राज्य कर्मचारी बीमा अस्पताल ‘बीमार’, न डॉक्टर हैं ना ही मरीजों को कर रहे भर्ती

राज्य कर्मचारी बीमा अस्पताल ‘बीमार’, न डॉक्टर हैं ना ही मरीजों को कर रहे भर्ती

Bharat pandey | Publish: Jul, 14 2018 07:28:56 AM (IST) Bhopal, Madhya Pradesh, India

सरकार हर साल करोड़ों रुपए गोविंदपुरा, मंडीदीप के हजारों श्रमिकों से लेती है, फिर भी बेहतर इलाज नहीं दे पा रही है।

सोनागिरी। मप्र का सबसे बड़ा राज्य कर्मचारी बीमा अस्पताल ‘बीमार’ पड़ा है। यहां न तो विशेषज्ञ डॉक्टर है और न ही मरीज। सरकार हर साल करोड़ों रुपए गोविंदपुरा, मंडीदीप के हजारों श्रमिकों से लेती है, फिर भी बेहतर इलाज नहीं दे पा रही है। अब तो अस्पताल में मरीजों की भर्ती बंद कर दी गई है। गंभीर मरीजों को जेपी, हमीदिया में रेफर किए जा रहे हैं।

सरकारी महकमे के जिम्मेदारों की अनदेखी का शिकार सोनागिरी का राज्य बीमा अस्पताल हो चुका है। यहां वर्तमान में करीब 30 पैरामेडिकल स्टॉफ है। आधे दर्जन विशेषज्ञों की भी कमी है। टेक्नीशियन नहीं है। मशीनों के नाम पर सोनाग्राफी बंद पड़ी है। सिर्फ एक्स-रे मशीन चालू है, जोकि पुरानी टेक्नीक से काम करती है।

माडर्न एक्सरे मशीन नहीं है। पैथालाजी तो महीनों से बंद पड़ी है। बीमा अस्पताल में यहां के डॉक्टरों द्वारा लिखी दवाएं भी कॉउटर पर नहीं मिलती। आधी-अधूरी दवा मिलने से मरीजों को बाहर से दवा खरीदनी पड़ती है। इमरजेंसी डॉक्टर दिन में मौजूद नहीं रहते। गंभीर मरीज के आने पर डॉक्टर को फोन करके बुलाया जाता है।

हमीदिया, जेपी अस्पताल में रेफर किए जा रहे मरीज
कहने को वार्ड और 100 बिस्तर है, लेकिन मरीज 30-35 ही भर्ती है। स्टॉफ कम होने से मरीजों की भर्ती नहीं की जा रहा है। केवल ओपीडी में आने वाले रोजाना 250-300 मरीजों का इलाज किया जा रहा है। गंभीर होने की स्थिति में मरीज को हमीदिया और जेपी में रेफर किया जा रहा है। बीते छह महीने में यहां 8 पैरामेडिकल स्टॉफ रिटायर हो गए हैं। उनकी जगह पदस्थी नहीं की गई है।

सहायक डॉक्टरों के भरोसे चल रही है ओपीडी
खास बात यह है कि मंडीदीप और गोविंदपुरा, भेल के सैकड़ों श्रमिकों एवं कर्मचारियों से सालाना लाखों रुपए ईएसआई के नाम पर तो काटे जाते हैं लेकिन बेहतर इलाज की सुविधा इस अस्पताल में मौजूद नहीं है। स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की कमी है। सर्जिकल, आर्थोपेडिक, गायनिक, ईएनटी में डॉक्टर नहीं है। ओपीडी सहायक डॉक्टरों के भरोसे हैं। ईएनटी में सप्ताह में एक दिन ग्वालियर से विशेषज्ञ इलाज के लिए आते हैं।

अस्पताल की तीनों डिस्पेंसरियों के भी बुरे हाल
बीमा अस्पताल में संचालित तीन डिस्पेंसरियां अलग-अलग समस्याओं से घिरी हुई हैं। सभी में डॉक्टर सहित नर्सों की कमी लंबे समय से बनी हुई है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार यहां से कमियों को दूर करने के संबंध में कई बार राज्य सरकार को पत्र भेजे जा चुके हैं। यहां पूर्व आए श्रम मंत्री को भी सुविधाएं मुहैया कराने संबंधी मांग की जा चुकी है।

 

अस्पताल में बहुत अव्यवस्थाएं है
सोनगिरी राज्य कर्मचारी बीमा अस्पताल में बहुत सारी अव्यवस्थाएं है। स्टॉफ की कमी है। श्रमिकों को इलाज नहीं मिल पा रहा है। निजी अस्पतालों में भेज दिया जाता है। हमने उच्चाधिकारियों से इस संबंध में शिकायत की है, लेकिन व्यवस्थाओं में कोई सुधार नहीं किया गया है।
मनीष गौतम, अध्यक्ष म.प्र. भेल ठेका मजदूर कांग्रेस


सभी दवाइयां दी जाती है
बीमा अस्पताल में स्टॉफ और विशेषज्ञों की कमी है। जल्द ही शासन संविदा भर्ती करने जा रही है। मरीजों के लिए पर्याप्त सुविधाएं है। अस्पताल में निर्माण कार्य होने के कारण कुछ मरीजों को अस्थायी तौर पर दूसरे अस्पताल में रैफर किया है। सभी दवाइयां दी जाती है।
डॉ हिमाद्री सतपथी, सीएमएचओ, राज्य बीमा कर्मचारी अस्पताल

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