दिसंबर 2019 तक छह महीने में पूरा करें। प्रयास हो कि हर हाल में एक्सप्रेस-वे जुलाई 2023 तक तैयार हो जाए।

कलेक्टर रहे सुदाम खाड़े को बनाया भू-अर्जन अधिकारी

लोक निर्माण विभाग और मध्यप्रदेश सडक़ विकास निगम की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भूमि अर्जन के लिए सीनियर आइएएस और वन एवं पर्यावरणीय स्वीकृति के लिए आइएफएस को जिम्मेदारी दी जाए। इसके बाद हाल ही में भोपाल कलेक्टर से हटाए गए एमपीआरडीसी के प्रबंधक सुदाम खाड़ को एक्सप्रेस-वे के लिए भूमि अर्जन करने की जिम्मेदारी दी गई। वन विभाग से एक आइएफएस प्रतिनियुक्ति पर लेने को कहा गया।

बनाए जा सकते हैं हब

मुख्यमंत्री ने कहा, भोपाल और इंदौर (मिनी मुंबई) के बीच कमर्शियल एक्टिविटीज और इंडस्ट्रीयल हब का बनाया जा सकता है। दोनों की जमीन को डेवलप कर इससे अच्छा रेवेन्यू मिल सकता है। उन्होंने विभाग के काम-काज पर प्रश्नचिन्ह लगाते हुए कहा कि पहले आप लोग यह तय कर लें कि कौन सी सडक़ें पीडब्ल्यूडी बनाएगा और कौन सी एमपीआरडीसी। उन्होंने कहा, एक ऐसी नीति तैयार करें, जिससे हर एजेंसी को कार्यक्षेत्र और दायित्व पता हो। वर्तमान में कई सडक़ों का निर्माण और मेंटेनेंस इसलिए नहीं हो पाता है, क्योंकि एक विभाग दूसरे विभाग को जिम्मेदार ठहराता है।

सेल्फ फाइनेंस का प्रोजेक्ट बनाएं

मुख्यमंत्री ने कहा कि विभाग को अपने स्वयं के आय के स्त्रोत भी विकसित करना चाहिए। हर बार सडक़ के लिए बजट न मांगे। कुछ ऐसा सेल्फ फाइनेंस प्रोजेक्ट बनाएं, जिससे सडक़ें बनाई जा सकें। उन्होंने बताया कि जहां नई सडक़े बन रही हैं, वहां की जमीनों के भाव बढेंग़े, ऐसे में वहां कमर्शियल एक्टिविटिज तैयार कर रेवेन्यू मॉडल विकसित किया जा सकता है। शहरों के आसपास बड़े पैमाने पर रिंग रोड और बायपास सडक़ें बनाई जाएं। इसे मास्टर प्लान में भी शामिल करें, ताकि आवागमन सुगम हो।

पौधरोपण भी कराएं मुख्यमंत्री ने कहा, सडक़ निर्माण की डीपीआर में सडक़ों के दोनों ओर पौधरोपण के प्रोजेक्ट को शामिल करें। इससे पर्यावरण में सुधार आएगा। साथ ही दोनों तरफ हरियाली और सुंदरता दिखेगी। इसके लिए प्रोजेक्ट में ही प्रावधान किया जाना चाहिए।

एक्सप्रेस-वे प्रोजेक्ट पर एक नजर

- भोपाल से इंदौर (मिनी मुंबई) तक 6 लेन के लिए 1029 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण।
- ये एक्सप्रेस वे मंडीदीप से सीहोर होता हुआ आष्टा से इंदौर पहुंचेगा।
- भोपाल और इंदौर के बीच सात स्थानों पर एक्सप्रेस-वे में प्रवेश और निकास के लिए रोड कनेक्ट होंगी।
- भूमि अधिग्रहण की अनुमानित लागत 514 करोड़ रुपए है।
- वन भूमि डायवर्सन अनुमानित लागत 18 करोड़ रुपए है।
- एक्सप्रेस -वे के निर्माण की अनुमानित लागत - 2500 करोड़ यह राशि केन्द्र सरकार भारत माला प्रोजेक्ट में राज्य सरकार को देगी।

यह होगी प्रस्तावित टाइम लिमिट

- दिसंबर 2019 तक भूमि अधिग्रहण प्रस्तावित।
- मार्च 2020 तक एनएचएआई एक्सप्रेस-वे के टेंडर जारी करेगी
- जून 2020 तक सडक़ निर्माण एजेंसी फाइनल होगी।
- जुलाई 2023 तक एक्सप्रेस-वे बनकर होगा तैयार।

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