जागरण में गाना गानें पर मिला था सौ रुपए मेहनताना, आवाज सुनकर सोनु निगम और दलेर मेहंदी भी हो गए फैन

मंदसौर की 61 साल वर्षीय सुगन देवी गन्धर्व(sugandh devi gandharva mandsaur) के वायरल वीडियो को 14 दिनों में ही एक करोड़ से ज्यादा लोग देख चुके हैं, अब प्लेबैक सिंगिंग के मिल रहे ऑफर्स

 

By: hitesh sharma

Published: 07 Jul 2019, 10:45 PM IST

भोपाल। सुगन देवी गन्धर्व(sugandh devi gandharva mandsaur) का बचपन रतलाम में बिता। पिता को संगीत से प्यार था, उन्हें देख मैं गाना गानें लगी। रेडियो पर लता मंगेश्कर के गानें सुनती थी और फिर उनका रियाज करती थी। 16 साल की उम में शादी होकर मंदसौर चली गई। मेरे पति को भी संगीत से लगाव था, लेकिन उन्हें यह पसंद नहीं था कि मैं बाहर जाकर स्टेज परफॉर्मेंस दूं। मैंने अकेले में गाकर अपने शौक पूरे करती। मेरे ससुर की पुण्यतिथि पर शृद्धाजंलि देते हुए पहली बार लोगों के बीच गाया।

इसके बाद मुझे माता के जागरण में गानें के लिए लोग बुलाने लगे। इसके बदलने मुझे 100 रुपए मेहनताना मिलता था। मुझे नहीं पता था कि मेरा वीडियो इतना वायरल हो जाएगा कि जिंदगी की सबसे बड़ी ख्वाहिश 61 साल की उम्र में पूरी होगी। मैं तो सोचती थी कि मेरी इच्छाएं मेरी मौत के साथ ही खत्म हो जाएगी। यह कहना है सुगन देवी गन्धर्व(sugandh devi gandharva mandsaur) का। जनजातीय संग्रहालय में रविवार को होने वाले उत्तराधिकार शृंखला में गायन कार्यक्रम में शामिल होने के लिए वे भोपाल आई थी।

6 अप्रेल को इसे प्लेबैक सिंगर दलेर मेहंदी ने शेयर किया वीडियो

सुगन देवी(sugandh devi gandharva mandsaur) का कहना है कि मेरे बच्चे, बहुओं और पोते-पोतियों को मेरी आवाज बहुत पसंद है। मैं गाती हूं तो कोई ढोलक बजाता है तो कोई मंजीरा और बासुंरी। 5 अप्रेल को मेरे बेटे उमेश और पोते ने मेरा वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाल दिया। 6 अप्रेल को इसे प्लेबैक सिंगर दलेर मेहंदी ने शेयर किया। 16 अप्रेल तक इसे देश-विदेश में एक करोड़ से ज्यादा लोग देख चुके थे। इतना ही नहीं दलेर महेंदी ने मुझे मिलने के लिए मेघनगर बुलाया। यहां वे एक घंटे तक मुझे सुनते रहे। उन्होंने मुझे मुबंई बुलाकर प्लेबैक सिंगिंग करने का भी ऑफर दिया है।

sugandh devi gandharva mandsaur

मुझे ठुमरी गाना पसंद है
sugandh devi gandharva mandsaur ने कहा कि मुझे ठुमरी गाना सबसे ज्यादा पसंद है। यह मेरे दिल के सबसे करीब है। मैं अपने नाती-पोती को भी संगीत और नृत्य सीखा रही हूं। मैं उन्हें हमेशा प्रेरणा देती हूं कि वे अपने टैलेंट को दुनिया को दिखाए। मुझे नाज है कि मैंने अपनी परिवार की मर्यादाओं को निभाया, लेकिन दुख भी है कि काश एक बार मौका मिला होता। मैं एक बार फिल्मी गीतों को अपनी आवाज देना चाहती हूं। स्टेज शो में जब दर्शक मेरी आवाज सुनकर खो जाते हैं तो दिल को सुकुन मिलता है।

hitesh sharma Reporting
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