कहीं प्रत्याशी में दम, कहीं रणनीति बेदम

कहीं प्रत्याशी में दम, कहीं रणनीति बेदम

Anil Chaudhary | Publish: Apr, 22 2019 05:05:05 AM (IST) Bhopal, Bhopal, Madhya Pradesh, India

- लोकसभा का रण : गढ़ों को ढहाने का दावा करने वाले दलों ने छोड़ी लूज साइट

जितेन्द्र चौरसिया, भोपाल. कांग्रेस और भाजपा ने लोकसभा के रण में भोपाल सीट पर पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह और साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को आमने-सामने लाकर कांटे की टक्कर के हालात पैदा कर दिए। दूसरी ओर चुनिंदा गढ़ों को ढहाने में दमदारी दिखाने से परहेज भी किया है। दोनों पार्टियों ने चुनावी बिसात पर 'तगड़ी फाइटÓ से लेकर 'लूज-साइटÓ छोड़कर शह-मात की राजनीति खेली है। खास बात ये कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने पिछले लोकसभा चुनाव व उपचुनाव में हारी गुना, छिंदवाड़ा व रतलाम सीट को निशाने पर रखा था, लेकिन समीकरण उलट-पुलट करने की रणनीति इनमें से एक ही सीट पर अपनाई गई है। ऐसे ही कांग्रेस ने भी कुछ सीटों को बड़े चेहरे उतारकर मुश्किल में लाने की बजाए नए चेहरों का दांव खेला है। देखिए, दोनों ओर कहां-कहां दमदारी कमजोर पड़ी...
- भाजपा : पहले बयानबाजी, अब ओढ़ी खामोशी
गुना : कांग्रेस के दिग्गज नेता सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के सामने भाजपा ने केपी यादव को उतारा है। यहां सिंधिया के खिलाफ हमेशा पार्टी उपाध्यक्ष प्रभात झा और पूर्व मंत्री जयभान सिंह पवैया आक्रामक रहते हैं। सिंधिया के विरुद्ध हमेशा ताल ठोंकने वाले इन दोनों नेताओं ने चुनाव में उतरने में रुचि नहीं दिखाई। सिंधिया का टिकट नहीं हुआ था, तब तक पवैया ने खूब बयानबाजी की, लेकिन टिकट होते ही खामोशी ओढ़ ली। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने विधानसभा चुनाव 2018 के पहले गुना सीट को अपने निशाने पर बताया था, लेकिन लोकसभा चुनाव में ऐसी रणनीति नहीं दिखी।

छिंदवाड़ा : छिंदवाड़ा में मुख्यमंत्री कमलनाथ के बेटे नकुलनाथ के सामने भाजपा ने पूर्व विधायक नत्थन शाह कवरेती को टिकट दिया है। यह सीट भी शाह ने निशाने पर रखी थी। भाजपा यहां से बड़े दिग्गज को उतारकर पूरे समीकरण ऐसे ही उलट-पुलट सकती थी, जैसे कांग्रेस ने भोपाल में दिग्विजय सिंह को उतारकर बदले हैं, लेकिन भाजपा ने इससे परहेज करके कमलनाथ के गढ़ में अपेक्षाकृत कमजोर प्रत्याशी दिया। भाजपा ने यहां पिछली बार कमलनाथ को टक्कर देने वाले वरिष्ठ नेता चौधरी चंद्रभान सिंह को भी दरकिनार किया है।
रतलाम : यहां कांग्रेस सांसद कांतिलाल भूरिया के सामने भाजपा ने विधायक जीएस डामोर को उतारा है। लोकसभा चुनाव में विधायक को न उतारने के फॉर्मूले को महज इस सीट पर पार्टी ने तोड़ा है। डामोर जल संसाधन विभाग के पूर्व ईएनसी हैं। अफसर रहने के दौरान उनकी क्षेत्र में पकड़ थी, इसीलिए कांतिलाल के बेटे विक्रांत को विधानसभा चुनाव में हराया। इस सीट पर डामोर मजबूत प्रत्याशी हैं। दोनों ओर टक्कर तगड़ी है। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के निशाने वाली तीन सीटों में महज इस सीट पर भाजपा ने लोकसभा चुनाव में तगड़ी जंग के हालात बनाए हैं। डामोर को पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान का करीबी माना जाता है।
- कांग्रेस : बड़ा चेहरा उतारकर दी टक्कर
सतना : यहां भाजपा सांसद गणेश सिंह के सामने कांग्रेस ने राजाराम त्रिपाठी को उतारा है। पिछले लोकसभा चुनाव में प्रदेश की 29 सीटों में सतना ही सबसे कम वोट से हारने वाली सीट थी। इस सीट पर कांग्रेस बड़ा चेहरा उतारकर एंटी-इंकम्बेंसी से जूझ रहे गणेश के लिए बेहद मुश्किल चुनाव कर सकती थी, लेकिन पिछली बार के कांग्रेस प्रत्याशी अजय सिंह इस बार सीधी पहुंच गए। दूसरा बड़ा चेहरा पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष राजेंद्र सिंह का था। वे दावेदारी भी कर रहे थे, लेकिन टिकट में राजाराम का पलड़ा भारी रहा। राजाराम को अजय सिंह खेमे का माना जाता है।
होशंगाबाद : यहां भाजपा सांसद राव उदयप्रताप सिंह के सामने कांग्रेस ने नए चेहरे शैलेंद्र दीवान को उतारा है। दीवान पूर्व मंत्री के पुत्र हैं, लेकिन लंबे समय से राजनीतिक हाशिए पर थे। कमलनाथ खेमे से होने के कारण उनको टिकट मिला है। यहां राव उदयप्रताप 2009 में कांग्रेस से सांसद थे, फिर 2014 में भाजपा में पहुंचकर सांसद बन गए। यहां से दिग्गज नेता सुरेश पचौरी और भाजपा से आए सरताज सिंह सहित कई दावेदार थे। कांग्रेस ने नए चेहरे पर भरोसा जताया, लेकिन राजनीतिक कद के हिसाब से शैलेंद्र फिलहाल अपेक्षाकृत छोटा चेहरा है। कांग्रेस बड़े चेहरे को उतारकर समीकरण बदल सकती थी।
- यहां मोहरे से ज्यादा ताकतवर चेहरे
खजुराहो : यहां दोनों दलों के प्रत्याशी की अपेक्षा उनका सपोर्ट तगड़ा है। कांग्रेस से कविता सिंह को विधायक पति विक्रम सिंह नातीराजा और भाजपा में वीडी शर्मा को संघ के नेटवर्क का साथ है। वीडी के बाहरी होने से विरोध भी हो रहा है।
मंडला : भाजपा सांसद फग्गन सिंह के सामने कांग्रेस ने नए चेहरे कमल मरावी का दांव खेला है। चार बार के सांसद फग्गन के कद के हिसाब से कमल का राजनीतिक कद नहीं है।
टीकमगढ़ : यहां भाजपा सांसद व केंद्रीय मंत्री वीरेंद्र खटीक के सामने कांग्रेस ने नया चेहरा किरण अहिरवार को उतारा है। दिग्विजय खेमे से किरण को टिकट मिला है। अपेक्षाकृत सियासी कद नहीं है।
राजगढ़ : यहां भाजपा सांसद रोडमल नागर के सामने कांग्रेस ने नए चेहरे मोना सुस्तानी को मौका दिया है। मोना का सियासी कद बहुत बड़ा नहीं है, लेकिन यह सीट दिग्विजय सिंह का गढ़ है। यहां दिग्विजय का नेटवर्क मोना के साथ है।

 

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