स्टार्च और कुकिंग ऑयल से बनेंगे इकोफ्रेंडली खिलौने

स्टार्च और कुकिंग ऑयल से बनेंगे इकोफ्रेंडली खिलौने

hitesh sharma | Publish: Sep, 03 2018 01:50:46 PM (IST) Bhopal, Madhya Pradesh, India

साइंस सेंटर में चल रहे दो दिवसीय इनोवेशन फेस्टिवल का रविवार को समापन हो गया। एग्जीबिशन में 40 प्रोजेक्ट डिस्प्ले किए गए थे।

भोपाल। साइंस सेंटर में चल रहे दो दिवसीय इनोवेशन फेस्टिवल का रविवार को समापन हो गया। एग्जीबिशन में 40 प्रोजेक्ट डिस्प्ले किए गए थे। फेस्ट के अंत में जजेस ने स्कूल कैटगरी में अनुष्का श्रीवास्तव और कनिका दीक्षित के इको फ्रेंडली बॉटल प्रोजेक्ट को फस्र्ट, रुक्षांक गोयल के इंटेली बिन, पकंज गुप्ता और उत्कर्ष सिंह के मल्टीपर्सपज साइकिल को थर्ड प्राइज दिया।

वहीं रिया जैन के नैनो हीटर कूलर, अभिजीत कुलश्रेष्ठ के एटीएम फॉर मेडिसिन और मो. अकदस लारी के ड्यून बगी को सांत्वना पुरस्कार के लिए चुना। इसी तरह कॉलेज कैटगरी में सिद्धार्थ झोकरकर और कुमार गौरव के शॉक प्रूफ बैन को फस्र्ट और यश के प्रोजेक्टर मॉडल को सांत्वना पुरस्कार दिया गया। इसी ग्रास रूट इनोवेशन कैटगरी में डॉ. दिनेश खरे के लाइफ सेविंग इक्यूपमेंट को फस्र्ट पुरनलाल कुशवाह के पवन पानी पावर से चलने वाले प्लांट को सेकंड और दीपक मालवीय के ग्रीन एलईडी लाइफ सेफ्टी पॉल्यूशन और फ्यूल सेविंग को थर्ड प्राइज मिला।

 

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चाइनीज खिलौने की तरह नहीं होंगे घातक

सत्यसांई कॉलेज की एमएससी फाइनल ईयर की स्टूडेंट्स रश्मि द्विवेदी और मनीषा यादव ने स्टॉर्च, कुकिंग ऑयल, डिस्टिल वाटर और फूड कलर की मदद से एक एलिमेंट बनाया है। उनकी गाइड डॉ. वर्षा सक्सेना के अनुसार इस सभी चीजों को मेस कर दो से तीन मिनट तक हीट दी जाती है। इसके बाद इसे छोड़ दिया जाता है। रासायनिक क्रिया होने पर ये कठोर हो जाता है। दो से तीन हफ्ते में ये प्लास्टिक की तरह कठोर हो जाता है। इसकी मदद से इकोफ्रेंडली खिलौने बनाए जा सकते हैं। डॉ. सक्सेना का कहना है इस मटेरियल से बने खिलौने चाइनीज खिलौनों की तरह बच्चों के स्वास्थ्य के लिए घातक नहीं होंगे।

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भीड़ भरे इलाकों में बनेगी बिजली

सेंट जेवियर स्कूल के दसवीं के स्टूडेंट सैयद हैदर ने ने एक ऐसा प्रोजक्ट तैयार किया है, जिसमें भीड़ भरे इलाकों में फूट प्रेशर से बिजली जनरेट की जा सकती है। सैयर के अनुसार प्रोजेक्ट पिजियो इलेक्ट्रीक जनरेटर प्रिंसिपल पर बेस्ड है। सड़क के नीचे क्रिस्टल लगाए जाते हैं। लोगों के आने-जाने पर रोजल्ट सॉल्ट प्रेशर जनरेट होगा। इसे एसी से डीसी में कन्वर्ट कर एनर्जी जनरेट की जा सकती है। मैंने अपने प्रोजेक्ट में तीस क्रिस्टल लगाए हैं। इससे 9 वॉट का बल्ब जलाया जा सकता है।

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गंदे पानी से बनेगी बिजली

टीकमगढ़ जिले के भवनपुरा गांव में रहने वाले पूरणलाल कुशवाह ने बिजली बनाने के लिए देसी यंत्र बनाया है। उन्हें इसके लिए 1990 में सागर संभाग में और 2001 में दिल्ली में इनोवेशन अवार्ड मिल चुका है। पहले उन्होंने बैल से घूमने वाला पंप बनाया था जो तीन हॉर्स पॉवर की मोटर से पानी निकाल लेता था। अभी उनके बनाए यंत्र को झरने या किसी पहाड़ी के नीचले हिस्से में लगाया जा सकता है। इसके ऊपरी हिस्से में लगे टैंक में पानी एकत्रित होता है। जो मशीन के चक्के के बेल्ट में फंसी बाल्टियों में जाता है। इसके प्रेशर से मोटरी घूमती है और बिजली बनती है। वे इसी माह श्यामला हिल्स पहाड़ी के नीचले हिस्से में 100 फीट ऊंचा यंत्र लगाने वाले हैं।

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ठंडी और गर्म हवा देकर स्मार्ट कूलर

विदिशा के एसएटीआई कॉलेज में इलेक्ट्रीकल डिपार्टमेंट के थर्ड ईयर स्टूडेंट सत्यम नायक और शुभम मांडवे ने स्मार्ट कूलर बनाया है। सत्यम का कहना है कि उसके दादा को पैरालिसिस अटैक आया तो रिमोट से चलने वाले स्मार्ट कूलर को बनाने का आइडिया आया। इसमें सिर्फ 1200 रूपए का खर्च आया। ये कूलर ठंडी हवा देता है। गर्म हवा के लिए हीटर लगाया है। पूरा सिस्टम ऑटोमैटिक होने के कारण इसे सेट टाइमिंग से बंद चालू भी किया जा सकता है।
स्क्रेप से बनाई रेसिंग कार

कैंपियन स्कूल में पढऩे वाले मो. अकदस, हुजैफ खान और नूर उल हुदा दसवीं के छात्र हैं। इन जूनियर क्रिएटर्स ने रेसिंग कार बनाई है। जिसे उन्होंने ड्यून बगी नाम दिया है। इसे उन्होंने वेस्ट मटेरियल और स्क्रेप से बनाया है। करीब तीस हजार की लागत से तैयार ये कार 40 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से चल सकती है। इममें ए आम्र्स संस्पेंशन और लिक्विड कूल इंजन का यूज किया है।

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