नागरिकों की भागीदारी के साथ बदल सकते हैं स्मार्ट सिटी के कई प्रोजेक्ट्स

नागरिकों की भागीदारी के साथ बदल सकते हैं स्मार्टसिटी के कई प्रोजेक्ट्स

By: Devendra Sharma

Updated: 03 Jan 2020, 11:17 AM IST

भोपाल/ स्मार्टसिटी के जिन प्रोजेक्ट्स पर रहवासियों-नागरिकों की आपत्ति है और वे सुधार चाहते हैं, अब उनकी सुनी जाएगी। नागरिकों-रहवासियों की सलाह के बिना ये प्रोजेक्ट आगे नहीं बढ़ेंगे। शहरी विकास के लिए संसद की स्थायी समिति ने हाल में ये बदलाव किया है। अभी इसपर अंतिम आदेश और प्रक्रिया जारी होना है। नगरीय आवास एवं विकास मंत्री जयवद्र्धनसिंह के अनुसार जनता की राय का हमेशा सम्मान है और हम हर प्रोजेक्ट में लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करेंगे।

भोपाल में होगा असर

भोपाल में इसका असर होगा। यहां सबसे अधिक विरोध स्मार्टसिटी के टीटी नगर एरिया बेस्ड डेवलपमेंट प्रोजेक्ट पर होगा। यहां पर 70 प्लॉट यानि 70 प्रोजेक्ट हैं और नागरिकों की सलाह के बिना इसे तय किया गया है। अभी बुलेवार्ड स्ट्रीट से लेकर स्मार्ट हाट, दशहरा मैदान, कमर्शियल कॉम्प्लेक्स जैसे प्रोजेक्ट पर विरोध चल रहा है। सरकारी मकानों के लिए निर्माणाधीन बहुमंजिला इमारतों में से भी कुछ टॉवर पर आपत्ति है। ऐसे में नागरिकों की भागीदारी बढ़ाने वाले केंद्र के निर्णय से शहर के स्मार्टसिटी प्रोजेक्ट्स में भी बदलाव नजर आ सकता है।

इसलिए जरूरी की नागरिकों की सलाह

दरअसल भोपाल समेत कई स्मार्टसिटी में कई ऐसे प्रोजेक्ट्स शुरू कर दिए गए हैं जो अनुपयोगी है। लोगों के लिए कारगर नहीं है। जनता को इनसे कोई ठोस सुविधा नहीं है, लेकिन इनमें करोड़ों रुपए खर्च किए गए। अब स्मार्टसिटी आधारित रिव्यू होगा तो हकीकत सामने आएगी। संभव है, संबंधित अफसरों पर कार्रवाई भी हो।

648 करोड़ रुपए खर्च कर दिए

आपको शायद पता न हो, लेकिन भोपाल स्मार्टसिटी ने 200 करोड़ रुपए इज ऑफ डूइंग बिजनेस एप्लीकेशन, सिटीजन इंगेजमेंट व ग्रीविएंस मॉडल, सिटी लेवल एप्लीकेशन व स्मार्ट डेशबोर्ड, डाटा एनालिटीक्स व एमआईएस, सिटी लेवल जीआईएस, मोबाइल सर्विस डिलिवरी, वेस्ट टू एनर्जी कंजरवेशन, जीपीएस आधारित गार्बेज व्हीकल ट्रैकिंग, असेट एंड ऑपरेशन मैनेजमेंट सिस्टम, आरएफआईडी ऑफ गार्बेज बिन, वेस्ट नेटवर्क सिमुलेशन, जीआईएस बेस्ड ग्रिविएंस, जीयो फेसिंग ऑफ असेट के नाम पर खर्च किए। इनमें से कई प्रोजेक्ट का नाम आपने सुना भी नहीं होगा।

इसी तरह 448.21 करोड़ रुपए इंटेलीजेंट स्ट्रीट लाइट, सर्विलांस एंड एसओएस, एनवायरनमेंट व वाटर लेवल सेंसर, वाईफाई, इंटेलीजेंट शॉपिंग एप, स्मार्ट फोन डिटेक्शन, इंटरएक्टिव डिजिटल साइनेज के नाम पर खर्च। आपको भले ही ये भारी भरकम और तकनीकी शब्द समझ में न आ रहे हो, लेकिन कुल 648 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं।

इस तरह खर्च हुआ भोपाल स्मार्टसिटी में

- 120 करोड़ रुपए 80 प्रतिशत भवनों में एनर्जी एफिशिएंसी, स्मार्ट मीटरिंग, एनर्जी एफिशिएंसी स्ट्रीट लाइट।
- 50.50 करोड़ रुपए सोलिड वेस्ट मैनेजमेंट के नाम पर

- 150 करोड़ रुपए आईटी कनेक्टिविटी, डिजिटिलाइजेशन, इंटेलीजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट, स्मार्ट पार्किंग, सिटीजन सेफ्टी, एडिशनल स्मार्ट एप्लीकेशन।
- 86 करोड़ रुपए वेस्ट वाटर रिसायकिलिंग और स्टोर्म वाटर रियूज, रेन वाटर हार्वेस्टिंग।

- 95 करोड़ रुपए पेडेस्ट्रियन फ्रेंडली पाथवे, नॉन मोटराइज्ड ट्रांसपोर्ट को प्रोत्साहित करना, नॉन व्हीकल स्ट्रीट व जोन विकसित करना
- 20 करोड़ रुपए ओपन स्पेस के इनोवेटिव उपयोग जिससे क्षेत्र में विजिबल इंप्रुवमेंट नजर आए।

- 922 करोड़ रुपए शासकीय अफोरडेबल हाउस विकसित करने।
- 627 करोड़ रुपए लैंडस्कैपिंग, फ्लाइओवर की एप्रोच साइट, पब्लिक यूटिलिटी विकसित करना।

नोट- करीब साढ़े तीन हजार करोड़ रुपए का कुल खर्च है।


मैं हमेशा स्मार्टसिटी प्रोजेक्ट को आमजन के साथ मिलकर पूरा करने पर जोर देता रहा। जनप्रतिनिधि तक कोई इससे दूर रखा गया। अब नागरिकों की भागीदारी बढ़ेगी तो शहर को लाभ होगा। - आलोक शर्मा, महापौर

Devendra Sharma
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